भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन को लेकर सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसका दायरा 12098 यानी, करीब 13 हजार स्क्वेयर किमी होगा। वहीं, भोपाल, रायसेन, विदिशा, सीहोर, राजगढ़ और नर्मदापुरम के कुल 2510 गांव जुड़ेंगे। एक्सपर्ट का कहना है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब अपने पुराने भौगोलिक स्वरूप को पीछे छोड़कर एक विशाल ‘महानगर क्षेत्र’ (Metropolitan Region) के रूप में उभरने जा रही है। नोटिफिकेशन के बाद यह सिर्फ भोपाल जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें आसपास के आधा दर्जन जिले शामिल होंगे। इसके बाद यहां विकास कार्य कराए जा सकेंगे। भोपाल मेट्रोपॉलिटन में नर्मदापुरम भी शामिल
मप्. महानगर क्षेत्र नयोजन एवं विकास अधिनियम, 2025 के तहत गठित इस नए रीजन में भोपाल के साथ रायसेन, सीहोर, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिले के उन हिस्सों को जोड़ा गया है, जो भोपाल की सीमा से सटे हुए हैं और जहां भविष्य में शहरी फैलाव की प्रबल संभावना है। 2510 गांवों को एक साथ एक ही प्रशासनिक नियोजन तंत्र के नीचे लाने का यह प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा प्रयोग है। इन जिलों के गांवों का समावेश क्यों पड़ी इतने बड़े क्षेत्र की जरूरत?
सरकार का मानना है कि भोपाल की बढ़ती आबादी और उद्योगों के दबाव के कारण अनियंत्रित विकास हो रहा था। 2510 गांवों को शामिल करने से अब पूरे क्षेत्र के लिए एक ‘यूनिफाइड मास्टर प्लान’ तैयार होगा। यह फायदा होगा चुनौतियां और विकास की नई राह
इतने विशाल क्षेत्र के प्रबंधन के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त ‘मेट्रोपॉलिटन रीजनल प्लानिंग बोर्ड’ का गठन किया जाएगा। हालांकि, इतने बड़े ग्रामीण क्षेत्र को शहरी नियोजन में शामिल करने से राजस्व और भूमि अधिग्रहण की चुनौतियां भी आएंगी, लेकिन लंबी अवधि में यह भोपाल को दिल्ली-NCR की तर्ज पर एक सशक्त आर्थिक हब के रूप में स्थापित करेगा।
निष्कर्ष: भोपाल अब केवल एक शहर नहीं, बल्कि आधा दर्जन जिलों के संगम से बना एक ‘ग्रेटर भोपाल’ है, जो विकास के नए प्रतिमान गढ़ने को तैयार है।


