EMI से जल्दी छुटकारा पाने के चक्कर में न करें यह गलती, जानें लोन प्रीपेमेंट के फायदे और नुकसान

EMI से जल्दी छुटकारा पाने के चक्कर में न करें यह गलती, जानें लोन प्रीपेमेंट के फायदे और नुकसान

Interest Savings Guide: पर्सनल लोन को तय समय से पहले चुकाने से ब्याज का बोझ कम हो सकता है और हर महीने की EMI से राहत मिल सकती है। हालांकि, पर्सनल लोन का प्री-पेमेंट करना हमेशा सबसे अच्छा फाइनेंशियल फैसला नहीं होता है। क्योंकि सिर्फ कर्ज से जल्दी छुटकारा पाने के लिए अपनी सारी बचत लोन चुकाने में लगा देना सही फैसला नहीं है। प्रीपेमेंट तभी फायदेमंद हो सकता है, जब बचने वाला ब्याज फोरक्लोजर चार्ज से ज्यादा हो और लोन चुकाने के बाद भी आपके पास इमरजेंसी के लिए पर्याप्त पैसा बचा रहे।

क्या होता है लोन प्रीपेमेंट?

पर्सनल लोन प्रीपेमेंट का मतलब तय अवधि पूरी होने से पहले लोन का कुछ हिस्सा या पूरा बकाया चुका देना है। ग्राहक थोड़ा बहुत प्रीपेमेंट करके मूलधन कम कर सकता है या पूरा बकाया चुकाकर लोन को फोरक्लोज कर सकता है। इससे भविष्य में देने वाला ब्याज कम हो सकता है। हालांकि, लोन की शर्तों के अनुसार बैंक या लोन देने वाली संस्था प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज भी ले सकती है।

हर किसी के लिए एक नियम नहीं

पर्सनल लोन प्रीपेमेंट तब समझदारी हो सकती है, जब ब्याज में होने वाली बचत सभी खर्चों से काफी ज्यादा हो और आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहे। सिर्फ कर्जमुक्त होने की इच्छा में फैसला नहीं करना चाहिए। ब्याज की बचत, फोरक्लोजर चार्ज, बची हुई लोन अवधि और इमरजेंसी फंड का हिसाब लगाने के बाद ही लोन समय से पहले चुकाने का निर्णय लेना चाहिए।

निवेश से मिलने वाले रिटर्न से करें तुलना

कर्जदार को यह हिसाब लगाना चाहिए कि लोन की बची हुई अवधि में कितना ब्याज देना है और उसे समय से पहले बंद करने पर कितना फोरक्लोजर चार्ज लगेगा। साथ ही यह भी देखना चाहिए कि अगर वही पैसा बचत या निवेश में रखा जाए तो उससे कितना रिटर्न मिल सकता है। इन सभी बातों की तुलना के बाद ही फैसला करना बेहतर होगा।

लोन किस काम के लिए लिया, यह भी जरूरी

OneBanc Technologies के फाउंडर और सीईओ विभोर गोयल के अनुसार, पर्सनल लोन मूल रूप से इमरजेंसी के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब इनका इस्तेमाल लाइफस्टाइल और अन्य खर्चों के लिए भी बढ़ रहा है। ऐसे खर्चों के लिए लिया गया पर्सनल लोन महंगा पड़ सकता है, क्योंकि इसकी ब्याज दर आमतौर पर अधिक होती है और होम लोन की तरह ब्याज पर टैक्स कटौती का लाभ भी नहीं मिलता। बड़ा प्रीपेमेंट करने से पहले पर्याप्त बचत होना जरूरी है। गोयल के अनुसार, अतिरिक्त पैसा लोन चुकाने में लगाने से पहले कम से कम छह महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड होना चाहिए। इसके अलावा, ग्राहक को अपने लोन एग्रीमेंट में फोरक्लोजर और पार्ट-प्रीपेमेंट चार्ज भी जरूर जांच लेने चाहिए।

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