CM भजनलाल के गृह जिले,वसुंधरा के क्षेत्र में वोटिंग बढ़ी:भीलवाड़ा में 3.29% कम वोटिंग ने चौंकाया; क्या निर्दलीयों का दबदबा बढ़ेगा

CM भजनलाल के गृह जिले,वसुंधरा के क्षेत्र में वोटिंग बढ़ी:भीलवाड़ा में 3.29% कम वोटिंग ने चौंकाया; क्या निर्दलीयों का दबदबा बढ़ेगा

प्रदेश के 309 में से 162 शहरी निकायों में बुधवार को वोटिंग हुई। कई जगह वोटिंग के रिकॉर्ड टूटे हैं। 162 निकायों में औसतन 72% वोटिंग हुई है। वहीं दूसरी तरफ भीलवाड़ा में पिछली बार से 3.29% कम वोटिंग ने चौंकाया है। सीएम भजनलाल शर्मा के गृह जिले वाले भरतपुर नगर निगम में पिछली बार से वोटिंग बढ़ी है। कांग्रेस, बीजेपी और निर्दलीय तीनों वोटिंग प्रतिशत के आंकड़ों के अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं। प्रदेश में ​पहली बार एक साथ सभी निकायों के चुनाव हुए हैं, जबकि पिछली बार 4 टुकड़ों में चुनाव हुए थे। निकायों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है। सीएम के गृह जिले के नगर निगम भरतपुर में वोटिंग प्रतिशत बढ़ा सीएम भजनलाल शर्मा के गृह जिले वाले भरतपुर नगर निगम में पिछली बार की तुलना में वोटिंग प्रतिशत में 1.25 फीसदी के आसपास बढ़ोतरी हुई है। पिछली बार के 71.86 प्रतिशत के मुकाबले इस बार 73.13 फीसदी मतदान हुआ। भरतपुर नगर निगम में पिछली बार से वोटिंग बढ़ने के कई कारण माने जा रहे हैं। इस बार भरतपुर में बीजेपी, कांग्रेस के अलावा आरएलडी और निर्दलीयों के फैक्टर काम कर रहे थे। कांग्रेस-बीजेपी ने 8-8 सीटें रणनीति के तहत खाली छोड़ी थीं। पिछले चुनावों में जोड़ तोड़ से बोर्ड बना था नवंबर 2019 में हुए भरतपुर नगर निगम ​चुनावों में कांग्रेस ने निर्दलीयों की सहायता से मेयर बनाया। 65 वार्डों में बीजेपी और निर्दलीय 22-22 वार्ड जीते, कांग्रेस ने 18 और बसपा ने 3 वार्ड जीते थे। भरतपुर में भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में भी सामने आया था कि इस बार ट्रेंड बदल सकता है। अलवर नगर निगम में पिछली बार से मामूली ज्यादा वोटिंग अलवर नगर निगम में पिछली बार से मामूली ज्यादा वोटिंग हैं। यहां पिछली बार 65.36% और इस बार 65.75% वोटिंग हुई। अलवर में स्थानीय मुद्दों को लेकर लोगों में नाराजगी थी। सीएम भजनलाल शर्मा के रोड शो के अलावा बीजेपी ने माइक्रो मैनेजमेंट से चुनाव लड़ा। कांग्रेस में भी नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र सिंह ने ताकत लगाई थी। पिछली बार ​जोड़तोड़ से बोर्ड बना था 2019 के चुनावों में अलवर नगर परिषद थी। 65 वार्डों में बीजेपी 27, कांग्रेस और निर्दलीय 19-19 वार्डों में जीते थे। कांग्रेस ने निर्दलीयों के सहयोग से बीना गुप्ता को सभापति बनाया था। अलवर के आसपास की नगरपालिकाओं में 84 से 86 फीसदी वोटिंग हुई है। बीकानेर में बढ़े वोटिंग प्रतिशत से बीजेपी को कितना फायदा? बीकानेर नगर निगम के चुनावों में पिछली बार की तुलना में बढ़े वोटिंग प्रतिशत के बाद सत्ताधारी पार्टी और कांग्रेस अपने अपने पक्ष में दावे कर रहे हैं। यहां पिछली बार 66.93% और इस बार 68.91% वोटिंग हुई। पिछली बार बीकानेर में बीजेपी ने बोर्ड बनाया था। बीकानेर में कुछ दिन पहले सीएम भजनलाल ने रोड शो किया। यहां बीजेपी ने पूरी टीम लगाई। बीकानेर में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने भी लगातार कैंप किया। भीलवाड़ा में कम, लेकिन बिगोद में रिकॉर्ड 91 फीसदी वोटिंग यहां पिछली बार 67.13% और इस बार 63.84% वोटिंग हुई। भीलवाड़ा में जहां 3.39 फीसदी कम वोटिंग हुई है। वहीं भीलवाड़ा की बिगोद नगरपालिका में 91 फीसदी से ज्यादा वोट पड़े हैं। भीलवाड़ा में नवंबर 2021 में चुनाव हुए थे। पिछले चुनावों में नगर परिषद थी और 70 वार्ड थे। बीजेपी ने 31, कांग्रेस ने 22 और निर्दलीयों ने 17 वार्ड जीते थे। बीजेपी ने जोड़तोड़ से बोर्ड बनाया था। वसुंधरा राजे के क्षेत्र में वोटिंग प्रतिशत बढ़ा, राजेंद्र राठौड़ के इलाके में 7 फीसदी कम मतदान झालावाड़ : वसुंधरा राजे के क्षेत्र में पिछली बार से ज्यादा वोट पड़े, ट्रेंड बरकरार रहने के आसार वसुंधरा राजे के क्षेत्र झालावाड़ में पिछले चुनावों की तुलना में 3 फीसदी से ज्यादा वोट बढ़े हैं। साल 2021 के निकाय चुनाव में 75 फीसदी वोटिंग हुई। बीजेपी को बहुमत मिला था। 45 वार्ड में से बीजेपी को 25, कांग्रेस को 17 और निर्दलीयों को 3 वार्ड में जीत मिली। इस बार 78.16 प्रतिशत वोटिंग हुई। बढ़े वोट प्रतिशत से पुराना ट्रेंड बरकरार रहने का दावा किया जा रहा है। नागौर : पिछली बार से वोटिंग प्रतिशत बढ़ा, बीजेपी के सामने बोर्ड बदलने की चुनौती पिछली बार से वोटिंग प्रतिशत बढ़ा है। बीजेपी के सामने बोर्ड बदलने की चुनौती है। नागौर नगर परिषद में 2021 के चुनाव में 80.90 फीसदी वोट पड़े थे। पिछली बार किसी को बहुमत नहीं मिला था। 60 वार्डों में से कांग्रेस 27, निर्दलीय 21 और बीजेपी 12 सीटों पर जीती थीं। कांग्रेस ने निर्दलीयों के सहयोग से सभापति बनाया। चूरू : राजेंद्र राठौड़ के गृह जिले की परिषद में 7% कम वो​टिंग बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ के गृह जिले चूरू की नगर परिषद में पिछली बार की तुलना में 7 फीसदी कम वोटिंग ने सियासी अटकलों को बल दे दिया है। 2019 में हुए निकाय चुनाव में 74.30% वोटिंग हुई थी। कांग्रेस ने 36, बीजेपी ने 17 और निर्दलीयों ने 7 वार्ड जीते थे। कांग्रेस का बोर्ड बना था। इस बार केवल 67 फीसदी वोटिंग हुई है जबकि चूरू जिले की दूसरी पालिकाओं में 75 फीसदी के आसपास या इससे ज्यादा वोटिंग हुई है। झुंझुनूं : इस बार ट्रेंड बदलने की चुनौती झुंझुनूं में पिछली बार से 2.1 फीसदी कम (74.70%) वोटिंग हुई है। झुंझुनूं सीट पर उपचुनावों में 2024 में पहली बार बीजेपी का विधायक बना है। अब झुंझुनूं नगर परिषद चुनावों में पिछली बार से कम वोटिंग को जनता के उत्साह में कमी से जोड़कर देखा जा रहा है। 2019 के चुनावों में झुंझुनूं में 80.9% वोटिंग हुई थी और कांग्रेस ने बोर्ड बनाया था। कांग्रेस ने 60 में से 34, बीजपी ने 10 और निर्दलीयों ने 16 वार्ड जीते थे। इस बार बीजेपी के सामने झुंझुनूं में बोर्ड बनाने की चुनौती है। धौलपुर : पिछली बार जितनी ही वोटिंग, पिछली बार किसी को बहुमत नहीं मिला था धौलपुर में 74.63 फीसदी वोटिंग हुई है। 2020 के निकाय चुनावों में धौलपुर नगर परिषद में 74.69 % वोटिंग हुई थी। पिछली बार किसी को बहुमत नहीं मिला था। 60 में से बीजेपी और कांग्रेस ने 22-22 वार्ड जीते थे। बसपा ने 1 और निर्दलीयों ने 15 वार्ड जीते थे। निर्दलीय सभापति बनीं थीं। एक्सपर्ट का तर्क : यह वोटर्स के उत्साह की कमी-बढ़ोतरी का पैरामीटर राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार महेश शर्मा के मुताबिक वोटिंग प्रतिशत के आधार पर नतीजों और निकाय के बोर्ड का अनुमान लगाना मुश्किल होता है। शहरी निकाय चुनावों में लोकल मुद्दे अहम होते हैं। वोटिंग प्रतिशत घटने बढ़ने को वोटर्स के उत्साह की कमी-बढ़ोतरी का पैरामीटर माना जाता है। कई बार ज्यादा वोटिंग को वोटर के गुस्से या परिवर्तन से भी जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह हर बार सही हो यह जरूरी नहीं है। वोटिंग घटने के पीछे कई बार उम्मीदवारों को लेकर उदासीनता भी एक कारण होता है। बीजेपी ने सीएम के रोड शो करवाकर चुनाव को हाइप दी सीएम ने वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर हर नगर निगम में रोड शो कर निकाय चुनावों के प्रचार के हाइप दी थी। बीजेपी ने इस बार दूसरे राज्यों के नेताओं को भी इन चुनावों में लगाया और विधानसभा चुनावों की तरह मा​इक्रो मैनेजमेंट किया। शहरी निकाय चुनावों को सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर के तौर पर माना जाएगा। ये खबर भी पढ़ें बीकानेर में बीजेपी विधायक और बूथ अधिकारी में बहस:झुंझुनूं में पुलिसकर्मियों पर फर्जी वोटिंग कराने का आरोप; सीकर के फतेहपुर में पत्थरबाजी वोटिंग खत्म होने के साथ ही प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी: भाजपा-कांग्रेस ने उम्मीदवारों को फोन कर पार्टी ऑफिस बुलाया; बैग लेकर पहुंचे कैंडिडेट

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