किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड के डूबानची वार्ड नंबर 4 निवासी सफीरूल ने DM नवीन कुमार को एक आवेदन दिया है। इसमें उन्होंने DCLR, किशनगंज द्वारा 30 जुलाई 2026 को BLDR केस संख्या 102/2025-26 में पारित एकतरफा आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। सफीरूल ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की भी गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि उन्हें वाद से संबंधित कोई नोटिस नहीं मिला, जिसके कारण वे न्यायालय में अपना पक्ष और दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। सफीरूल ने बताया कि उन्हें सुनवाई का कोई मौका दिए बिना ही उनके खिलाफ आदेश पारित कर दिया गया। उन्हें आदेश की जानकारी भी समय पर नहीं मिली। सुनवाई का नहीं मिला मौका लगभग 30 दिन बाद संबंधित हल्का कर्मचारी ने उन्हें आदेश की फोटोकॉपी दी। तब तक अपील करने या अन्य कानूनी उपाय करने का समय लगभग खत्म हो चुका था। आवेदन के अनुसार, विवादित जमीन मौजा डुबानयुची, थाना संख्या 30, खाता संख्या 144 और खेसरा संख्या 920 व 922 से जुड़ी है। आवेदक का कहना है कि उनके पास जमीन से जुड़े कई जरूरी दस्तावेज और सबूत हैं, लेकिन सुनवाई का मौका न मिलने के कारण वे उन्हें न्यायालय में पेश नहीं कर सके। सफीरूल ने यह भी बताया कि 1 सितंबर 2026 को संबंधित हल्का कर्मचारी ने उन्हें व्हाट्सएप पर एक नोटिस भेजा। इसमें उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। निष्पक्ष सुनवाई का मौका देने की मांग की उनका कहना है कि इससे साफ होता है कि पहले उन्हें पर्याप्त मौका नहीं मिला था। अब वे अपने सभी दस्तावेज और आपत्तियां पेश करना चाहते हैं। आवेदक ने आशंका जताई है कि अगर 30 जुलाई के आदेश को तुरंत लागू किया गया, तो उन्हें बहुत नुकसान हो सकता है। इससे जमीन को लेकर विवाद और कानून-व्यवस्था की समस्या भी पैदा हो सकती है। उन्होंने डीएम से मामले के सभी रिकॉर्ड की जांच करने, नोटिस मिलने की सच्चाई पता लगाने, आदेश को लागू करने पर रोक लगाने और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौका देने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने आदेश की प्रमाणित कॉपी और संबंधित रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड के डूबानची वार्ड नंबर 4 निवासी सफीरूल ने DM नवीन कुमार को एक आवेदन दिया है। इसमें उन्होंने DCLR, किशनगंज द्वारा 30 जुलाई 2026 को BLDR केस संख्या 102/2025-26 में पारित एकतरफा आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। सफीरूल ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की भी गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि उन्हें वाद से संबंधित कोई नोटिस नहीं मिला, जिसके कारण वे न्यायालय में अपना पक्ष और दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। सफीरूल ने बताया कि उन्हें सुनवाई का कोई मौका दिए बिना ही उनके खिलाफ आदेश पारित कर दिया गया। उन्हें आदेश की जानकारी भी समय पर नहीं मिली। सुनवाई का नहीं मिला मौका लगभग 30 दिन बाद संबंधित हल्का कर्मचारी ने उन्हें आदेश की फोटोकॉपी दी। तब तक अपील करने या अन्य कानूनी उपाय करने का समय लगभग खत्म हो चुका था। आवेदन के अनुसार, विवादित जमीन मौजा डुबानयुची, थाना संख्या 30, खाता संख्या 144 और खेसरा संख्या 920 व 922 से जुड़ी है। आवेदक का कहना है कि उनके पास जमीन से जुड़े कई जरूरी दस्तावेज और सबूत हैं, लेकिन सुनवाई का मौका न मिलने के कारण वे उन्हें न्यायालय में पेश नहीं कर सके। सफीरूल ने यह भी बताया कि 1 सितंबर 2026 को संबंधित हल्का कर्मचारी ने उन्हें व्हाट्सएप पर एक नोटिस भेजा। इसमें उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। निष्पक्ष सुनवाई का मौका देने की मांग की उनका कहना है कि इससे साफ होता है कि पहले उन्हें पर्याप्त मौका नहीं मिला था। अब वे अपने सभी दस्तावेज और आपत्तियां पेश करना चाहते हैं। आवेदक ने आशंका जताई है कि अगर 30 जुलाई के आदेश को तुरंत लागू किया गया, तो उन्हें बहुत नुकसान हो सकता है। इससे जमीन को लेकर विवाद और कानून-व्यवस्था की समस्या भी पैदा हो सकती है। उन्होंने डीएम से मामले के सभी रिकॉर्ड की जांच करने, नोटिस मिलने की सच्चाई पता लगाने, आदेश को लागू करने पर रोक लगाने और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौका देने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने आदेश की प्रमाणित कॉपी और संबंधित रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

