Crude Oil 91 डॉलर के पार पहुंचा, भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा बढ़ा, जानिए आज के लेटेस्ट रेट

Crude Oil 91 डॉलर के पार पहुंचा, भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा बढ़ा, जानिए आज के लेटेस्ट रेट

Petrol Diesel Price 18 August 2026: क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखी गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच नए समझौते की उम्मीदें कम हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें अंतरिम शांति समझौते को आगे बढ़ाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। इसी वजह से मंगलवार को क्रूड ऑयल 91 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। कच्चे तेल के महंगा होने से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी की आंशका हो गई है। लेकिन फिलहाल ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने फ्यूल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया है।

Crude Oil के भाव क्या हैं?

मंगलवार को सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर अमेरिकी WTI क्रूड की कीमत करीब 0.65 फीसदी की तेजी के साथ 85.04 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं, ब्रेंट क्रूड के दाम 0.45 फीसदी की तेजी के साथ 91.30 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करते दिखे। कीमतों में यह लगातार तीसरे सत्र की तेजी है।

Curde Oil Pirce
Source: Trading Economics (ब्रेंट क्रूड में एक दिन का उतार-चढ़ाव)

18 अगस्त को भारत में Petrol Diesel के दाम

शहर पेट्रोल की कीमत डीजल की कीमत
नई दिल्ली ₹102.12 ₹95.20
कोलकाता ₹113.51 ₹99.82
मुंबई ₹111.21 ₹97.83
चेन्नई ₹107.76 ₹99.55
गुरुग्राम ₹102.97 ₹95.64
नोएडा ₹101.96 ₹95.44
बेंगलुरु ₹111.68 ₹99.56
भुवनेश्वर ₹108.97 ₹100.68
चंडीगढ़ ₹101.54 ₹89.47
हैदराबाद ₹115.69 ₹103.82
जयपुर ₹112.66 ₹97.78
लखनऊ ₹101.86 ₹95.36
पटना ₹113.37 ₹99.36
तिरुवनंतपुरम ₹115.49 ₹104.40

महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंबे समय तक क्रूड महंगा रहने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है। इससे घरेलू पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ती है। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल के रेट केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स, रिफाइनिंग मार्जिन, माल ढुलाई और वितरण लागत के साथ रुपये और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर से भी प्रभावित होते हैं।

क्रूड में तेजी के क्या कारण

क्रूड की तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच नए समझौते की संभावनाओं का कमजोर होना है। जून में हुआ 60 दिन का समझौता सोमवार को समाप्त हो गया। इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप के इसे आगे बढ़ाने में रुचि नहीं दिखा रहे। इससे तनाव बढ़ा है। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इस मार्ग पर किसी भी तरह का व्यवधान कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बन सकता है।

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