Growing Pains Cause: अक्सर ऐसा होता है कि बच्चा दिनभर आराम से खेलता-कूदता है, लेकिन रात में अचानक पैरों के दर्द से उठकर रोने लगता है। माता-पिता घबरा जाते हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया। अगर आपके बच्चे के साथ भी अक्सर ऐसा होता है, तो हो सकता है कि यह ग्रोइंग पेन (Growing Pains) हो। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, ग्रोइंग पेन अक्सर 3 से 12 साल के बच्चों में देखने को मिलता है। यह दर्द आमतौर पर शाम या रात के समय दोनों पैरों की मांसपेशियों (जांघों, पिंडलियों या घुटनों के पीछे) में होता है और सुबह होते-होते पूरी तरह गायब हो जाता है। हालांकि यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इससे बच्चे की हड्डियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता, लेकिन हर पैर का दर्द सिर्फ ग्रोइंग पेन नहीं होता। माता-पिता के तौर पर आपको यह पहचानना बहुत जरूरी है कि दर्द कब सामान्य है और कब यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। आइए जानते हैं इसके बारे में जरुरी बातें।
ग्रोइंग पेन के लक्षण क्या हैं(Normal Growing Pains)
मेयो क्लिनिक के अनुसार, यदि बच्चे का दर्द ग्रोइंग पेन है, तो उसमें ये बातें देखने को मिलेंगी;
- दर्द शाम या रात में शुरू होता है और बच्चा सुबह उठकर बिल्कुल ठीक महसूस करता है।
- दर्द दोनों पैरों में होता है, केवल एक पैर में नहीं।
- हड्डियों में नहीं, मांसपेशियों में दर्द महसूस होता है।
- हल्की मालिश, सिकाई या दुलार करने से बच्चे को आराम मिल जाता है और वह सो जाता है।
- बच्चा दिनभर बिना किसी दिक्कत के भाग-दौड़ और खेल-कूद करता है।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
- बच्चा लगातार केवल एक ही पैर, घुटने या टखने के दर्द की शिकायत करे।
- सुबह के समय दर्द या अकड़न।
- बच्चा चलने में लंगड़ा रहा हो या पैर पर वजन डालने से कतरा रहा हो।
- घुटनों, टखनों या किसी जोड़ के पास सूजन हो, वह हिस्सा गर्म महसूस हो या लाल पड़ गया हो।
- पैर दर्द के साथ-साथ बच्चे को तेज या हल्का बुखार भी आ रहा हो।
- वजन कम होना या थकान।
- त्वचा पर चकत्ते (Rashes)।
- पैर को हल्का सा भी छूने या दबाने पर बच्चा दर्द से चिल्ला उठे।
बच्चे को ग्रोइंग पेन होने पर माता-पिता घर पर क्या करें?
अगर डॉक्टर ने पुष्टि कर दी है कि यह सिर्फ ग्रोइंग पेन है, तो आप बच्चे को राहत देने के लिए ये तरीके अपना सकते हैं;
- बच्चे के पैरों की हल्के हाथों से मालिश करें।
- दर्द वाली जगह पर हीटिंग पैड या गर्म पानी की थैली से सिकाई करें।
- सोने से पहले पैरों की हल्की स्ट्रेचिंग कराएं।
- डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चे को कोई भी दर्द निवारक (Painkiller) दवा न दें।

