भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) लिबरेशन (भाकपा माले-लिबरेशन) एक अक्टूबर को पटना में “जन सुनवाई” आयोजित करेगी, जिसमें कम से कम 10 विधानसभा क्षेत्रों के उन लोगों को इकट्ठा किया जाएगा, जिन्होंने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास के दौरान मतदान का अपना अधिकारी कथित तौर पर खो दिया था। पार्टी महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने रविवार को यह जानकारी दी। भट्टाचार्य की यह घोषणा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस दावे के कुछ दिन बाद आई है कि राज्य में पिछले साल हुई एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कोई अनियमितता नहीं हुई थी।
उन्होंने पटना में संवाददाताओं से बातचीत में पार्टी के प्रस्तावित कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा, “उन्हें (भाजपा नेताओं को) आकर खुद देखना चाहिए।”
भट्टाचार्य ने निर्वाचन आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ सांठगांठ में काम करने का आरोप लगाया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने सीईसी की नियुक्ति की प्रक्रिया में बदलाव का भी आह्वान किया। भट्टाचार्य ने एसआईआर को तुरंत रोकने और उन जगहों पर फिर से मतदान कराने की भाकपा (माले) लिबरेशन की मांग को दोहराया, जहां इस प्रक्रिया के बाद चुनाव हुए थे।
भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि भाकपा (माले) लिबरेशन को दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी गई और पार्टी सदस्यों को हिरासत में लेकर 40-50 किलोमीटर दूर स्थित पुलिस थानों में रखा गया। भट्टाचार्य ने कहा, “हम एक निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहे हैं। यह आंदोलन ज्ञानेश कुमार से शुरू होगा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक पहुंचेगा।”
उन्होंने बिहार में कानून-व्यवस्था के ‘पूरी तरह से चरमरा जाने’ का भी आरोप लगाया।

