Badminton में एक युग का अंत, दिग्गज Viktor Axelsen ने चोट के कारण लिया Shock Retirement

Badminton में एक युग का अंत, दिग्गज Viktor Axelsen ने चोट के कारण लिया Shock Retirement

बैडमिंटन की दुनिया से एक बड़ी खबर सामने आई। डेनमार्क के दिग्गज खिलाड़ी विक्टर एक्सेलसन ने 32 साल की उम्र में पेशेवर बैडमिंटन से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। बता दें कि लंबे समय से चोट से जूझ रहे एक्सेलसन ने आखिरकार अपने शरीर की स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया है।मौजूदा जानकारी के अनुसार एक्सेलसन पिछले कुछ समय से पीठ की गंभीर समस्या से परेशान थे। मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने पिछले साल अप्रैल में सर्जरी कराई थी और उसके बाद लंबा पुनर्वास भी किया था, लेकिन अक्टूबर में उन्हें फिर से झटका लगा। इसके बाद से वह न तो ठीक से ट्रेनिंग कर पा रहे थे और न ही प्रतिस्पर्धी स्तर पर खेल पा रहे थे, जिसके चलते उन्हें मजबूर होकर यह कठिन निर्णय लेना पड़ा है।एक्सेलसन ने अपने बयान में साफ कहा कि डॉक्टरों की सलाह उनके फैसले में अहम रही है। उनका कहना है कि मौजूदा दर्द को देखते हुए आगे और सर्जरी की जरूरत पड़ सकती थी, जो उनके करियर के लिए और ज्यादा जोखिम भरा होता। ऐसे में उन्होंने समय रहते संन्यास लेने का फैसला किया है, ताकि भविष्य में स्वास्थ्य को लेकर कोई बड़ा खतरा न बने।अगर उनके करियर पर नजर डालें तो यह बेहद शानदार और प्रेरणादायक रहा है। वह दो बार ओलंपिक चैंपियन, दो बार विश्व चैंपियन और कई बार यूरोपीय चैंपियन रह चुके हैं। इसके अलावा वह लंबे समय तक दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी भी रहे। बता दें कि उन्होंने थॉमस कप में भी अपनी टीम को जीत दिलाई थी, जो उनकी उपलब्धियों को और खास बनाता है।गौरतलब है कि एक्सेलसन ने अपने करियर को लेकर संतोष और खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि इतने सालों तक उच्च स्तर पर खेलना, बड़े टूर्नामेंट जीतना और दुनिया भर के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना उनके लिए एक खास अनुभव रहा है। उन्होंने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताया है।हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह बैडमिंटन से पूरी तरह विदाई नहीं है। मौजूद जानकारी के अनुसार वह भविष्य में किसी न किसी रूप में खेल से जुड़े रहेंगे, चाहे वह कोचिंग हो, मेंटरिंग हो या किसी अन्य भूमिका में योगदान देना हो।एक्सेलसन का करियर न सिर्फ उपलब्धियों से भरा रहा, बल्कि उन्होंने यह भी दिखाया कि अलग सोच और मेहनत के दम पर दुनिया में शीर्ष स्थान हासिल किया जा सकता है। उनके संन्यास से बैडमिंटन जगत में एक बड़ा खालीपन जरूर महसूस किया जाएगा, लेकिन उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। 

बैडमिंटन की दुनिया से एक बड़ी खबर सामने आई। डेनमार्क के दिग्गज खिलाड़ी विक्टर एक्सेलसन ने 32 साल की उम्र में पेशेवर बैडमिंटन से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। बता दें कि लंबे समय से चोट से जूझ रहे एक्सेलसन ने आखिरकार अपने शरीर की स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया है।
मौजूदा जानकारी के अनुसार एक्सेलसन पिछले कुछ समय से पीठ की गंभीर समस्या से परेशान थे। मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने पिछले साल अप्रैल में सर्जरी कराई थी और उसके बाद लंबा पुनर्वास भी किया था, लेकिन अक्टूबर में उन्हें फिर से झटका लगा। इसके बाद से वह न तो ठीक से ट्रेनिंग कर पा रहे थे और न ही प्रतिस्पर्धी स्तर पर खेल पा रहे थे, जिसके चलते उन्हें मजबूर होकर यह कठिन निर्णय लेना पड़ा है।
एक्सेलसन ने अपने बयान में साफ कहा कि डॉक्टरों की सलाह उनके फैसले में अहम रही है। उनका कहना है कि मौजूदा दर्द को देखते हुए आगे और सर्जरी की जरूरत पड़ सकती थी, जो उनके करियर के लिए और ज्यादा जोखिम भरा होता। ऐसे में उन्होंने समय रहते संन्यास लेने का फैसला किया है, ताकि भविष्य में स्वास्थ्य को लेकर कोई बड़ा खतरा न बने।
अगर उनके करियर पर नजर डालें तो यह बेहद शानदार और प्रेरणादायक रहा है। वह दो बार ओलंपिक चैंपियन, दो बार विश्व चैंपियन और कई बार यूरोपीय चैंपियन रह चुके हैं। इसके अलावा वह लंबे समय तक दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी भी रहे। बता दें कि उन्होंने थॉमस कप में भी अपनी टीम को जीत दिलाई थी, जो उनकी उपलब्धियों को और खास बनाता है।
गौरतलब है कि एक्सेलसन ने अपने करियर को लेकर संतोष और खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि इतने सालों तक उच्च स्तर पर खेलना, बड़े टूर्नामेंट जीतना और दुनिया भर के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना उनके लिए एक खास अनुभव रहा है। उन्होंने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताया है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह बैडमिंटन से पूरी तरह विदाई नहीं है। मौजूद जानकारी के अनुसार वह भविष्य में किसी न किसी रूप में खेल से जुड़े रहेंगे, चाहे वह कोचिंग हो, मेंटरिंग हो या किसी अन्य भूमिका में योगदान देना हो।
एक्सेलसन का करियर न सिर्फ उपलब्धियों से भरा रहा, बल्कि उन्होंने यह भी दिखाया कि अलग सोच और मेहनत के दम पर दुनिया में शीर्ष स्थान हासिल किया जा सकता है। उनके संन्यास से बैडमिंटन जगत में एक बड़ा खालीपन जरूर महसूस किया जाएगा, लेकिन उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

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