फेस्टिव सेल में बड़ा डिस्काउंट देखकर खरीदारी करना आसान लगता है, लेकिन असली बचत तभी होती है जब आप सही पेमेंट विकल्प चुनें। इस समय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चल रही सेल में बैंक डिस्काउंट, कैशबैक और EMI के कई ऑफर मिल रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि महंगा सामान खरीदने के लिए पूरा पेमेंट करना बेहतर है, क्रेडिट कार्ड EMI चुननी चाहिए या नो-कॉस्ट EMI? आइए विस्तार से जानते हैं।
सामान्य EMI कब महंगी पड़ सकती है?
सामान्य ईएमआई में ग्राहक को फोन की कीमत के साथ ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और लागू GST भी चुकाना पड़ सकता है। लंबी अवधि की ईएमआई में मासिक किस्त कम दिखाई दे सकती है, लेकिन कुल ब्याज बढ़ सकता है। हालांकि, कुछ सेल में बैंक स्पेशल ईएमआई डिस्काउंट देते हैं। अगर यह छूट ब्याज और बाकी शुल्क से ज्यादा है, तो सामान्य ईएमआई कुछ मामलों में नो-कॉस्ट ईएमआई से सस्ती भी पड़ सकती है। इसलिए फाइनल बिल की तुलना करना जरूरी है।
नो-कॉस्ट EMI किसके लिए सही है?
अगर आपके पास पूरी रकम उपलब्ध नहीं है और एक साथ भुगतान करने से आपकी जरूरी बचत प्रभावित होगी, तो नो-कॉस्ट EMI उपयोगी विकल्प हो सकती है। लेकिन इसके लिए कुछ शर्तों पर ध्यान दें:
- EMI की कुल रकम और सभी शुल्क पहले जांच लें।
- प्रोसेसिंग फीस और उस पर लगने वाले GST को जोड़ें।
- समय पर हर किस्त चुकाने की क्षमता का आकलन करें।
- यह देखें कि EMI लेने से नियमित कैशबैक या रिवॉर्ड पॉइंट्स तो नहीं छूट रहे।
- अगर संभव हो तो पूरा भुगतान करने पर मिलने वाली छूट से तुलना करें।
सामान्य ईएमआई तभी चुनें जब उसका कुल खर्च दूसरे विकल्पों से कम हो या वह आपके बजट के हिसाब से अधिक व्यावहारिक हो।
क्या EMI से क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ता है?
सामान्य ईएमआई और नो-कॉस्ट ईएमआई, दोनों का असर मुख्य रूप से पेमेंट के अनुशासन और उपलब्ध क्रेडिट लिमिट के इस्तेमाल पर निर्भर करता है। ईएमआई शुरू होने पर क्रेडिट कार्ड की लिमिट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल हो सकता है। इससे क्रेडिट यूटिलाइजेशन बढ़ सकता है और स्कोर पर असर पड़ने की संभावना रहती है।
उदाहरण के लिए, अगर आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट 2 लाख रुपये है और आप 1.65 लाख रुपये का फोन EMI पर खरीदते हैं, तो लिमिट का 80% से ज्यादा हिस्सा इस्तेमाल हो सकता है। इससे क्रेडिट यूटिलाइजेशन ऊंचा रहेगा। यदि किस्त समय पर नहीं चुकाई जाती है तो क्रेडिट रिपोर्ट पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए सिर्फ नो-कॉस्ट ईएमआई होने से क्रेडिट स्कोर बेहतर नहीं हो जाता। समय पर भुगतान और लिमिट का संतुलित इस्तेमाल ज्यादा महत्वपूर्ण है।
फेस्टिव सेल में बचत करने के 7 तरीके
- सभी प्रमुख ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर कीमत देखें: एक ही फोन की कीमत अलग-अलग वेबसाइट्स पर अलग हो सकती है।
- बैंक ऑफर की शर्तें पढ़ें: 10% डिस्काउंट का मतलब हर बार पूरी कीमत पर 10% बचत नहीं होता। अधिकतम छूट की सीमा लागू हो सकती है।
- कैशबैक भी जोड़ें: इंस्टेंट डिस्काउंट और कैशबैक की वास्तविक रकम की तुलना करें।
- एक्सचेंज ऑफर जांचें: पुराने फोन के बदले मिलने वाली रकम की तुलना अलग से बेचने पर मिलने वाली कीमत से करें।
- EMI के शुल्क देखें: प्रोसेसिंग फीस, GST, ब्याज और रिवॉर्ड पॉइंट्स की शर्तों को नजरअंदाज न करें।
- पुरानी कीमत से तुलना करें: केवल बड़े डिस्काउंट के दावे पर भरोसा न करें। हाल की कीमत भी जांचें।
- बेवजह खरीदारी से बचें: सीमित समय का ऑफर जरूरी नहीं कि अच्छी डील हो।
सबसे सस्ता विकल्प कौन-सा है?
अगर आपके पास पर्याप्त बचत है और पूरा भुगतान करने से इमरजेंसी फंड या दूसरे जरूरी खर्च प्रभावित नहीं होते, तो फुल पेमेंट अक्सर बेहतर विकल्प हो सकता है। अगर आप किस्तों में भुगतान करना चाहते हैं, तो नो-कॉस्ट EMI और सामान्य EMI दोनों की कुल लागत निकालें। ध्यान रखें, सबसे अच्छा विकल्प वह है जिसमें सभी डिस्काउंट, कैशबैक, ब्याज, GST और फीस जोड़ने के बाद कुल पेमेंट सबसे कम हो।

