Peace Talks : अमेरिका और ईरान के बीच अप्रेल 2026 में लागू हुए युद्धविराम को दो सप्ताह और बढ़ाने पर मजबूत सहमति बनती दिख रही है। कूटनीतिक वार्ताओं और मध्यस्थता के जरिये दोनों देशों ने तनाव कम करने और स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मीडिया रिपोटर्स का कहना है कि सीजफायर दो सप्ताह आगे बढ़ सकता है।इसके लिए दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है। दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे चल रही कूटनीतिक वार्ताओं ने युद्ध के खतरे को टालने में अहम भूमिका निभाई है। ध्यान रहे कि इस्लामाबाद में आयोजित दूसरे दौर की शांति वार्ता बिना किसी समझौते के टूट गई है।
अमेरिका को पहले ईरान का विश्वास जीतना होगा
दोनों देशों के बीच मौजूदा सीजफायर की अवधि 22 अप्रेल को समाप्त हो रही है। रविवार, 12 अप्रेल 2026 को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी वार्ताकार मोहम्मद बाघेरी कलीबाफ के बीच लगभग 21 घंटे तक चली बातचीत बेनतीजा रही थी।अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने शर्त रखी थी कि ईरान अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम पूरी तरह से बंद करे, यूरेनियम संवर्धन रोके और हमास व हिजबुल्लाह जैसे समूहों को फंडिंग देना बंद करे। ईरान ने अमेरिका की इन शर्तों को खारिज कर दिया। कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका को पहले ईरान का विश्वास जीतना होगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि “यदि आप लड़ेंगे, तो हम भी लड़ेंगे।”
दोनों देशों के बीच कैसे बनी सहमति?
लंबे समय तक चले तनाव और सैन्य कार्रवाइयों के बाद, अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में कई महत्वपूर्ण कारणों ने काम किया:
- पाकिस्तान और ओमान की मध्यस्थता: दोनों देशों के बीच सीधे बातचीत न होने के कारण पाकिस्तान और ओमान ने ‘बैक-चैनल’ कूटनीति के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान किया। इस्लामाबाद में हुई गुप्त बैठकों में दोनों पक्षों की चिंताओं को सुना गया और बीच का रास्ता निकाला गया।
- होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना: अमेरिका की सबसे बड़ी शर्त वैश्विक व्यापार मार्ग को सुरक्षित रखना था। ईरान द्वारा इस जलडमरूमध्य से व्यापारिक और तेल के जहाजों को सुरक्षित गुजरने की गारंटी देने के बाद अमेरिकी रुख में नरमी आई।
- आर्थिक मोर्चे पर बढ़ता दबाव: युद्ध की वजह से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव और शेयर बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही थी। वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ दोनों देशों की घरेलू अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहे दबाव ने उन्हें शांति का रास्ता चुनने पर मजबूर किया।
अमेरिका और ईरान के बीच सहमति के मेन पॉइंट्स
दोनों देशों के बीच सीजफायर बढ़ाने को लेकर जो शर्तें तय हुई हैं, उन्हें नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है:
| मुद्दा | सहमति का बिंदु |
|---|---|
| सैन्य कार्रवाई | दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर कोई सीधा हमला नहीं करेंगे। |
| समुद्री व्यापार | अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र (खासकर होर्मुज) में तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। |
| कूटनीतिक वार्ता | अगले दो सप्ताह का उपयोग स्थायी शांति समझौते का ड्राफ्ट तैयार करने में होगा। |
अब दोनों देशों के बीच आगे की राह क्या है ?
विशेषज्ञों का मानना है कि सीजफायर का यह विस्तार दोनों देशों के लिए विश्वास कायम करने का काम करेगा। अगर अगले 14 दिनों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्र में सक्रिय प्रॉक्सी समूहों जैसे मुद्दों पर कोई ठोस कूटनीतिक समाधान निकल आता है, तो यह मध्य पूर्व में एक ऐतिहासिक शांति समझौते की नींव रख सकता है। फिलहाल वैश्विक बाजारों ने इस खबर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।


