जुनवानी जमीन धोखाधड़ी मामले में सिंपलेक्स कास्टिंग्स लिमिटेड की डायरेक्टर संगीता केतन शाह और उसके पति केतन शाह को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश पी एस मरकाम की अदालत ने केतन शाह और संगीता केतन शाह की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि यह मामला पहली नजर में बेहद गंभीर । आरोपियों को जमानत का फायदा नहीं दिया जा सकता। विवादित जमीन के 10 लाख लेकर रजिस्ट्री नहीं की, उसी जमीन पर 4.50 करोड़ लोन लिया
सुनवाई के दौरान प्रार्थी पक्ष के वकील अभिषेक दास वैष्णव ने कोर्ट को बताया कि सुनील कुमार सोमन के मुताबिक आरोपियों ने ग्राम कोहका की विवादित जमीन को विवाद मुक्त बताकर 50 लाख में सौदा किया। 10 लाख एडवांस भी लिए, लेकिन बाद में रजिस्ट्री करने से मना कर दिया। उसके बाद उसी जमीन पर 4.5 करोड़ का लोन ले लिया। पुलिस ने कोर्ट के आदेश के बाद दोनों पति पत्नी के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 120B समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया है। जिसकी जांच जारी है। आरोपी ने कोर्ट में कहा- प्रार्थी को लौटा दी थी राशि
वहीं आरोपी सिम्प्लेक्स कॉस्टिंग की डायरेक्टर संगीता केतन शाह ने कोर्ट में अपने बचाव में कई तर्क रखे। उन्होंने कहा कि घटना के करीब तीन साल बाद 8 मई 2026 को रिपोर्ट दर्ज कराई गई और देरी का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। उन्होंने दावा किया कि शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपए वापस कर दिए गए थे। यह रकम 10 अक्टूबर 2024 को खाते में ट्रांसफर की गई थी, लेकिन इस तथ्य को छिपाकर कोर्ट में परिवाद पेश किया गया। आरोपी पक्ष ने यह भी कहा कि लोन के लिए आवेदन 27 सितंबर 2024 को किया गया था और रकम अक्टूबर 2024 में मिली थी। जबकि शिकायतकर्ता को अग्रिम राशि उससे पहले 30 सितंबर 2024 को लौटा दी गई थी। आरोपी पक्ष का कहना है कि इन तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया। संगीता शाह ने कोर्ट को यह भी बताया कि वे सिंपलेक्स कास्टिंग्स लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं और केतन शाह कंपनी के चेयरमैन हैं। कंपनी से करीब 10 हजार लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। उन्होंने कहा कि उनकी छवि खराब करने के लिए जानबूझकर प्रकरण में फंसाया गया है। आरोपी पक्ष ने यह भी कहा कि संगीता शाह को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बेस्ट महिला उद्यमी के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी आया सामने
अदालत के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि आरोपियों के खिलाफ पहले भी पुलगांव थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हो चुका है। उस मामले में हाई कोर्ट ने उन्हें इस शर्त पर जमानत दी थी कि वे भविष्य में किसी भी तरह के अपराध में शामिल नहीं होंगे। कोर्ट ने माना कि आरोपियों ने पिछली शर्तों का पालन नहीं किया और वे दोबारा इसी तरह की गतिविधियों में शामिल पाए गए।
पुलिस की सुस्त कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
हालांकि कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा कि उपलब्ध तथ्यों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए यह अग्रिम जमानत देने योग्य मामला नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने संगीता शाह और केतन शाह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद अब आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी बेहद प्रभावशाली और बड़े संसाधनों वाले लोग हैं, इसलिए पुलिस उन पर हाथ डालने में देरी कर रही है। सुपेला थाने में धारा 406, 420, 468, 471 और 34 के तहत केस तो दर्ज है, लेकिन आरोपी अब तक पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी पक्ष अब हाई कोर्ट की शरण में चला गया है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में हो और आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। पीड़ित पक्ष का कहना है कि अगर यही मामला किसी आम नागरिक का होता, तो पुलिस अब तक कठोर कार्रवाई कर चुकी होती।


