Continuous Glucose Monitor: डायबिटीज यानी मधुमेह आज के दौर में एक बेहद आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। इसे कंट्रोल में रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम होता है शरीर में ग्लूकोज (शर्करा) के स्तर की नियमित जांच करना। पारंपरिक तरीकों में मरीजों को दिन में कई बार उंगली में सुई चुभोकर खून की बूंद से शुगर नापना पड़ता है। यह प्रक्रिया न केवल दर्दनाक होती है, बल्कि कई बार लोग डर या आलस के कारण सही समय पर जांच करना टाल देते हैं। मेडिकल साइंस में आई नई तकनीक ने अब इस झंझट को काफी हद तक आसान कर दिया है। आज बाजार में ग्लूकोज सेंसर (जिसे तकनीकी भाषा में कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग या CGM कहा जाता है) उपलब्ध है, जो बिना बार-बार त्वचा को छेदे 24 घंटे ब्लड शुगर के स्तर पर नजर बनाए रखता है। आइए समझते हैं कि यह आधुनिक डिवाइस क्या है और डायबिटीज मरीजों के लिए यह किस तरह वरदान साबित हो रहा है।
ग्लूकोज सेंसर (CGM) क्या होता है?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, ग्लूकोज सेंसर एक छोटा सा, वाटरप्रूफ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होता है, जिसे आमतौर पर हाथ के पिछले हिस्से (ट्राइसेप्स) या पेट की त्वचा पर लगाया जाता है। इसमें एक बेहद पतली और लचीली सुई जैसी संरचना होती है, जो त्वचा के ठीक नीचे (सबक्यूटेनियस टिश्यू) में बैठ जाती है। यह खून की जगह आपकी कोशिकाओं के बीच मौजूद द्रव (इंटेरस्टिशल फ्लूइड) में मौजूद शुगर के स्तर को मापता है। यह डिवाइस हर 1 से 5 मिनट में अपने आप शुगर का डेटा रिकॉर्ड करता है और वायरलेस तकनीक (ब्लूटूथ) के जरिए यह जानकारी आपके स्मार्टफोन या रिडर डिवाइस पर भेजता रहता है।
ग्लूकोज सेंस के फायदे क्या-क्या हैं?
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाईजेस्टिव किडनी डिजीज के मुताबिक, बार-बार सुई चुभाने के दर्द से मुक्ति- पारंपरिक तरीके से दिन में 4 से 6 बार उंगली में छेद करने की जरूरत होती है। CGM डिवाइस लगाने के बाद मरीज को 10 से 14 दिनों तक बार-बार सुई चुभाने के दर्द और जलन से पूरी तरह राहत मिल जाती है।
- रियल-टाइम और 24 घंटे की मॉनिटरिंग- सुई वाली जांच केवल उसी एक सेकंड का शुगर लेवल बताती है, जब जांच की गई हो। इसके विपरीत, सेंसर दिन-रात, सोते-जागते और खाते-पीते समय लगातार शुगर का स्तर दिखाता रहता है। इससे यह समझना आसान हो जाता है कि आपका शुगर लेवल कब बढ़ रहा है और कब घट रहा है।
- ट्रेंड्स और पैटर्न की पहचान- यह तकनीक आपको केवल एक नंबर नहीं देती, बल्कि एक तीर (Arrow) का निशान भी दिखाती है। इससे मरीज को यह पता चलता है कि उसका ग्लूकोज स्तर किस दिशा में बढ़ रहा है या गिर रहा है। उदाहरण के लिए, यह बता सकता है कि अगले 15-20 मिनट में शुगर बहुत तेजी से नीचे जाने वाली है।
- रात के समय ‘हाइपोग्लाइसीमिया’ से बचाव- कई बार सोते समय मरीजों का शुगर लेवल खतरनाक रूप से गिर जाता है (जिसे हाइपोग्लाइसीमिया कहते हैं)। यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। ज्यादातर CGM डिवाइसों में अलार्म फीचर होता है जैसे ही शुगर का स्तर तय सीमा से नीचे या ऊपर जाता है, फोन या डिवाइस में जोर से बीप बजने लगती है।
किन लोगों के लिए फायदेमंद होता है ये?
यह सेंसर हर उस व्यक्ति के लिए मददगार है जिसे डायबिटीज है, लेकिन कुछ स्थितियों में डॉक्टर इसे विशेष रूप से रिकमेंड करते हैं;
- टाइप-1 डायबिटीज के मरीज जिन्हें दिन में कई बार इंसुलिन लेना पड़ता है।
- ऐसे मरीज जिनकी शुगर बार-बार अचानक से बहुत कम (Low) हो जाती है।
- गर्भवती महिलाएं जिन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज (Gestational Diabetes) की समस्या हो।
- वे लोग जिनका ब्लड शुगर लेवल बहुत ज्यादा घटता-बढ़ता (Fluctuate) रहता है।

