Iran us war: युद्ध का असर से राॅ मटेरियल सप्लाई प्रभावित, बुखार पेन किलर समेत अन्य दवाएं हो सकती हैं महंगी

Iran us war: युद्ध का असर से राॅ मटेरियल सप्लाई प्रभावित, बुखार पेन किलर समेत अन्य दवाएं हो सकती हैं महंगी

Iran us war: ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण दवाइयों व कंज्यूमेबल आइटम बनाने में उपयोग आने वाला राॅ मटेरियल महंगा हो गया है। इससे ग्लूकोज बोतल व स्ट्रिप 20 से 30 फीसदी तक महंगी हो गई है। पैकेजिंग का कच्चा माल भी महंगा हो गया है। इससे आने वाले दो माह में बुखार, पेन किलर समेत दूसरी दवाइयां महंगी होने की आशंका है। राहत की बात ये है कि अभी लोगों को पुराने स्टॉक के कारण पुरानी कीमत पर दवाइयां मिल रही हैं। पेट्रोकेमिकल्स से बनने वाले राॅ मटेरियल व शिपिंग रूट बंद होने से ज्यादा समस्या हुई है।

Iran us war: ग्लूकोज 30 फीसदी तक महंगा

दवा कारोबारियों के अनुसार पैरासिटामॉल, डाइक्लोफेनेक, मेटफार्मिन, सिप्रोफ्लॉक्सासिन, इजिथ्रोमाइसिन, पेंटाप्रोजॉल, मोंटेलुकास्ट सोडियम जैसी दवाइयां महंगी होने की संभावना है। पत्रिका ने सोमवार को विभिन्न मेडिकल स्टोर में दवाओं की कीमत बढ़ने के बारे में पूछा तो पता चला कि आने वाले दिनों में कीमत बढ़ सकती है। ग्लूकोज बोतल की कीमत प्रति बोतल 15 से 20 रुपए बढ़ गई है। पेट्रो केमिकल से बनने फार्मा साल्वेंट्स महंगे हुए हैं। प्रोपलीन, मेथेनॉल, अमोनिया का भी उपयोग दवा बनाने में होता है। इनकी सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है।

पैकेजिंग मटेरियल महंगा

दवा कारोबारियों के अनुसार पॉलीएलिथीन 80 से 160 रुपए प्रति किग्रा तक महंगा हो गया है। पीवीसी बोतलें 35 फीसदी तक महंगी हो गई हैं। एल्युमिनियम फाइल 30 से 40, ग्लास वायल व रबर स्टॉपर के रेट 20 से 30 फीसदी तक बढ़े हैं। रायपुर केमिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि अभी दवाइयों की कीमत नहीं बढ़ी है। आने वाले दिनों में इसकी कीमत बढ़ने से लोगों की जेब हल्की होगी। हालांकि राॅ मटेरियल सस्ता होने से कीमत घट सकती है। हालांकि इसकी संभावना कम होती है।

सबसे ज्यादा मुनाफा जेनेरिक पर

दवा कारोबारियों के अनुसार, दुकानदार सबसे ज्यादा मुनाफा जेनेरिक दवाइयों पर कमा रहे हैं। एमआरपी में 72 फीसदी छूट देने के बावजूद दुकानदार काफी मुनाफा में रहता है। उदाहरण के तौर पर बताया कि मोंटेलुकास्ट टैबलेट की कीमत 299 रुपए है। 72 फीसदी छूट देने पर यह 84 रुपए में ग्राहकों को मिल रही है। जबकि यही दवा रेडक्रास मेडिकल स्टोर में 35 रुपए में मिल जाती है। धनवंतरी मेडिकल स्टोर में दवा सस्ती पड़ती है, लेकिन रेडक्रास से नहीं। रेडक्रास मेडिकल स्टोर में नो प्रोफिट नो लॉस के अनुसार दवाइयां बेची जा रही हैं। जबकि धनवंतरी में मुनाफाखोरी जोरों पर है। यहां जिसमें मुनाफा का मार्जिन कम हो, वे दवाइयां नहीं बेची जा रही हैं।

ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण दवा बनाने में काम आने वाला राॅ मटेरियल महंगा तो हुआ है, लेकिन इसका असर अभी नहीं पड़ा है। दो माह में दवाइयों की कीमतें बढ़ने की आशंका है। अभी पुराना स्टॉक है इसलिए लोगों को पुरानी कीमत पर दवाइयां बेची जा रही हैं।

ठाकुर राजेश्वर सिंह, वरिष्ठ थोक दवा विक्रेता

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