भोपाल में जनगणना की जमीनी हकीकत:दो कमरों के घर बने दो मकान, नंबर मांगने पर बहस; भास्कर टीम ने जनगणनाकर्मी के साथ बिताया पूरा दिन

भोपाल में जनगणना की जमीनी हकीकत:दो कमरों के घर बने दो मकान, नंबर मांगने पर बहस; भास्कर टीम ने जनगणनाकर्मी के साथ बिताया पूरा दिन

1 मई से शुरू हुई जनगणना के पहले चरण में मकानों की गिनती के साथ रहन-सहन से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही हैं, लेकिन फील्ड पर जनगणनाकर्मी के सामने अजीब चुनौतियां आ रही हैं। लोग अपने दो कमरों के घर को अलग-अलग मकान बता रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग मोबाइल नंबर देने से इनकार कर रहे हैं। तेज धूप, बंद गेट और लोगों की झिझक ने सर्वे का काम और मुश्किल बना दिया है। पहले चरण में मकानों की गणना के साथ परिवारों से आवास, सुविधाओं और जीवनशैली से जुड़ी जानकारी ली जा रही है। एक सुपरवाइजर के अधीन 6 जनगणनाकर्मी काम कर रहे हैं। प्रत्येक कर्मी को 5 दिन में 200 घरों का सर्वे करने का लक्ष्य दिया गया है। दैनिक भास्कर की टीम ने जनगणनाकर्मियों के साथ पूरा दिन बिताकर घर-घर चल रहे सर्वे को करीब से देखा। इस दौरान यह समझने की कोशिश की गई कि फील्ड पर प्रगणकों को किस तरह की दिक्कतों और चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह 9 बजे से शुरू हुई पड़ताल भास्कर टीम सुबह करीब 9 बजे भोपाल के भीमनगर कॉलोनी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची। यहां सुपरवाइजर एसएस खरे अपनी टीम के साथ मिले। कुछ देर बाद टीम जनगणनाकर्मी के साथ फील्ड में निकली। पहला दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन काफी देर तक कोई बाहर नहीं आया। पड़ोसियों ने बताया कि अभी सो रहे हैं’। इसके बाद टीम ने बगल के घर से नंबरिंग और गणना शुरू की। प्रगणक ने परिवार से 33 सवाल पूछे। इनमें मकान किसके नाम है, छत और दीवार कैसी है, घर में बिजली-पानी और शौचालय की क्या व्यवस्था है, कितने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं, परिवार किस अनाज का इस्तेमाल करता है जैसी जानकारियां शामिल थीं। अंत में मोबाइल नंबर लेकर डेटा ऐप पर अपलोड किया गया। एक गली में चार कमरे, पर हर कमरा ‘ एक अलग मकान’ कुछ ही देर बाद टीम एक ऐसे मकान पर पहुंची, जहां एक ही परिवार के चार दंपत्ति रह रहे थे। घर में चार कमरे थे, लेकिन हर परिवार अपने कमरे को अलग मकान बताने पर अड़ा था। पूछने पर पता चला कि लोगों में भ्रम है कि सरकार मकानों का सर्वे इसलिए करा रही है ताकि भविष्य में मकान आवंटित किए जा सकें। इसी वजह से एक मकान को कई मकान बताने की कोशिश हो रही है। “फोन नंबर क्यों दें?”…15 मिनट तक बहस दोपहर करीब 12 बजे एक घर पर मोबाइल नंबर मांगने पर परिवार ने जानकारी देने से इनकार कर दिया। करीब 10 से 15 मिनट तक जनगणनाकर्मी से बहस होती रही। बाद में टीम ने एप और पूरी प्रक्रिया समझाई, तब जाकर परिवार ने भाई का नंबर दिया। 45 डिग्री जैसी धूप में घर-घर दस्तक सुबह 11:30 बजे तक सूरज सिर पर आ चुका था। तेज गर्मी के बीच जनगणनाकर्मी लगातार गलियों में घूमते रहे। इसी दौरान एक बुजुर्ग महिला मिलीं, जो अपने दो कमरों के घर को दो अलग मकान बता रही थीं। कुछ आगे ऐसे परिवार भी मिले जो 40-50 साल पहले गुजरात से भोपाल आए थे। आज भी मिट्टी के घरों में रहते हैं, जंगल से लकड़ियां लाकर चूल्हे पर खाना बनाते हैं। कहीं बंद गेट, कहीं लोगों का सहयोग कई घरों पर ताला लगा मिला। पड़ोसियों से पूछने पर भी पूरी जानकारी नहीं मिल सकी। वहीं कुछ परिवार ऐसे भी मिले, जो नौकरी पर जाने से पहले दरवाजे पर अपना नाम और मोबाइल नंबर लिखकर गए थे, ताकि जनगणनाकर्मी को दोबारा न आना पड़े। इस दौरान करीब साढ़े 12 बजे तक भास्कर टीम ने अलग-अलग जनगणनाकर्मी के साथ लगभग 40 घरों की गणना देखी। जनगणना अधिकारी ने जारी की अपील जनगणनाकर्मियों को हो रही परेशानियों और लोगों द्वारा जानकारी छुपाने के मामले में भोपाल के जिला जनगणना अधिकारी ने भी लोगों से अपील की है। जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुप्ता के अनुसार जनगणना की जानकारी पूरी तरह से गोपनीय होती है। यह केवल सांख्यिकी उपयोग के लिए है। इसका किसी भी तरह लोगों को मिल रहे हित-लाभ से संंबंध नहीं है।

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