छत्तीसगढ़ के गोडबोले दंपती पद्मश्री से सम्मानित:’डॉक्टर भैया’-‘भाभी’ नाम से फेमस हैं डॉ. रामचंद्र-सुनीता गोडबोले, 1 लाख मरीजों का कर चुके फ्री इलाज

छत्तीसगढ़ के गोडबोले दंपती पद्मश्री से सम्मानित:’डॉक्टर भैया’-‘भाभी’ नाम से फेमस हैं डॉ. रामचंद्र-सुनीता गोडबोले, 1 लाख मरीजों का कर चुके फ्री इलाज

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 66 हस्तियों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया है। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और अबूझमाड़ जैसे दूर-दराज और नक्सल प्रभावित इलाकों में वर्षों से चिकित्सा सेवा दे रहे डॉक्टर दंपती डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान मिला है। द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित सिविल इन्वेस्टिचर समारोह फेज 1 में गोडबोले दंपती को यह सम्मान प्रदान किया। डॉक्टर दंपती लंबे समय से आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में लोगों का इलाज कर मानव सेवा का काम कर रहे हैं। उनके इस समर्पण और सेवा को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा है। डॉक्टर रामचंद्र गोडबोले और डॉक्टर सुनीता गोडबोले ने अब तक 1 लाख से ज्यादा मरीजों का फ्री में इलाज किया है। समाज सेवा के लिए दंपती को अवार्ड मिला है। पहले देखिए 3 तस्वीरें साल 2026 में देशभर की कुल 131 हस्तियों को पद्म पुरस्कार दिए जाने हैं। पहले चरण में 66 लोगों को सम्मानित किया गया है, जबकि बाकी 65 विजेताओं को अगले फेज में सम्मान मिलेगा। हालांकि, दूसरे चरण की तारीखों का अभी ऐलान नहीं किया गया है। इस फेज में समाज सेवा के क्षेत्र में काम करने वाली बुधरी ताती को भी पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। बस्तर के ‘डॉक्टर भैया’ और ‘भाभी’ को श्री पद्मश्री सम्मान डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले दंतेवाड़ा के आदिवासी इलाके में पिछले 35 साल से नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। ये दोनों पति-पत्नी हैं। मूल रूप से महाराष्ट्र के सतारा के रहने वाले हैं। 1990 में बारसूर (दंतेवाड़ा) आकर बस गए। तब से ये दक्षिण बस्तर, बीजापुर और सुकमा के वनवासी समुदाय की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। गोडबोले दंपती MAAS योजना के तहत बच्चों को कुपोषण और एनीमिया से बचाने का काम कर रहे हैं। इसके साथ ही दूर-दराज के गांवों में मेडिकल कैंप लगाते हैं। लगातार फॉलो-अप करते हैं। मेरे सामने बैठा हर आदिवासी मेरे लिए भगवान- डॉ. रामचंद्र डॉ. रामचंद्र जिन्हें लोग प्यार से “डॉक्टर भैया” कहते हैं, अब तक 1 लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज कर चुके हैं। वहीं सुनीता गोडबोले आदिवासी महिलाओं के संगठन और स्वास्थ्य जागरूकता में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। साथ ही स्कूल के बच्चों को स्वास्थ्य शिक्षा और संस्कार भी देते हैं। डॉ. गोडबोले का कहना है कि मेरे सामने बैठा हर आदिवासी मेरे लिए भगवान है। मुख्यमंत्री साय ने दी बधाई मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गोडबोले दंपती को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा यह सम्मान प्रदान किया जाना जनसेवा, समर्पण और संवेदनशीलता जैसे मूल्यों को राष्ट्रीय पहचान मिलने का प्रतीक है। बस्तर के वनांचलों में दशकों से दे रहे स्वास्थ्य सेवाएं मुख्यमंत्री ने कहा कि गोडबोले दंपती ने वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़कर अपना जीवन जनजातीय समाज की सेवा को समर्पित कर दिया। बस्तर के बारसूर जैसे दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में रहकर उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित लोगों तक निःशुल्क उपचार और स्वास्थ्य जागरूकता पहुंचाई। उन्होंने कुपोषण मुक्ति, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और ग्रामीण-जनजातीय समाज में स्वास्थ्य चेतना बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 3 श्रेणियों में दिया जाता है पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों- पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण में प्रदान किए जाते हैं। ये पुरस्कार कला, समाज सेवा, साइंस, इंजीनियरिंग, बिजनेस, इंडस्ट्री, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, खेल और सिविल सेवा जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्टता के लिए दिए जाते हैं। ………………………. इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…. 15 साल की उम्र में उठाया समाज सेवा का संकल्प:545 गांव पैदल घूमीं, हमले झेले;अब पद्मश्री से सम्मानित होंगी दंतेवाड़ा की डॉ बुधरी ताती छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की समाजसेवी डॉ. बुधरी ताती को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। कठिन हालात, दुर्गम बीहड़ों में पैदल सफर और जानलेवा खतरे के बावजूद उन्होंने साहस और जज़्बे के साथ काम किया और 500 से अधिक महिलाओं को जागरूक किया। पढ़ें पूरी खबर…

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