सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को BRS विधायक दानम नागेंद्र की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसके तहत सत्ताधारी कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई कारण नहीं है। सुनवाई के दौरान, जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। इस मामले को पार्टी बदलने का मामला बताया। जस्टिस बागची ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, आपका मामला तो ‘आया राम, गया राम, फिर आया राम’ वाला है? उन्होंने यह मुहावरा उन नेताओं के लिए इस्तेमाल किया जो अक्सर अपनी पार्टी बदलते रहते हैं।
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नागेंद्र की ओर से सीनियर वकील मुकुल रोहतगी पेश हुए। तेलंगाना हाई कोर्ट ने इससे पहले विधानसभा स्पीकर के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जो इस साल मार्च में पारित किया गया था और जिसमें विधायक को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद हाई कोर्ट ने खैराताबाद के MLA नागेंद्र को 23 अप्रैल, 2024 से तेलंगाना विधानसभा के सदस्य के तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने पाया कि BRS के MLA रहते हुए उन्होंने सिकंदराबाद सीट से कांग्रेस के टिकट पर 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था।
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हाई कोर्ट ने यह आदेश विधानसभा में BJP के फ्लोर लीडर एलेटी महेश्वर रेड्डी और BRS नेता पी. कौशिक रेड्डी की याचिकाओं पर दिया। उन्होंने कोर्ट से स्पीकर के आदेश को रद्द करने और यह घोषित करने की मांग की थी कि नागेंद्र उस तारीख से ही अयोग्य हो गए थे, जब उन्होंने 2024 के आम चुनावों के लिए अपना नॉमिनेशन हलफनामा दाखिल किया था; क्योंकि यह दसवीं अनुसूची के पैरा 2(1)(a) के तहत आता है। तेलंगाना विधानसभा के स्पीकर गड्डम प्रसाद कुमार ने 11 मार्च को नागेन्दर को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट के दखल देने से इनकार करने के बाद, कांग्रेस में शामिल होने की वजह से नागेन्दर को अयोग्य ठहराने का हाई कोर्ट का आदेश बरकरार है।

