LPG Crisis Impact: यह केवल दो उदाहरण नहीं है। मुख्यालय सहित जिले में अब अमरीका- इरान- इजराइल के बीच चल रहे तनाव का असर फास्टफूड के शौकीन लोगों की जेब पर पड़ने लगा है। रसोई गैस के संकट और प्लास्टिक के डिस्पोजल कप, गिलास और प्लेट के दाम बढ़ने के कारण फास्टफूड और खाने के होटल संबंधी कई स्थाई और अस्थाई कारोबारियों ने मोमोज, बर्गर, चाऊमीन और फ्रेंचफाइज के दाम बढ़ा दिए हैं।
मोमोज, चाऊमीन, बर्गर के प्रति प्लेट औसतन दस रुपए तक बढ़ा दिए गए हैं। दुकानदारों की माने तो आगामी दिनों में रसोई गैस संकट के कारण चाय और होटलों में मिलने वाले खाने की सामग्री पर भी पड़ा है। ऐसे में खाने-पीने के होटलों और चाय-समोसा बेचकर गुजारा करने वालों ने रोजगार के दूसरे विकल्प अपनाने शुरू कर दिए हैं।
वहीं कुछ लोगों ने उसी कीमत पर दी जाने वाली खाद्य सामग्री की मात्रा में कमी कर दी है। सबसे ज्यादा असर छात्र और मजदूर वर्ग, जो सस्ते नाश्ते पर निर्भर रहते हैं, अब उन्हें ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
केस एक
जयपुर रोड पर सैनी चाट भंडार के संचालक गिरधारी सैनी ने मोमोज की तीस रुपए में मिलने वाली प्लेट के दाम अब 40 रुपए प्रति प्लेट कर दिए हैं। बकौल गिरधारी अब रसोई गैस ही नहीं मिल रही है। मजबूरी में दाम बढ़ाए हैं। इसका असर रोजाना होने वाली बिक्री पर नजर आ रहा है।
केस दो
स्टेशन रोड पर बर्गर बेचने वाले अमित के अनुसार आजीविका कमाने के लिए यूपी से सीकर आए थे लेकिन एक माह से रसोई गैस नहीं मिलने के कारण वापस गांव जाना पड़ेगा। कालाबाजारी के रुप में अतिरिक्त राशि देने की बजाए तो गांव में खेत में ही काम कर लेंगे जिससे कम से कम कुछ पैसा तो बचेगा।
यह है कारण
ईरान-अमेरिका तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस सप्लाई प्रभावित हो गई है। पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कमी से गैस वितरण पर असर पड़ा है। पहले जहां घरेलू गैस के सिलेंडर रीफिल आसानी से मिल जाते थे अब अब कालाबाजारी के कारण रीफिल की कीमत बढ़ा दी गई है।
दुकानदारों के अनुसार गैस के संकट को देखते हुए अगर दाम नहीं बढ़ाते तो दुकान चलाना मुश्किल हो जाता। गैस के बिना काम ठप हो जाता है और महंगे सिलेंडर से लागत निकलना भी जरूरी है। गैस आपूर्ति और कीमतों में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में नाश्ते के ये विकल्प और महंगे हो सकते हैं।


