राजस्थान में अगले महीने राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। आकड़ों के गणित के अनुसार, तीन में से दो सीट पर बीजेपी और एक सीट पर कांग्रेस की जीत पक्की है। ऐसे में बीजेपी केवल दो सीटों को लेकर प्रत्याशी मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है। इसे लेकर 16 मई को प्रदेश कोर कमेटी की बैठक में भी संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की गई। कोर कमेटी के सदस्यों ने चर्चा के बाद प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और सीएम भजनलाल शर्मा को नामों का फाइनल पैनल भेजने के लिए अधिकृत किया है। प्रदेश के राजनीतिक समीकरण और खाली हो रही सीटों के जातिगत समीकरण को देखते हुए पार्टी एक सीट पर मूल ओबीसी से किसी को राज्यसभा भेज सकती है। एक सीट से केन्द्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को फिर से रिपीट किया जा सकता है। हालांकि इसका अंतिम निर्णय केन्द्रीय नेतृत्व पर छोड़ा गया है। पूनिया-राठौड़ और अलका गुर्जर का नाम आगे प्रदेश कोर कमेटी में जिन नामों को लेकर चर्चा हुई है, उनमें पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ और राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर का नाम प्रमुखता से रहा है। सतीश पूनिया और राजेन्द्र राठौड़ के विधानसभा चुनाव हारने के बाद से लगातार उन्हें संसद में भेजने की चर्चा रही है। दोनों को ही लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला। इसके बाद हुए विधानसभा उपचुनावों में भी दोनों को फिर से चुनाव लड़ाए जाने की चर्चा रही। लेकिन वहां भी दोनों के हाथ खाली रहे। सतीश पूनिया को पार्टी ने हरियाणा का प्रदेश प्रभारी बनाकर संगठन में जिम्मेदारी दे रखी है। राजेन्द्र राठौड़ के पास फिलहाल कोई खास जिम्मेदारी नहीं है। ऐसे में इस बार इनके नाम पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर को विधानसभा चुनाव में पूर्वी राजस्थान से चुनाव लड़ाए जाने की चर्चा थी। लेकिन उन्हें भी टिकट नहीं मिला था। इसके साथ ही मौजूदा राज्यसभा सांसदों में से बीजेपी की कोई भी महिला सांसद नहीं है। ऐसे में इस बार पार्टी उनके नाम पर भी विचार कर रही है। अलका गुर्जर पार्टी के लिए जातिगत समीकरण के लिहाज से भी फिट बैठ रही हैं। आदिवासी अंचल से सामान्य को टिकट चर्चा है कि पार्टी इस बार आदिवासी अंचल से किसी सामान्य वर्ग के नेता को राज्यसभा भेज सकती है। उदयपुर जिले में पंच से लेकर सांसद तक के अधिकतर पद रिजर्व कैटेगिरी में हैं। लंबे समय से उदयपुर जिले से कोई सामान्य वर्ग का सांसद नहीं बना है। साल 2016 में भी पार्टी इस तरह का प्रयोग कर चुकी है। उस समय पार्टी ने डूंगरपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य हर्षवर्द्धन सिंह को राज्यसभा भेजा था। इस बार उदयपुर से प्रमोद सामर के नाम को लेकर चर्चा चल रही है। प्रमोद सामर प्रदेश टीम में मंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा जिले में युवा मोर्चा की कमान भी संभाल चुके हैं। वर्तमान में इनके पास सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक का जिम्मा है। इनके नाम को लेकर गुलाबचंद कटारिया की सहमति भी पार्टी के लिए जरूरी है, जो फिलहाल संभव कम नजर आती है। प्रभुलाल सैनी और नरसी कुलरिया के नाम की भी चर्चा मूल ओबीसी के तहत पार्टी प्रभुलाल सैनी के नाम पर भी विचार कर सकती है। प्रभुलाल सैनी सत्ता व संगठन दोनों में सक्रिय रहे हैं। वसुंधरा सरकार में मंत्री रहे। संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। पार्टी ने विधानसभा चुनाव में उन्हें हिंडोली से टिकट दिया था, लेकिन वे चुनाव हार गए थे। अंता उपचुनाव में भी वे टिकट के प्रबल दावेदार रहे थे। ऐसे में अब पार्टी में उन्हें राज्यसभा भेजने पर भी विचार चल रहा है। इसके साथ ही बीकानेर जिले की नोखा तहसील के सीलवा मूलवास गांव के रहने वाले और नरसी ग्रुप के संस्थापक-एमडी नरसी कुलरिया के नाम की भी चर्चा है। नरसी कुलरिया उद्योगपति और समाजसेवी हैं। इनकी कंपनी नए संसद भवन के इंटीरियर का काम भी कर चुकी है। आरएसएस भी इनके नाम को आगे बढ़ा रहा है। हालांकि कोर कमेटी में इनके नाम पर कोई चर्चा नहीं हुई।


