पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में एक पुल का निर्माण हुआ है, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। आदापुर प्रखंड के लक्ष्मीपुर के पास ‘नगर’ पर बने इस पुल की लागत करीब 3 करोड़ 14 लाख रुपये है, लेकिन एप्रोच पथ न होने के कारण यह अनुपयोगी साबित हो रहा है। यह पुल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाया गया है। इसका निर्माण रक्सौल से छौड़ादानों जाने वाली सड़क पर स्वीकृत हुआ था। निर्माण एजेंसी उत्तर बिहार कंस्ट्रक्शन ने लगभग एक वर्ष के भीतर इसका कार्य पूरा कर लिया। कागजों पर परियोजना समय पर पूरी हो गई पुल का शिलान्यास 15 मार्च 2024 को हुआ था और 14 मार्च 2025 तक इसे पूरा कर लिया गया। कागजों पर परियोजना समय पर पूरी हो गई है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि पुल तक पहुंचने के लिए एप्रोच पथ का निर्माण ही नहीं किया गया है। सड़क से पुल के एप्रोच पाथ की ऊंचाई लगभग ढाई से तीन फीट अधिक है, जिससे इस पर सीधे चढ़ना या उतरना संभव नहीं है। पुल अचानक सड़क पर समाप्त हो जाता है, जिससे भविष्य में दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है। पुल की आवश्यकता पर भी सवाल उठा रहे स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यहां एप्रोच पथ बनाया भी जाता है, तो सड़क की संरचना ऐसी है कि आए दिन हादसे हो सकते हैं। वे पुल की आवश्यकता पर भी सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि यह जिस स्थान पर बना है, वहां इसके नीचे बहने वाली नहर के आगे खाली खेत हैं और कोई प्रमुख रास्ता भी नहीं गुजरता। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना आवश्यकता और बिना उचित सर्वेक्षण के इस पुल का निर्माण कर दिया गया, जिससे सरकारी पैसे की बर्बादी हुई है। यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल उठा रहे हैं। अधिकारियों ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया जब इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो किसी ने भी इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं न कहीं इस परियोजना में लापरवाही या अनियमितता जरूर हुई है। फिलहाल यह पुल उपयोग से पहले ही ‘बेकार’ साबित हो रहा है और केवल खड़ा होकर लोगों को आते-जाते देखने के अलावा इसका कोई उपयोग नजर नहीं आ रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या इस पुल को उपयोगी बनाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं। पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में एक पुल का निर्माण हुआ है, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। आदापुर प्रखंड के लक्ष्मीपुर के पास ‘नगर’ पर बने इस पुल की लागत करीब 3 करोड़ 14 लाख रुपये है, लेकिन एप्रोच पथ न होने के कारण यह अनुपयोगी साबित हो रहा है। यह पुल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाया गया है। इसका निर्माण रक्सौल से छौड़ादानों जाने वाली सड़क पर स्वीकृत हुआ था। निर्माण एजेंसी उत्तर बिहार कंस्ट्रक्शन ने लगभग एक वर्ष के भीतर इसका कार्य पूरा कर लिया। कागजों पर परियोजना समय पर पूरी हो गई पुल का शिलान्यास 15 मार्च 2024 को हुआ था और 14 मार्च 2025 तक इसे पूरा कर लिया गया। कागजों पर परियोजना समय पर पूरी हो गई है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि पुल तक पहुंचने के लिए एप्रोच पथ का निर्माण ही नहीं किया गया है। सड़क से पुल के एप्रोच पाथ की ऊंचाई लगभग ढाई से तीन फीट अधिक है, जिससे इस पर सीधे चढ़ना या उतरना संभव नहीं है। पुल अचानक सड़क पर समाप्त हो जाता है, जिससे भविष्य में दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है। पुल की आवश्यकता पर भी सवाल उठा रहे स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यहां एप्रोच पथ बनाया भी जाता है, तो सड़क की संरचना ऐसी है कि आए दिन हादसे हो सकते हैं। वे पुल की आवश्यकता पर भी सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि यह जिस स्थान पर बना है, वहां इसके नीचे बहने वाली नहर के आगे खाली खेत हैं और कोई प्रमुख रास्ता भी नहीं गुजरता। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना आवश्यकता और बिना उचित सर्वेक्षण के इस पुल का निर्माण कर दिया गया, जिससे सरकारी पैसे की बर्बादी हुई है। यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल उठा रहे हैं। अधिकारियों ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया जब इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो किसी ने भी इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं न कहीं इस परियोजना में लापरवाही या अनियमितता जरूर हुई है। फिलहाल यह पुल उपयोग से पहले ही ‘बेकार’ साबित हो रहा है और केवल खड़ा होकर लोगों को आते-जाते देखने के अलावा इसका कोई उपयोग नजर नहीं आ रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या इस पुल को उपयोगी बनाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।


