गोपालगंज में जिला प्रशासन और श्रम विभाग ने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने और जिले को बाल श्रम से मुक्त करने के लिए एक अभियान शुरू किया है। राष्ट्रीय बाल श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर से एक जागरूकता रैली निकाली गई, जिसमें यह संदेश दिया गया कि बच्चों के हाथों में औजार नहीं, बल्कि किताब और कलम होनी चाहिए। श्रम विभाग द्वारा संचालित यह विशेष अभियान 30 अप्रैल से शुरू होकर 12 जून तक चलेगा। इस अवधि के दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों में सघन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नुक्कड़ नाटकों के जरिए आम लोगों को किया जागरूक स्कूली बच्चों, श्रम प्रवर्तन अधिकारियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से यह संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है कि बाल श्रम एक सामाजिक बुराई है। जिले के सभी प्रखंडों के प्रमुख स्थानों पर नुक्कड़ नाटकों के जरिए आम लोगों और व्यापारियों को बाल श्रम कानूनों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। श्रम अधीक्षक ने सभी होटल संचालकों, गैरेज मालिकों और छोटे प्रतिष्ठानों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को काम पर रखना एक दंडनीय अपराध है। बच्चों को शिक्षा से जोड़ना उद्देश्य जिलाधिकारी के निर्देशानुसार, केवल बच्चों को बचाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना भी प्राथमिकता है। सरकार द्वारा बचाए गए बच्चों के लिए कई लाभकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। मुक्त कराए गए बच्चों के नाम पर 25,000 रुपये की राशि सावधि जमा के रूप में रखी जाती है, जो उन्हें 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर मिलती है। इन बच्चों का नामांकन अनिवार्य रूप से विद्यालयों में कराया जाता है। इसके अतिरिक्त, श्रमिक परिवारों को विवाह सहायता, मातृत्व लाभ और साइकिल योजना जैसी सरकारी सुविधाओं का लाभ सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से दिया जा रहा है। गोपालगंज में जिला प्रशासन और श्रम विभाग ने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने और जिले को बाल श्रम से मुक्त करने के लिए एक अभियान शुरू किया है। राष्ट्रीय बाल श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर से एक जागरूकता रैली निकाली गई, जिसमें यह संदेश दिया गया कि बच्चों के हाथों में औजार नहीं, बल्कि किताब और कलम होनी चाहिए। श्रम विभाग द्वारा संचालित यह विशेष अभियान 30 अप्रैल से शुरू होकर 12 जून तक चलेगा। इस अवधि के दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों में सघन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नुक्कड़ नाटकों के जरिए आम लोगों को किया जागरूक स्कूली बच्चों, श्रम प्रवर्तन अधिकारियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से यह संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है कि बाल श्रम एक सामाजिक बुराई है। जिले के सभी प्रखंडों के प्रमुख स्थानों पर नुक्कड़ नाटकों के जरिए आम लोगों और व्यापारियों को बाल श्रम कानूनों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। श्रम अधीक्षक ने सभी होटल संचालकों, गैरेज मालिकों और छोटे प्रतिष्ठानों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को काम पर रखना एक दंडनीय अपराध है। बच्चों को शिक्षा से जोड़ना उद्देश्य जिलाधिकारी के निर्देशानुसार, केवल बच्चों को बचाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना भी प्राथमिकता है। सरकार द्वारा बचाए गए बच्चों के लिए कई लाभकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। मुक्त कराए गए बच्चों के नाम पर 25,000 रुपये की राशि सावधि जमा के रूप में रखी जाती है, जो उन्हें 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर मिलती है। इन बच्चों का नामांकन अनिवार्य रूप से विद्यालयों में कराया जाता है। इसके अतिरिक्त, श्रमिक परिवारों को विवाह सहायता, मातृत्व लाभ और साइकिल योजना जैसी सरकारी सुविधाओं का लाभ सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से दिया जा रहा है।


