जमुई में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 215वीं बटालियन ने 9 अप्रैल को मलयपुर स्थित अपने कैंप में शौर्य दिवस मनाया। इस अवसर पर बटालियन के कमांडेंट विनोद कुमार मोहरिल ने समारोह की अध्यक्षता की। कार्यक्रम की शुरुआत में कमांडेंट मोहरिल सहित अन्य अधिकारियों और जवानों ने बल के अमर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया। कर्तव्यों, अनुशासन और बलिदान की भावना के प्रति प्रेरित किया शौर्य दिवस के अवसर पर एक विशेष सैनिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें जवानों को उनके कर्तव्यों, अनुशासन और बलिदान की भावना के प्रति प्रेरित किया गया। यह शौर्य दिवस हर वर्ष 9 अप्रैल 1965 को गुजरात के कच्छ के रण में स्थित सरदार पोस्ट पर हुए ऐतिहासिक युद्ध की याद में मनाया जाता है। उस दिन CRPF के जवानों ने पाकिस्तानी सेना के हमले को वीरतापूर्वक विफल कर दिया था। 3500 जवानों वाली एक पूरी ब्रिगेड का सामना किया था इस ऐतिहासिक लड़ाई में CRPF की मात्र दो कंपनियों ने पाकिस्तानी सेना की लगभग 3500 जवानों वाली एक पूरी ब्रिगेड का सामना किया था। CRPF के जवानों ने 34 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और 4 को जीवित पकड़ लिया था। इस दौरान CRPF के 6 जवानों ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। शौर्य दिवस का यह आयोजन जवानों के अदम्य साहस, वीरता और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण की भावना को याद दिलाता है। जमुई में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 215वीं बटालियन ने 9 अप्रैल को मलयपुर स्थित अपने कैंप में शौर्य दिवस मनाया। इस अवसर पर बटालियन के कमांडेंट विनोद कुमार मोहरिल ने समारोह की अध्यक्षता की। कार्यक्रम की शुरुआत में कमांडेंट मोहरिल सहित अन्य अधिकारियों और जवानों ने बल के अमर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया। कर्तव्यों, अनुशासन और बलिदान की भावना के प्रति प्रेरित किया शौर्य दिवस के अवसर पर एक विशेष सैनिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें जवानों को उनके कर्तव्यों, अनुशासन और बलिदान की भावना के प्रति प्रेरित किया गया। यह शौर्य दिवस हर वर्ष 9 अप्रैल 1965 को गुजरात के कच्छ के रण में स्थित सरदार पोस्ट पर हुए ऐतिहासिक युद्ध की याद में मनाया जाता है। उस दिन CRPF के जवानों ने पाकिस्तानी सेना के हमले को वीरतापूर्वक विफल कर दिया था। 3500 जवानों वाली एक पूरी ब्रिगेड का सामना किया था इस ऐतिहासिक लड़ाई में CRPF की मात्र दो कंपनियों ने पाकिस्तानी सेना की लगभग 3500 जवानों वाली एक पूरी ब्रिगेड का सामना किया था। CRPF के जवानों ने 34 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और 4 को जीवित पकड़ लिया था। इस दौरान CRPF के 6 जवानों ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। शौर्य दिवस का यह आयोजन जवानों के अदम्य साहस, वीरता और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण की भावना को याद दिलाता है।


