‘सब मना कर रहे थे, मत जाओ, अभी आग जल रही है, फंस जाओगे। मैंने कहा- अब इंतजार नहीं कर सकते। इतना कहते ही मैं अंदर की तरफ भागा, गेट राख बन गया था। एक धक्के में ही टूट गया। अंदर जाते ही मेरे होश उड़ गए। मेरे सामने सृष्टि और रूद्र कंकाल बने लिपटें हुए थे। ऐसा लग रहा था कि दोनों एक-दूसरे को पकड़कर बचने की कोशिश कर रहे थे। उनसे करीब दो फीट की दूरी पर स्टाफ प्रिंस का कंकाल पड़ा था।’ ये आंखों देखी भयावह मंजर मोतिहारी के उस घर की है, जहां शनिवार को दो बच्चों और एक युवक की जिंदा जलकर मौत हो गई। आग कैसे लगी, घटना की रात क्या-क्या हुआ? पिता ने कैसे बचाई खुद की जान? बच्चों को क्यों नहीं बचा पाए? सबसे पहले घटना किसने देखी? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम मौके पर पहुंची, पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट… घटना से जुड़ी तस्वीरें… मोतिहारी के ढाका प्रखंड अंतर्गत बड़हरवा फतेह मोहम्मद गांव में मस्जिद के लाउडस्पीकर से बार-बार अनाउंस किया जा रहा था- “राजकुमार साह के घर में आग लग गई है… जल्दी पहुंचिए…”। राजकुमार का नाम सुनते ही पहले पड़ोसी जागे। इसके बाद धीरे-धीरे पूरा गांव उठकर घर के पास पहुंच गया, लेकिन आग की लपटों को देखकर किसी की हिम्मत उस घर के पास जाने की नहीं हो रही थी। सड़क पर खड़ा राजकुमार साह खून से लथपथ था। उसके बाल झुलस चुके थे। ठीक से बोल नहीं पा रहा था। पड़ोसी सुरेश पासवान ने कहा कि जब मैंने उनसे पूछा कि बच्चे कहां हैं, तो राजकुमार ने बस इतना कहा- “सब भगवान के पास चले गए…” फिर बेहोश होकर गिर पड़े। जब दैनिक भास्कर की टीम घटनास्थल पर पहुंची, तब भी घर से धुआं उठ रहा था। पुलिस ने पूरे इलाके को घेर रखा था। आसपास जमा लोगों के चेहरों पर घबराहट साफ दिखाई दे रही थी। कोई धीरे-धीरे घटना के बारे में बता रहा था, तो कोई सिर्फ चुपचाप खड़ा होकर जल चुके घर को एकटक देख रहा था। सबसे पहले हमारी मुलाकात अमरजीत से हुई, जिसने अंदर जाकर शवों को बाहर निकाला था। वह बार-बार पानी पी रहा था, उसकी आवाज अब भी कांप रही थी। उसने बताया कि जब वह पहुंचा, तब घर की खिड़कियों से आग की लपटें बाहर निकल रही थीं। लोग दूर खड़े थे। कोई पास जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। फायर ब्रिगेड की छोटी गाड़ी आई जरूर, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि उस पर उसका कोई असर नहीं पड़ रहा था। शुरुआत के एक घंटे बाद रात करीब 12 बजे अचानक जोरदार धमाका हुआ। आसपास खड़े लोग चीखते हुए पीछे भागे। यह सिलेंडर ब्लास्ट था। धमाके के बाद आग और भड़क गई। कुछ देर के लिए पूरा इलाका धुएं से ढंक गया। पिता ने कैसे बचाई खुद की जान, बच्चों को क्यों नहीं बचा पाए अमरजीत बताते हैं कि पहली मंजिल पर बेडरूम था। गेट पर की-चेन लटक रही थी। हॉल में काफी सामान रखा हुआ था। आग पहले दुकान में शॉर्ट सर्किट से लगी। इसके बाद तेजी से ऊपर पहुंची और देखते ही देखते पूरा घर उसकी चपेट में आ गया। इसी दौरान राजकुमार की नींद खुली। वह घबराहट में घर से बाहर निकल आए, फिर ध्यान आया कि बच्चे अंदर ही सो रहे हैं। वो दोबारा अंदर गए, रूद्र-रूद्र चिल्लाए, लेकिन कोई आवाज नहीं आई। आग तेजी से चारों तरफ फैल रही थी। उन्हें कुछ समझ नहीं आया और वह खिड़की से कूद गए। इस कारण उनकी जान बच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, राजकुमार साह अपने बच्चों को बचा लेते, लेकिन सिलेंडर ब्लास्ट के बाद बच्चों के कमरों तक पहुंचना नामुमकिन हो गया। जब कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर लगभग काबू पाया गया तो अमरजीत सबसे पहले कमरे के अंदर पहुंचे। उनके पीछे कई और लोग भी गए। वहां का दृश्य देखकर हर कोई भावुक हो गया। भाई-बहन सृष्टि और रुद्र के शव एक साथ लिपटे पड़े थे। ऐसा लग रहा था जैसे आखिरी वक्त में दोनों एक-दूसरे को पकड़कर बचने की कोशिश कर रहे हों। उनसे कुछ दूरी पर प्रिंस का शव मिला। दिन में ही घर लाए थे दोनों बच्चों को, रात में हादसा गांव के लोगों का कहना है कि शुक्रवार को ही राजकुमार दोनों बच्चों को अपने घर लेकर आए थे। राजकुमार साह की पत्नी नीरा गुप्ता 5 मई को अपने तीनों बच्चों के साथ अपनी बहन के बेटे की शादी में पताही गई थी। 7 मई को शादी समारोह खत्म हुआ। दोनों बच्चों का स्कूल मिस नहीं हो, इसलिए 8 मई को ही राजकुमार अपने एक बेटे रूद्र और बेटी सृष्टि को लेकर घर लौट आए। वहीं उनकी पत्नी छोटी बेटी के साथ वहीं रह गई थी। इसी दौरान गांव की महिलाएं आपस में कहती नजर आईं, “अगर वे भी यहां आ गए होते, तो शायद कोई नहीं बचता…” पड़ोसी दुकानदार को भी हुआ नुकसान राजकुमार साह के ठीक बगल के दुकानदार रविंद्र गुप्ता की दुकान भी आग की चपेट में आ गई। उन्होंने बताया कि रात 10 बजे दुकान बंद कर घर गए थे। करीब साढ़े 11 बजे फोन आया कि दुकान में आग लग गई है। जब पहुंचे, तब तक आग बहुत फैल चुकी थी। उनकी दुकान का सामान जल गया और दीवारों में दरारें तक पड़ गई। इकलौता कमाने वाला था स्टाफ प्रिंस इधर, स्टाफ प्रिंस राजकुमार साह के यहां पिछले छह-सात महीनों से काम कर रहा था। उसके चाचा बताते हैं कि वह हर 10-15 दिन पर घर जाता था। चार भाइयों में सबसे बड़ा था। शादी हो चुकी थी। तीन साल का बेटा और दो महीने की बेटी है। बूढ़े पिता मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। प्रिंस की मौत की खबर गांव पहुंची, तो वहां भी मातम छा गया। परिवार को अब तक यकीन नहीं हो रहा कि घर चलाने वाला उनका सबसे बड़ा सहारा अब इस दुनिया में नहीं रहा। घटना की सूचना मिलने के बाद डीएम सौरभ जोरवाल, सिकरहना एसडीओ और एसडीपीओ उदय शंकर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पीड़ित परिवार को डीएम सौरभ जोरवाल ने 8 लाख का तत्काल मुआवजा और स्टाफ प्रिंस के परिवार को 4 लाख रुपए की सहायता दी है। पुलिस ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है। ‘सब मना कर रहे थे, मत जाओ, अभी आग जल रही है, फंस जाओगे। मैंने कहा- अब इंतजार नहीं कर सकते। इतना कहते ही मैं अंदर की तरफ भागा, गेट राख बन गया था। एक धक्के में ही टूट गया। अंदर जाते ही मेरे होश उड़ गए। मेरे सामने सृष्टि और रूद्र कंकाल बने लिपटें हुए थे। ऐसा लग रहा था कि दोनों एक-दूसरे को पकड़कर बचने की कोशिश कर रहे थे। उनसे करीब दो फीट की दूरी पर स्टाफ प्रिंस का कंकाल पड़ा था।’ ये आंखों देखी भयावह मंजर मोतिहारी के उस घर की है, जहां शनिवार को दो बच्चों और एक युवक की जिंदा जलकर मौत हो गई। आग कैसे लगी, घटना की रात क्या-क्या हुआ? पिता ने कैसे बचाई खुद की जान? बच्चों को क्यों नहीं बचा पाए? सबसे पहले घटना किसने देखी? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम मौके पर पहुंची, पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट… घटना से जुड़ी तस्वीरें… मोतिहारी के ढाका प्रखंड अंतर्गत बड़हरवा फतेह मोहम्मद गांव में मस्जिद के लाउडस्पीकर से बार-बार अनाउंस किया जा रहा था- “राजकुमार साह के घर में आग लग गई है… जल्दी पहुंचिए…”। राजकुमार का नाम सुनते ही पहले पड़ोसी जागे। इसके बाद धीरे-धीरे पूरा गांव उठकर घर के पास पहुंच गया, लेकिन आग की लपटों को देखकर किसी की हिम्मत उस घर के पास जाने की नहीं हो रही थी। सड़क पर खड़ा राजकुमार साह खून से लथपथ था। उसके बाल झुलस चुके थे। ठीक से बोल नहीं पा रहा था। पड़ोसी सुरेश पासवान ने कहा कि जब मैंने उनसे पूछा कि बच्चे कहां हैं, तो राजकुमार ने बस इतना कहा- “सब भगवान के पास चले गए…” फिर बेहोश होकर गिर पड़े। जब दैनिक भास्कर की टीम घटनास्थल पर पहुंची, तब भी घर से धुआं उठ रहा था। पुलिस ने पूरे इलाके को घेर रखा था। आसपास जमा लोगों के चेहरों पर घबराहट साफ दिखाई दे रही थी। कोई धीरे-धीरे घटना के बारे में बता रहा था, तो कोई सिर्फ चुपचाप खड़ा होकर जल चुके घर को एकटक देख रहा था। सबसे पहले हमारी मुलाकात अमरजीत से हुई, जिसने अंदर जाकर शवों को बाहर निकाला था। वह बार-बार पानी पी रहा था, उसकी आवाज अब भी कांप रही थी। उसने बताया कि जब वह पहुंचा, तब घर की खिड़कियों से आग की लपटें बाहर निकल रही थीं। लोग दूर खड़े थे। कोई पास जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। फायर ब्रिगेड की छोटी गाड़ी आई जरूर, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि उस पर उसका कोई असर नहीं पड़ रहा था। शुरुआत के एक घंटे बाद रात करीब 12 बजे अचानक जोरदार धमाका हुआ। आसपास खड़े लोग चीखते हुए पीछे भागे। यह सिलेंडर ब्लास्ट था। धमाके के बाद आग और भड़क गई। कुछ देर के लिए पूरा इलाका धुएं से ढंक गया। पिता ने कैसे बचाई खुद की जान, बच्चों को क्यों नहीं बचा पाए अमरजीत बताते हैं कि पहली मंजिल पर बेडरूम था। गेट पर की-चेन लटक रही थी। हॉल में काफी सामान रखा हुआ था। आग पहले दुकान में शॉर्ट सर्किट से लगी। इसके बाद तेजी से ऊपर पहुंची और देखते ही देखते पूरा घर उसकी चपेट में आ गया। इसी दौरान राजकुमार की नींद खुली। वह घबराहट में घर से बाहर निकल आए, फिर ध्यान आया कि बच्चे अंदर ही सो रहे हैं। वो दोबारा अंदर गए, रूद्र-रूद्र चिल्लाए, लेकिन कोई आवाज नहीं आई। आग तेजी से चारों तरफ फैल रही थी। उन्हें कुछ समझ नहीं आया और वह खिड़की से कूद गए। इस कारण उनकी जान बच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, राजकुमार साह अपने बच्चों को बचा लेते, लेकिन सिलेंडर ब्लास्ट के बाद बच्चों के कमरों तक पहुंचना नामुमकिन हो गया। जब कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर लगभग काबू पाया गया तो अमरजीत सबसे पहले कमरे के अंदर पहुंचे। उनके पीछे कई और लोग भी गए। वहां का दृश्य देखकर हर कोई भावुक हो गया। भाई-बहन सृष्टि और रुद्र के शव एक साथ लिपटे पड़े थे। ऐसा लग रहा था जैसे आखिरी वक्त में दोनों एक-दूसरे को पकड़कर बचने की कोशिश कर रहे हों। उनसे कुछ दूरी पर प्रिंस का शव मिला। दिन में ही घर लाए थे दोनों बच्चों को, रात में हादसा गांव के लोगों का कहना है कि शुक्रवार को ही राजकुमार दोनों बच्चों को अपने घर लेकर आए थे। राजकुमार साह की पत्नी नीरा गुप्ता 5 मई को अपने तीनों बच्चों के साथ अपनी बहन के बेटे की शादी में पताही गई थी। 7 मई को शादी समारोह खत्म हुआ। दोनों बच्चों का स्कूल मिस नहीं हो, इसलिए 8 मई को ही राजकुमार अपने एक बेटे रूद्र और बेटी सृष्टि को लेकर घर लौट आए। वहीं उनकी पत्नी छोटी बेटी के साथ वहीं रह गई थी। इसी दौरान गांव की महिलाएं आपस में कहती नजर आईं, “अगर वे भी यहां आ गए होते, तो शायद कोई नहीं बचता…” पड़ोसी दुकानदार को भी हुआ नुकसान राजकुमार साह के ठीक बगल के दुकानदार रविंद्र गुप्ता की दुकान भी आग की चपेट में आ गई। उन्होंने बताया कि रात 10 बजे दुकान बंद कर घर गए थे। करीब साढ़े 11 बजे फोन आया कि दुकान में आग लग गई है। जब पहुंचे, तब तक आग बहुत फैल चुकी थी। उनकी दुकान का सामान जल गया और दीवारों में दरारें तक पड़ गई। इकलौता कमाने वाला था स्टाफ प्रिंस इधर, स्टाफ प्रिंस राजकुमार साह के यहां पिछले छह-सात महीनों से काम कर रहा था। उसके चाचा बताते हैं कि वह हर 10-15 दिन पर घर जाता था। चार भाइयों में सबसे बड़ा था। शादी हो चुकी थी। तीन साल का बेटा और दो महीने की बेटी है। बूढ़े पिता मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। प्रिंस की मौत की खबर गांव पहुंची, तो वहां भी मातम छा गया। परिवार को अब तक यकीन नहीं हो रहा कि घर चलाने वाला उनका सबसे बड़ा सहारा अब इस दुनिया में नहीं रहा। घटना की सूचना मिलने के बाद डीएम सौरभ जोरवाल, सिकरहना एसडीओ और एसडीपीओ उदय शंकर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पीड़ित परिवार को डीएम सौरभ जोरवाल ने 8 लाख का तत्काल मुआवजा और स्टाफ प्रिंस के परिवार को 4 लाख रुपए की सहायता दी है। पुलिस ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है।


