FII Investment: 4 साल तक डटे रहे फिर भी कमाई जीरो, यूं ही नहीं भारत से बोरिया-बिस्तर बांध भाग रहे FII

FII Investment: 4 साल तक डटे रहे फिर भी कमाई जीरो, यूं ही नहीं भारत से बोरिया-बिस्तर बांध भाग रहे FII

FII Investment in India: ईरान-अमेरिका के बीच जंग शुरू होने से लेकर अब तक भारत के शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों ने करीब 18 अरब डॉलर यानी तकरीबन डेढ़ लाख करोड़ रुपए निकाल लिए हैं। निफ्टी अपने 52 हफ्ते के उच्च स्तर से 9 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। जो भारत कल तक दुनिया का चहेता उभरता बाजार था, आज विदेशी पूंजी के लिए “नो-एंट्री जोन” बनता जा रहा है। पर असली सवाल यह है कि ये पैसा बाहर क्यों जा रहा है? और क्या यह सिर्फ जंग का डर है, या कुछ और भी पक रहा है? आइए कुछ पॉइंट्स से समझते हैं।

  1. सीजफायर हुआ पर बाजार को भरोसा नहीं

दो हफ्ते की जंगबंदी से बाजार में थोड़ी रौनक जरूर आई, लेकिन बड़े खिलाड़ी इसे असली राहत नहीं मान रहे। ईरान पर नाकेबंदी का खतरा अभी टला नहीं है और युद्ध के “फेज 2” की आशंका बनी हुई है। जब तक कोई ठोस और टिकाऊ समझौता नहीं होता, बड़े फंड बाजार में एंट्री नहीं लेंगे।

  1. क्रूड ऑयल- दोहरी मुसीबत

ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब मंडरा रहा है। भारत के लिए यह सिर्फ पेट्रोल-डीजल महंगा होने की बात नहीं है। महंगा तेल एक साथ दो घाव करता है। आयात बिल बढ़ता है, जिससे चालू खाते का घाटा बड़ा होता जाता है और देश के भीतर महंगाई बढ़ती है। ऊपर से RBI पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव आता है। जबकि यह वह वक्त होता है, जब अर्थव्यवस्था को नर्म रुख की जरूरत होती है। यह वही “दोहरे घाटे का जाल” है जिससे भारत पहले भी जूझ चुका है।

  1. रुपये का टूटना और अमेरिकी बॉन्ड का बढ़िया रिटर्न

रुपया पहली बार 95 के पार चला गया। अब अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर 4.5 फीसदी का सुरक्षित रिटर्न मिल रहा है। ऐसे में कोई विदेशी निवेशक भारत की उठापटक क्यों झेले? डॉलर में हिसाब लगाने पर रुपए की गिरावट उनका मुनाफा चुपचाप खा जाती है।

  1. दक्षिण कोरिया और ताइवान आगे, भारत पीछे

अगर आप एक ग्लोबल फंड मैनेजर हैं और आपको साउथ कोरिया और भारत में से चुनना है, तो आज की तारीख में भारत पहली पसंद नहीं रहा। FY27 में भारत की कमाई वृद्धि का अनुमान इन देशों के मुकाबले कमजोर दिख रहा है। Elara Securities के आंकड़े बताते हैं कि जब दूसरे उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी का बहाव थम गया, तब भी भारत में यह लगातार पाँचवें हफ्ते भी जारी रहा। भारत अपवाद बन गया है, पर अच्छे मायने में नहीं।

  1. टैक्स का बोझ: पॉलिसी का उल्टा असर

2024 के बजट में सरकार ने शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स 15% से बढ़ाकर 20% कर दिया। लॉन्ग टर्म 10% से 12.5% हो गया। Securities Transaction Tax भी FY27 से बढ़ने वाला है। इसके ऊपर LTCG और STCG ढांचे में भी बदलाव हुए। वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देश टैक्स के मामले में कहीं ज्यादा आकर्षक हैं। भारत का टैक्स ढांचा अब एक “प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान” बनता जा रहा है।

  1. चार साल, जीरो कमाई- यही सबसे बड़ा दर्द है

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंकों में एक आंकड़ा खूब चर्चा में है — डॉलर के हिसाब से 2021 के अंत से अब तक निफ्टी ने लगभग शून्य सालाना रिटर्न दिया है। चार साल से ज्यादा वक्त तक पैसा फंसाए रखो और रुपए की गिरावट पूरा मुनाफा मिटा दे। ऐसे में अपनी इन्वेस्टमेंट कमेटी को भारत में दोबारा पैसा लगाने के लिए कैसे मनाएंगे? यह महज एक आंकड़ा नहीं, एक भरोसे का टूटना है।

  1. कंपनियों की कमाई पर भी खतरा

जंग का असर अब सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। कच्चा माल महंगा है। Manufacturing और FMCG कंपनियों के Q1 और Q2 के नतीजे कमजोर रहने के आसार हैं। विदेशी निवेशक इन बुरे नतीजों के आने से पहले ही निकल रहे हैं। यह “आंकड़े आने से पहले भाग लो” वाली रणनीति है। FY27 में दहाई अंकों की जो कमाई वृद्धि का सपना था, वह अब एकल अंक में सिमटता दिख रहा है। अगर हालात और बिगड़े तो यह सपना और दो तिमाहियों के लिए टल सकता है।

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