सऊदी अरब से जुड़ी बड़ी आर्थिक खबर सामने आई है। सऊदी केंद्रीय बैंक ने चीन की अगुवाई वाली एमब्रिज परियोजना में अपनी भागीदारी खत्म कर दी है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने मई 2025 में इस परियोजना से जुड़ा अपना परीक्षण पूरा कर लिया था और उसके बाद इसमें भाग लेना बंद कर दिया। सऊदी केंद्रीय बैंक ने बताया है कि यह फैसला पहले से तय योजना का हिस्सा था।
एमब्रिज एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय पेमेंट व्यवस्था है, जिसे कई केंद्रीय बैंकों के सहयोग से विकसित किया गया है। इसका मकसद डिजिटल मुद्राओं के जरिए अलग-अलग देशों के केंद्रीय बैंकों के बीच सीधे सीमा पार भुगतान की संभावना तलाशना है। यह व्यवस्था ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है और इसमें पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था के बीच आने वाले कई बिचौलियों की जरूरत कम हो सकती है।
सऊदी अरब पहले 2023 में एमब्रिज से पर्यवेक्षक के तौर पर जुड़ा था। इसके बाद 2024 में वह इस परियोजना के शुरुआती कामकाजी चरण में भागीदार बना। सऊदी केंद्रीय बैंक ने उस समय कहा था कि वह बड़े स्तर पर केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा के इस्तेमाल की संभावनाओं को समझना चाहता है। इसका मुख्य उद्देश्य अलग-अलग देशों के बैंकों के बीच सीमा पार भुगतान और रकम के निपटान को ज्यादा आसान और तेज बनाने की संभावना जांचना था।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सऊदी केंद्रीय बैंक ने 13 मई 2025 को एमब्रिज से जुड़ा अपना अवधारणा परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया था। इसके बाद वह सक्रिय भागीदार नहीं रहा। सऊदी पक्ष ने यह भी संकेत दिया है कि इस फैसले को सीधे तौर पर अमेरिका के दबाव से जोड़ना सही नहीं होगा। यानी रियाद की ओर से इसे एक तय परीक्षण पूरा होने के बाद लिया गया फैसला बताया गया है।
एमब्रिज में चीन के साथ हांगकांग, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स जैसे संस्थान भी जुड़े रहे हैं। इस परियोजना का मकसद किसी साझा नई मुद्रा को शुरू करना नहीं है। बल्कि इसमें अलग-अलग देशों की डिजिटल मुद्राओं के जरिए सीधे अंतरराष्ट्रीय भुगतान की व्यवस्था को परखा जा रहा है। इससे भुगतान में लगने वाला समय और लागत कम करने की संभावना जताई गई है।
गौरतलब है कि एमब्रिज को लेकर अमेरिका में भी चर्चा होती रही है। इसकी वजह यह है कि ऐसी व्यवस्था भविष्य में अंतरराष्ट्रीय भुगतान में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कुछ हद तक कम कर सकती है। अमेरिकी अधिकारियों ने पहले इस बात को लेकर चिंता जताई थी कि चीन इस परियोजना के जरिए पेमेंट व्यवस्था से जुड़े तकनीकी मानकों पर अपना प्रभाव बढ़ा सकता है। हालांकि, एमब्रिज को सीधे डॉलर की जगह लेने वाली नई मुद्रा परियोजना के रूप में पेश नहीं किया गया है।
इससे पहले बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स भी अक्टूबर 2024 में एमब्रिज से बाहर हो गया था। उस समय अमेरिका की ओर से दबाव की खबरें सामने आई थीं, लेकिन बैंक के पूर्व प्रमुख ऑगस्टिन कार्स्टेंस ने कहा था कि संस्था परियोजना से अपने तय चरण के पूरा होने के बाद आगे बढ़ गई थी और उसके फैसले की वजह राजनीतिक नहीं थी।
बता दें कि सऊदी अरब का बाहर निकलना इस परियोजना के पूरी तरह खत्म होने का संकेत नहीं है। एमब्रिज में अन्य देशों की भागीदारी बनी हुई है और इसका इस्तेमाल वास्तविक सीमा पार लेनदेन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में सऊदी अरब का फैसला डिजिटल मुद्राओं, अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था और वैश्विक वित्त में डॉलर की भूमिका को लेकर चल रही बड़ी चर्चा का एक नया हिस्सा जरूर हैं।

