बांका में अजोला खेती करने पर जोर:5 दिन में तैयार होता है पौष्टिक चारा, दूध उत्पादन बढ़ेगा, खेती की लागत कम होगी

बांका में अजोला खेती करने पर जोर:5 दिन में तैयार होता है पौष्टिक चारा, दूध उत्पादन बढ़ेगा, खेती की लागत कम होगी

बांका जिले में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) किसानों को अजोला उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। कम लागत में बेहतर खेती के साथ पशुपालन, मछली पालन और मुर्गी पालन करने वाले किसानों के लिए अजोला की खेती काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। केवीके परिसर में दो विशेष टैंक बनाए गए हैं, जहां किसानों को इसकी खेती और उपयोग की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। केवीके के विज्ञानी संजय मंडल ने बताया कि अजोला एक जलीय फर्न है, जिसका उपयोग जैविक खाद और पौष्टिक पशु चारे के रूप में किया जाता है। धान की खेती में अजोला का उपयोग रासायनिक खाद की आवश्यकता को कम करता है। यह खेतों में खरपतवार नियंत्रण में भी सहायक है, जिससे किसानों की लागत घटती है। अजोला के सेवन कराने से दूध उत्पादन में वृद्धि होती है
मंडल के अनुसार, अजोला गाय और भैंस के लिए एक संतुलित एवं पौष्टिक चारा है, जिसके सेवन से दूध उत्पादन में वृद्धि होती है। मछली और मुर्गी पालन करने वाले किसान भी इसे चारे के रूप में उपयोग कर सकते हैं। इससे चारे पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाता है और किसानों की आय में बढ़ोतरी होती है। किसान अजोला का उत्पादन अपने घर या खेत-खलिहान में आसानी से कर सकते हैं। इसके लिए ईंट से घेरकर प्लास्टिक शीट की मदद से क्यारी बनाई जा सकती है, या फिर पक्के टैंक और हौज का भी उपयोग किया जा सकता है। आवश्यकतानुसार अलग-अलग टैंक बनाए जा सकते हैं। अजोला पांच से छह दिनों में तैयार हो जाता है, जिससे इसका उत्पादन लगातार लिया जा सकता है। सीधे गड्ढे से निकालकर नहीं खिलाना चाहिए
विज्ञानी ने किसानों को सलाह दी है कि अजोला को सीधे गड्ढे से निकालकर पशुओं को नहीं खिलाना चाहिए। इसे पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोना आवश्यक है। जो किसान अजोला उत्पादन शुरू करना चाहते हैं, वे कृषि विज्ञान केंद्र जाकर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। केंद्र द्वारा किसानों को अजोला का बीज भी उपलब्ध कराया जाएगा। बांका जिले में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) किसानों को अजोला उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। कम लागत में बेहतर खेती के साथ पशुपालन, मछली पालन और मुर्गी पालन करने वाले किसानों के लिए अजोला की खेती काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। केवीके परिसर में दो विशेष टैंक बनाए गए हैं, जहां किसानों को इसकी खेती और उपयोग की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। केवीके के विज्ञानी संजय मंडल ने बताया कि अजोला एक जलीय फर्न है, जिसका उपयोग जैविक खाद और पौष्टिक पशु चारे के रूप में किया जाता है। धान की खेती में अजोला का उपयोग रासायनिक खाद की आवश्यकता को कम करता है। यह खेतों में खरपतवार नियंत्रण में भी सहायक है, जिससे किसानों की लागत घटती है। अजोला के सेवन कराने से दूध उत्पादन में वृद्धि होती है
मंडल के अनुसार, अजोला गाय और भैंस के लिए एक संतुलित एवं पौष्टिक चारा है, जिसके सेवन से दूध उत्पादन में वृद्धि होती है। मछली और मुर्गी पालन करने वाले किसान भी इसे चारे के रूप में उपयोग कर सकते हैं। इससे चारे पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाता है और किसानों की आय में बढ़ोतरी होती है। किसान अजोला का उत्पादन अपने घर या खेत-खलिहान में आसानी से कर सकते हैं। इसके लिए ईंट से घेरकर प्लास्टिक शीट की मदद से क्यारी बनाई जा सकती है, या फिर पक्के टैंक और हौज का भी उपयोग किया जा सकता है। आवश्यकतानुसार अलग-अलग टैंक बनाए जा सकते हैं। अजोला पांच से छह दिनों में तैयार हो जाता है, जिससे इसका उत्पादन लगातार लिया जा सकता है। सीधे गड्ढे से निकालकर नहीं खिलाना चाहिए
विज्ञानी ने किसानों को सलाह दी है कि अजोला को सीधे गड्ढे से निकालकर पशुओं को नहीं खिलाना चाहिए। इसे पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोना आवश्यक है। जो किसान अजोला उत्पादन शुरू करना चाहते हैं, वे कृषि विज्ञान केंद्र जाकर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। केंद्र द्वारा किसानों को अजोला का बीज भी उपलब्ध कराया जाएगा।  

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