बेतिया में 70 परिवारों की कमाई का जरिया है घोंघा:रोजाना ₹200 किलो बिकता है; अगस्त-अक्टूबर में बिक्री 3 क्विंटल तक पहुंचती है

बेतिया में 70 परिवारों की कमाई का जरिया है घोंघा:रोजाना ₹200 किलो बिकता है; अगस्त-अक्टूबर में बिक्री 3 क्विंटल तक पहुंचती है

पश्चिम चंपारण के बेतिया में घोंघा करीब 70 परिवारों के लिए कमाई का जरिया बना हुआ है। पश्चिम चंपारण समेत बिहार के कई जिलों में इसकी खुलेआम खरीद-बिक्री होती है। घोंघा तालाब, पोखर और छोटी नदियों से मिलता है। ग्रामीण इसे इकट्ठा कर बाजार में बेचते हैं। फार्मिंग के साथ तालाबों से भी करते हैं संग्रह हरदिया पंचायत के हीरा लाल मांझी के अनुसार, उनके गांव के करीब 70 परिवार घोंघे के कारोबार से जुड़े हैं। ये परिवार घोंघे की फार्मिंग भी करते हैं और तालाबों से घोंघे जमा कर बाजार तक पहुंचाते हैं। स्थानीय स्तर पर घोंघे को ‘अइठा’ कहा जाता है। इसे पकड़ने के लिए बांस से बने खास औजार का इस्तेमाल किया जाता है। बाजार में बेचने से पहले व्यापारी घोंघे का बाहरी खोल हटाकर अंदर के जीव को साफ करते हैं। 200 रुपए किलो तक है कीमत बाजार में घोंघे की कीमत करीब 200 रुपए प्रति किलो है। इसमें प्रोटीन, आयरन और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। अगस्त से अक्टूबर के बीच इसकी बिक्री बढ़कर करीब तीन क्विंटल तक पहुंच जाती है। सामान्य दिनों में करीब दो क्विंटल घोंघे की बिक्री होती है। तालाब, पोखर और छोटी नदियों से घोंघे एकत्र करने से लेकर बाजार में इसकी बिक्री तक कई ग्रामीण परिवार इस कारोबार से जुड़े हैं। पश्चिम चंपारण में घोंघे की खरीद-बिक्री ग्रामीणों के लिए स्थानीय आय का एक जरिया बनी हुई है। पश्चिम चंपारण के बेतिया में घोंघा करीब 70 परिवारों के लिए कमाई का जरिया बना हुआ है। पश्चिम चंपारण समेत बिहार के कई जिलों में इसकी खुलेआम खरीद-बिक्री होती है। घोंघा तालाब, पोखर और छोटी नदियों से मिलता है। ग्रामीण इसे इकट्ठा कर बाजार में बेचते हैं। फार्मिंग के साथ तालाबों से भी करते हैं संग्रह हरदिया पंचायत के हीरा लाल मांझी के अनुसार, उनके गांव के करीब 70 परिवार घोंघे के कारोबार से जुड़े हैं। ये परिवार घोंघे की फार्मिंग भी करते हैं और तालाबों से घोंघे जमा कर बाजार तक पहुंचाते हैं। स्थानीय स्तर पर घोंघे को ‘अइठा’ कहा जाता है। इसे पकड़ने के लिए बांस से बने खास औजार का इस्तेमाल किया जाता है। बाजार में बेचने से पहले व्यापारी घोंघे का बाहरी खोल हटाकर अंदर के जीव को साफ करते हैं। 200 रुपए किलो तक है कीमत बाजार में घोंघे की कीमत करीब 200 रुपए प्रति किलो है। इसमें प्रोटीन, आयरन और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। अगस्त से अक्टूबर के बीच इसकी बिक्री बढ़कर करीब तीन क्विंटल तक पहुंच जाती है। सामान्य दिनों में करीब दो क्विंटल घोंघे की बिक्री होती है। तालाब, पोखर और छोटी नदियों से घोंघे एकत्र करने से लेकर बाजार में इसकी बिक्री तक कई ग्रामीण परिवार इस कारोबार से जुड़े हैं। पश्चिम चंपारण में घोंघे की खरीद-बिक्री ग्रामीणों के लिए स्थानीय आय का एक जरिया बनी हुई है।  

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