CNG Crisis In Jaipur: पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के बाद अब सीएनजी की सप्लाई चेन भी पूरी तरह बेपटरी हो गई है। शहर में सीएनजी आपूर्ति करने वाली कंपनी के दावों के उलट जमीनी हकीकत यह है कि कुल 28 में से 23 पंप पिछले दो दिनों से ड्राई (गैस खत्म) पड़े हैं। इसके चलते चालू हालत वाले महज 5 पंप पर सीएनजी वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। 42 डिग्री के झुलसाते पारे में ऑटो और कार चालक अपनी बारी के इंतजार में घंटों पसीना बहाने को मजबूर हैं, जिससे पूरे शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा गई है।
रोजी-रोटी पर संकट: ‘किश्त चुकाना और परिवार पालना मुश्किल’
संकट का सबसे बड़ा असर कमर्शियल वाहन चालकों पर पड़ा है। मानसरोवर और पत्रकार कॉलोनी जैसे बड़े इलाकों में गैस नहीं मिलने के कारण वाहन चालक घंटों इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। कई चालकों का कहना है कि सीएनजी की तलाश में आधा दिन निकल जा रहा है, जिससे उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है। सीएनजी कार चालक ललित का कहना है, ‘दो दिन से एक से दूसरे पंप की दौड़ लगा रहा हूं।
अगर यही हाल रहा तो कार की किश्त चुकाना भारी पड़ जाएगा।’ वहीं ऑटो चालक जानकी लाल ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, ‘मानसरोवर, पत्रकार कॉलोनी में सीएनजी नहीं मिली। अब न्यू लाइट कॉलोनी पंप पर गैस भरवा रहा हूं। पूरा दिन निकल गया, एक भी सवारी नहीं ले पाया। इन हालात में परिवार कैसे पालें?’ कई ऑटो चालकों ने बताया कि लंबी कतारों और सप्लाई संकट के कारण रोज का खर्च निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है।
कंपनी का तर्क: ‘बिक्री बढ़ी, इसलिए आया दबाव’
सप्लाई ठप होने से पंप पर तैनात कर्मचारी भी लाचार नजर आ रहे हैं। उनका साफ कहना है कि आपूर्ति पूरी तरह गड़बड़ाई हुई है और कई पंपों तक समय पर गैस पहुंच ही नहीं पा रही। दूसरी ओर शहर में सीएनजी सप्लाई करने वाली टोरेंट कंपनी का दावा है कि अतिरिक्त दबाव के कारण केवल एक-दो पंपों पर ही अस्थायी किल्लत हुई है। हालांकि पड़ताल में वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट नजर आई। शहर के ज्यादातर पंप सूखे पड़े मिले, जबकि चालू पंपों पर सुबह से देर रात तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। परेशान वाहन चालकों और यात्रियों में कंपनी के दावों को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली।
दौड़भाग: शहर के 80 फीसदी से ज्यादा पंप ठप, महज 5 पंप के भरोसे चल रहे हजारों वाहन।
असर: ऑटो और कैब का संचालन प्रभावित होने से आम मुसाफिर भी स्टैंड्स पर परेशान।


