जयपुर स्थित अग्रवाल समाज की अग्रसेन कटला को लेकर समाज में विवाद गहराता जा रहा है। मंगलवार को समाज के कई पदाधिकारियों और समाजबंधुओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वर्तमान ट्रस्ट संचालन पर गंभीर आरोप लगाए। समाज के लोगों ने इसे समाज की धरोहर पर एकाधिकार स्थापित करने की साजिश बताते हुए वित्तीय अनियमितताओं और कब्जे के आरोप लगाए। समाज के सदस्य जितेंद्र अग्रवाल ने बताया कि साल 1964 में स्थापित श्री अग्रवाल शिक्षा समिति ट्रस्ट को समाज को बिना जानकारी दिए समाप्त कर नया ट्रस्ट गठित कर लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नया ट्रस्ट बनाते समय समाज के दानवीर स्वर्गीय सूरजमल जी मुंबई वालों और उनके साथियों के वंशजों को ट्रस्ट से बाहर कर दिया गया। समाजबंधुओं ने लगाए गंभीर आरोप जितेंद्र अग्रवाल, अतुल, पवन राणा, सोम गोयल, मदन मोहन मित्तल, नृसिंह गुप्ता और इंद्र मोहन अग्रवाल ने संयुक्त रूप से आरोप लगाया कि अग्रसेन कटला जैसी सामाजिक धरोहर को कुछ चुनिंदा लोगों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। उनका कहना है कि इससे समाज की प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है और समाजहित में योगदान देने वाले लोग हतोत्साहित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज की धरोहर पर बनी गद्दियों को कार्यकारिणी से जुड़े लोगों ने अपने रिश्तेदारों को बेच दिया। इसके अलावा विद्याधर नगर में भवन निर्माण के लिए समाज के दानदाताओं से करीब 10 करोड़ रुपए एकत्र किए गए, लेकिन आज तक उसका सार्वजनिक हिसाब प्रस्तुत नहीं किया गया। आरोप है कि इसमें करीब 2 करोड़ रुपए का लेखा-जोखा स्पष्ट नहीं है। छात्रावास निर्माण के फंड पर भी उठाए सवाल जितेंद्र अग्रवाल ने कहा कि साल 2014-15 में अग्रसेन छात्रावास निर्माण के लिए दानदाताओं से करीब 1 करोड़ 15 लाख रुपए एकत्र किए गए थे, जिनमें से केवल 85 लाख रुपए का हिसाब दिया गया, जबकि शेष 30 लाख रुपए का कोई स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि हॉस्टल निर्माण में कार्य करने वाले कई सप्लायर आज भी भुगतान की मांग कर रहे हैं और इस कारण समाज पर कर्जदार होने का दाग लगा हुआ है। उनका आरोप है कि जिन लोगों पर वित्तीय अनियमितताओं और घोटालों के आरोप लगे हुए हैं, उन्हें ही ट्रस्ट में ट्रस्टी बनाया जा रहा है। 10 लोगों पर कब्जे का आरोप जितेंद्र अग्रवाल ने आरोप लगाया कि केवल 10 लोगों ने समाज की इस संपत्ति पर कब्जा कर लिया है और अपने हितों के लिए पुराने ट्रस्ट को समाप्त कर नया ट्रस्ट गठित किया गया। उनका कहना है कि साल 2013 के बाद से समाज की इस धरोहर में विवादों की शुरुआत हुई और समाज की अमानत में खयानत का दौर शुरू हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2015 में तत्कालीन अध्यक्ष पवन गोयल (विद्याधर नगर वाले) की सिफारिश पर आनंद गुप्ता को ट्रस्टी बनाया गया था, जबकि साल 2023 में भी उन्हें ट्रस्टी नियुक्त किया गया। समाजबंधुओं का कहना है कि इस प्रकार की नियुक्तियां कई सवाल खड़े करती है। चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि पिछले दो साल से समाज समिति के चुनाव कोर्ट में उलझे हुए हैं और इसके पीछे भी ट्रस्टी बनने से जुड़े निजी स्वार्थ कारण हैं। आरोप यह भी लगाया गया कि चुनाव समिति में शिक्षा समिति से जुड़े खास लोगों को ही शामिल किया गया, जिससे पूरे मामले में सुनियोजित षड्यंत्र की आशंका प्रबल होती है। जितेंद्र अग्रवाल ने बताया कि यदि इस पूरे मामले पर कार्यकारिणी संज्ञान नहीं लेती है तो इस प्रकरण को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा। समाजबंधुओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर समाज के समक्ष सभी वित्तीय और प्रशासनिक तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है।


