Chhattisgarh Forest News: @अब्दुल सलाम। आमतौर पर विकास कार्यों और अधोसंरपन्ना निर्माण के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को नियति मान लिया जाता है। लेकिन दुर्ग-भिलाई में जिला प्रशासन और वन विभाग ने एक बेहद सकारात्मक व प्रेरणादायक पहल की है। अलग-अलग विकास परियोजनाओं के आड़े आ रहे 321 विशालकाय पेड़ों को कुल्हाड़ी से काटने के बजाय, उन्हें वैज्ञानिक पद्धत्ति से जड़ समेत सुरक्षित निकालकर दूसरी जगहों पर पुनर्जीवित (ट्रांसप्लांट) किया गया है।
Chhattisgarh Forest News: रायपुर-राजनांदगांव में भी प्रयोग रहे सफल
पेड़ों को जीवनदान देने का यह शिलसिला केवल दुर्ग-भिलाई तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य जिलों में भी इसके सुखद परिणाम आए हैं। राजनांदगांव में 148 पेड़ों को स्थानांतरित किया गया, जिनमें से रेकॉर्ड 141 पेड़ आज भी जीवित हैं। रायपुर के रेलवे स्टेशन क्षेत्र के पुनर्विकारा के दौरान 132 पेड़ों को दूसरी जगह लगाया गया, जिनमें से 94 पेड़ सुरक्षित बच गए है।
भीषण गर्मी की की तपिश के बावजूद इस अनोखी मुहिम के तहत शिफ्ट किए गए पेड़ों में से 367 पेड़ (लगभग 88 फीसदी) आज भी पूरी तरह सुरक्षित और जीवित है। प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि एक नन्हे पौधे को विशाल और शायादार वृक्ष बनने में दशकों का समय लगता है। ऐसे में विकास की वेदी पर उन्हें बेरहमी से काटने के बजाय सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
नेहा बंसोड, वृक्ष शल्य चिकित्सक
पेड़ो को शिफ्ट करने के बाद इंसानों की तरह ही उनका भी विशेष मेडिकल ट्रीटमेंट किया जाता है। गर्मी के इस झुलसाने वाले मौसम में उन्हें नियमित रूप से पानी, ववाड्यां और जरूरी पोषण दिया जा रहा है, ताकि वे नई जगह की मिट्टी में दोबारा जड़ पकड़ सकें। यह पहल विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की ऐसी मिसाल है, जो अन्य जिलों के लिए नजीर बनेगी।


