Rajasthan Housing Board Action : जयपुर। तीन दशक से विवादों में उलझी बी-2 बाईपास की करोड़ों की जमीन पर आखिरकार गुरुवार को बुलडोजर चल गया। हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजस्थान आवासन मंडल ने कार्रवाई शुरू करते हुए पहले ही दिन 30 से अधिक निर्माण ढहा दिए और करीब 15 बीघा जमीन पर कब्जा ले लिया। करीब 2200 करोड़ रुपए की इस जमीन पर अब मंडल आवासीय और व्यावसायिक योजना लाने की तैयारी में है।
कार्रवाई के दौरान विरोध भी सामने आया। हैरानी की बात यह कि कार्रवाई के दौरान एक भी मूल आवंटी मौके पर नहीं पहुंचा। किराए पर रह रहे लोगों ने मकान खाली करने के लिए समय मांगा और कुछ जगहों पर पथराव भी हुआ, जिसमें एक जेसीबी का कांच टूट गया। शुरुआती घंटों में पुलिस बल की कमी के कारण टीम को दिक्कतों का सामना करना पड़ा, हालांकि बाद में पुलिस पहुंचने पर कार्रवाई ने रफ्तार पकड़ी। जिस जमीन पर मंडल ने कब्जा लिया, वहां पर मंडल सम्पत्ति के बोर्ड भी लगा दिए। मंडल सूत्रों की मानें तो सांगानेर-बगरू की शेष 86 कॉलोनियों पर मंडल अभी कोई कार्रवाई नहीं करेगा।

दोपहर 3:30 बजे पहुंच कार्रवाई के लिए, तैयारी अधूरी दिखी
आवासन मंडल की टीम दोपहर 3:30 बजे कार्रवाई के लिए पहुंचा। इस दौरान तैयारी अधूरी नजर आई। यही वजह रही कि मकानों में जो लोग किराए पर रह रहे, उन्होंने विरोध शुरू कर दिया और मंडल की जेसीबी को रोक दिया। विरोध कर रहे लोग मकानों को खाली करने के लिए समय मांग रहे थे। मंडल अपने गार्ड के भरोसे ही कार्रवाई के लिए पहुंच गया। शाम पांच बजे मौके पर पुलिस पहुंची।
ये है मामला
बीते दिनों हाईकोर्ट ने बी टू बाईपास स्थित 42 बीघा 10 बिस्वा भूमि से जुड़े विवाद में फैलसा राजस्थान आवासन मंडल के पक्ष में सुनाया था। तीन दशक से न्यायिक प्रक्रिया में उलझी इस भूमि को मंडल की माना गया। इसके बाद मंडल ने जमीन पर कब्जा लेने का काम शुरू कर दिया।
ये भी जानें
-कोर्ट ने वर्ष 1986 की ऑडिट रिपोर्ट और 25 जुलाई, 2019 की जांच रिपोर्ट के आधार पर कहा कि अधिग्रहण से पूर्व कोई योजना अस्तित्व में नहीं थी। समिति ने मूल खातेदारों को पक्षकार भी नहीं बनाया। साथ ही काश्तकारो की सिविल कोर्ट में जमा मुआवजा राशि प्राप्त करने का हकदार माना। वहीं, आवासन मंडल को आवश्यक कानूनी कार्रवाई की छूट दी।
मंडल ने किया था एनओसी देने से मना
वर्ष 2019 में जेडीए उक्त कॉलोनी का नियमन शिविर लगाना चाहता था। इसके लिए मंडल से एनओसी मांगी थी। उस समय मंडल के तत्कालीन आयुक्त पवन अरोड़ा ने एनओसी देने से इनकार कर दिया। मंडल ने तर्क दिया था कि मौके पर 50 फीसदी निर्माण नहीं है तो फिर नियमन क्यों किया जा रहा है? इस मामल में सोसाइटी के खिलाफ मंडल ने प्राथमिकी भी दर्ज करवाई थी। साथ ही मामले को एसीबी में भी भेजा गया था।
आवासन मंडल आयुक्त अरविंद पोसवाल ने बताया कि जो खाली जमीन थी, उस पर मंडल ने कब्जा ले लिया है। शेष हिस्से में कई परिवार रह रहे हैं, उनको नोटिस देकर हटाया जाएगा। इस मामले में 17अप्रेल को हाईकोर्ट में सुनवाई भी है।


