राम नाम की गूंज: नवनगर का श्रीराम मंदिर, जहां भक्ति के साथ जीवंत रहती है राम परंपरा

राम नाम की गूंज: नवनगर का श्रीराम मंदिर, जहां भक्ति के साथ जीवंत रहती है राम परंपरा

ब्राह्मण सेवा संघ कर रहा देखरेख
मंदिर में श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और भक्त हनुमान की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित हैं। इन प्रतिमाओं की विशेषता यह है कि इन्हें सालिग्राम पत्थर से तैयार किया गया है। मंदिर की प्रतिष्ठा वर्ष 2014 में हुई थी और तब से यह क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। मंदिर की देखरेख ब्राह्मण सेवा संघ, नवनगर की ओर से की जा रही है।

रामनवमी पर नौ दिनों तक रहता है उत्सव का माहौल
मंदिर में रामनवमी विशेष उत्साह और धार्मिक वातावरण के बीच मनाई जाती है। इस दौरान लगातार नौ दिनों तक भजन-कीर्तन, धार्मिक कार्यक्रम और विविध सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। बच्चों के लिए भी प्रतियोगिताएं और विशेष कार्यक्रम रखे जाते हैं। दसवें दिन श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया जाता है।

पालकी उत्सव परंपरा विशेष आकर्षण का केंद्र
मंदिर की पालकी उत्सव परंपरा भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। इसके अलावा कृष्ण जन्माष्टमी पर दही-हांडी कार्यक्रम और अन्य धार्मिक पर्व भी उत्साहपूर्वक मनाए जाते हैं। वर्षभर समय-समय पर होम-हवन और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है।

सभी समाज के लोगों की आस्था का केंद्र
मंदिर में हर वर्ग और समाज के लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां धार्मिक समरसता और सामाजिक सद्भाव की झलक देखने को मिलती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान श्रीराम केवल एक आराध्य नहीं, बल्कि आदर्श जीवन मूल्यों के प्रतीक हैं और यही संदेश मंदिर के माध्यम से समाज तक पहुंच रहा है।

उत्सव और आस्था का संगम
ब्राह्मण सेवा संघ, नवनगर के अध्यक्ष सतीश दीक्षित बताते हैं कि मंदिर में राम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। दशहरा पर्व पर दस दिनों तक धार्मिक आयोजन, पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी पर भी मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से सराबोर रहता है। राम सबके हैं और मंदिर सभी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। यहां वर्षभर धार्मिक गतिविधियां होती रहती हैं। भक्तों की श्रद्धा ही इस मंदिर की सबसे बड़ी शक्ति है।

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