Congress MP Bimol Akoijam पर हमलों से Manipur BJP में बेचैनी, दांव उलटा पड़ने की चिंता

Congress MP Bimol Akoijam पर हमलों से Manipur BJP में बेचैनी, दांव उलटा पड़ने की चिंता

(सौरव राय बर्मन)
इंफाल, एक नवंबर मणिपुर भाजपा के भीतर कांग्रेस सांसद अंगोमचा विमल अकोइजम से जुड़े विवाद को पार्टी द्वारा संभालने के तरीके को लेकर बेचैनी बढ़ रही है। कुछ वरिष्ठ नेताओं ने माना है कि उन पर सार्वजनिक हमले उल्टे पड़ गए हैं, खासकर ऐसे समय में जब उनकी लोकप्रियता विशेष रूप से मेइती-बहुल इंफाल घाटी के युवाओं के बीच बढ़ रही है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से यौन उत्पीड़न की शिकायतों के चलते अकोइजम को निकाले जाने के बाद, मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह, उनके पूर्ववर्ती एन. बीरेन सिंह और प्रदेश पार्टी अध्यक्ष ए. शारदा देवी सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से उनकी आलोचना की।

वहीं, पार्टी के विधायक टोंगब्रम रॉबिंद्रो सिंह ने एक अलग रुख अपनाते हुए कांग्रेस सांसद पर भरोसा जताया और संसद में मणिपुर से जुड़े मुद्दों को उठाने के उनके प्रयासों की तारीफ की। भाजपा के एक शीर्ष नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “देखिए, हमें विमल पर व्यक्तिगत हमले नहीं करने चाहिए थे। इसका उल्टा ही असर हुआ है।

भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष शारदा देवी ने इस मुद्दे को लेकर अति उत्साह दिखाया और विमल के खिलाफ एक रैली निकाली। यह जमीनी हकीकत का पूरी तरह से गलत आकलन था।”
पार्टी के वरिष्ठ नेता निजी तौर पर मानते हैं कि हाल के महीनों में अकोइजम की लोकप्रियता काफी तेजी से बढ़ी है; कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि घाटी के युवाओं के बीच उनका आकर्षण “बेजोड़” है। उनका मानना ​​है कि पार्टी को इस विवाद को और अधिक समझदारी से संभालना चाहिए था।

सूत्रों के अनुसार, भाजपा के युवा कार्यकर्ताओं ने भी अपनी चिंताएं जताई हैं। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं से संपर्क कर इसी तरह की राय रखी है और कांग्रेस सांसद के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए मार्गदर्शन मांगा है। पता चला है कि एक वरिष्ठ नेता ने उन्हें सलाह दी है कि वे राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) के प्रति कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के विरोध को उजागर करें, ताकि मणिपुर में इस प्रक्रिया की पुरजोर वकालत करने वाले अकोइजम के रुख से एक स्पष्ट अंतर दिखाया जा सके।

भाजपा के सभी नेता हालांकि, इस बात से सहमत नहीं हैं कि अकोइजम की बढ़ती सार्वजनिक पहचान आगे चलकर एक स्थायी राजनीतिक चुनौती बन पाएगी। कुछ लोगों का मानना ​​है कि मणिपुर कांग्रेस के भीतर गुटबाजी, और खासकर पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व वाले पार्टी के पुराने नेताओं के प्रभाव के कारण, संगठन में उनके आगे बढ़ने की राह में रुकावट आ सकती है। कांग्रेस के भीतर के सूत्र भी मानते हैं कि सांसद के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती उनकी अपनी ही पार्टी से आ सकती है।

जेएनयू ने पूर्व प्रोफेसर अकोइजम को 11 छात्राओं द्वारा दर्ज कराई गई यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के बाद नौ अक्टूबर को बर्खास्त कर दिया गया था। अकोइजम ने आरोपों से इनकार किया है, विश्वविद्यालय द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। भाजपा महिला मोर्चा ने 10 अक्टूबर को संसद से उनके इस्तीफे की मांग करते हुए इंफाल में कांग्रेस भवन की ओर एक विरोध मार्च निकाला।

खेमचंद ने भी उनके इस्तीफे की मांग की, जबकि बीरेन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा उन्हें दिए जा रहे समर्थन पर सवाल उठाया। भाजपा की प्रतिक्रिया मणिपुर तक ही सीमित नहीं थी, 13 अक्टूबर को, शारदा देवी समेत भाजपा की महिला सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और उनसे हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। पार्टी की महिला शाखा ने दिल्ली और अन्य जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए, जबकि इसकी युवा शाखा ने 16 अक्टूबर को इंफाल में एक और मार्च निकाला।

अकोइजम के समर्थन में भी सार्वजनिक प्रदर्शन हुए। समर्थन में आयोजित एक रैली में 14 अक्टूबर को, बड़ी संख्या में लोगों – जिनमें मुख्य रूप से युवा शामिल थे – ने इंफाल में भाजपा के प्रदेश मुख्यालय की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने सत्तारूढ़ पार्टी पर सांसद को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने का आरोप लगाया।

रबिंद्रो सिंह ने अकोइजम के प्रति सार्वजनिक रूप से भरोसा और सम्मान जताते हुए, उनसे यह भी आग्रह किया कि विवाद से खुद को पाक-साफ साबित करने के लिए कानूनी रास्ता अपनाएं। वहीं, इबोबी ने इन आरोपों के समय पर सवाल उठाया, साथ ही यह भी कहा कि कानून को अपना काम करने देना चाहिए।

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