असहमति के अधिकार की रक्षा ही लोकतंत्र की असली ताकत
हर्ष काबरा, (वरिष्ठ पत्रकार एवं विश्लेषक) ट्रंंप की नीयत पर सवाल हो सकते हैं, लेकिन उनका यह कहना सही है कि लोकतांत्रिक मतभेद गोलियों से नहीं, बल्कि खुली बहस से सुलझाए जाने चाहिए। अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ केवल पसंदीदा विचारों को बोलने का हक नहीं, बल्कि नागवार और असहमत आवाजों के लिए जगह बचाए…

