Asian Para Games: शैलेष कुमार की अगुवाई में ऊंची कूद में भारत ने जीते तीनों पदक

Asian Para Games: शैलेष कुमार की अगुवाई में ऊंची कूद में भारत ने जीते तीनों पदक

एशियाई पैरा खेलों में एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए शैलेष कुमार की अगुवाई में भारत ने पुरूषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में तीनों पदक जीते जबकि अंजनाबेन बुंबाडिया और दिलीप गावित ने 400 मीटर टी47 महिला और पुरूष वर्ग में और सुवर्णा राज ने महिलाओं की चक्का फेंक एफ54 स्पर्धा में पीले तमगे अपने नाम किये। बुंबाडिया ने महिलाओं की 400 मीटर टी47 स्पर्धा में बृहस्पतिवार को स्वर्ण पदक जीता जबकि जयंती बेहेडा को रजत पदक मिला। बुंबाडिया ने 59 . 97 सेकंड का समय निकाला और चार खिलाड़ियों में एक मिनट से कम का समय निकालने वाली अकेली प्रतियोगी रही।बेहेडा ने एक मिनट 00.65 सेकंड का समय लिया। थाईलैंड की सासिरावान इंताचोत ने एक मिनट 02.58 सेकंड के साथ कांस्य पदक जीता। पुरूषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में शैलेष ने खेलों के नये रिकॉर्ड के साथ 1 . 89 मीटर की कूद लगाकर स्वर्ण पदक जीता।पूर्व पैरालम्पिक कांस्य पदक विजेता वरूण भाटी ने सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 1 . 84 मीटर के साथ रजत जबकि राहुल ने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके 1 . 81 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। टी63 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिनका घुटना या घुटने के ऊपर का हिस्सा कटा हुआ है या जिनके पैर में कोई कमी है। ये एथलीट दौड़ने और कूदने के लिए घुटने के जोड़ वाले कृत्रिम पैर (प्रोस्थेसिस) का उपयोग करके प्रतिस्पर्धा करते हैं।भारत ने हांगझोउ में हुए पिछले खेलों में भी इस स्पर्धा के तीनों पदक जीते थे। पुरूषों के 400 मीटर टी47 फाइनल में गावित ने 48 . 27 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता जबकि भाविककुमार भारवाड ने 49 . 31 सेकंड के समय के साथ रजत पदक हासिल किया। जापान के काकेरू इशिदा को कांस्य पदक मिला।गावित ने इससे पहले बुधवार को पुरूषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था।उन्होंने हांगझोउ खेलों में 49 . 48 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता था। टी47 श्रेणी में वे एथलीट आते हैं जिनकी कोहनी के नीचे से बाजू या कलाई कटी हुई है या ऊपरी अंग में कोई ऐसी ही कमी या खराबी है जिससे एक बाजू प्रभावित होती है। सुबह के सत्र में सुवर्णा राज ने भारत को पहला स्वर्ण दिलाया जब वह महिलाओं की चक्का फेंक एफ54 स्पर्धा में 15.66 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ अव्वल रहीं।सुवर्णा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने छह प्रयासों में से चार में 15 मीटर से अधिक का थ्रो किया। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया। ईरान की शाहला हदीदी 15.45 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि वियतनाम की थी न्गोक थुई गुयेन ने 14.65 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता।एफ54 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके धड़ और निचले अंग सक्षम नहीं होते हैं और वह व्हीलचेयर पर बैठकर थ्रो करते हैं। एथलीट अपने शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत और बांहों की गति का उपयोग करके शक्ति पैदा करते हैं। महिला 400मीटर टी12 स्पर्धा में दृष्टिबाधित तेजलबेन दामोर ने 57 . 60 सेकंड के समय के साथ रजत पदक जीता जो इन खेलों में उनका दूसरा पदक है।उन्होंने 200 मीटर टी12 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। 

एशियाई पैरा खेलों में एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए शैलेष कुमार की अगुवाई में भारत ने पुरूषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में तीनों पदक जीते जबकि अंजनाबेन बुंबाडिया और दिलीप गावित ने 400 मीटर टी47 महिला और पुरूष वर्ग में और सुवर्णा राज ने महिलाओं की चक्का फेंक एफ54 स्पर्धा में पीले तमगे अपने नाम किये। बुंबाडिया ने महिलाओं की 400 मीटर टी47 स्पर्धा में बृहस्पतिवार को स्वर्ण पदक जीता जबकि जयंती बेहेडा को रजत पदक मिला। बुंबाडिया ने 59 . 97 सेकंड का समय निकाला और चार खिलाड़ियों में एक मिनट से कम का समय निकालने वाली अकेली प्रतियोगी रही।

बेहेडा ने एक मिनट 00.65 सेकंड का समय लिया। थाईलैंड की सासिरावान इंताचोत ने एक मिनट 02.58 सेकंड के साथ कांस्य पदक जीता। पुरूषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में शैलेष ने खेलों के नये रिकॉर्ड के साथ 1 . 89 मीटर की कूद लगाकर स्वर्ण पदक जीता।

पूर्व पैरालम्पिक कांस्य पदक विजेता वरूण भाटी ने सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 1 . 84 मीटर के साथ रजत जबकि राहुल ने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके 1 . 81 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। टी63 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिनका घुटना या घुटने के ऊपर का हिस्सा कटा हुआ है या जिनके पैर में कोई कमी है। ये एथलीट दौड़ने और कूदने के लिए घुटने के जोड़ वाले कृत्रिम पैर (प्रोस्थेसिस) का उपयोग करके प्रतिस्पर्धा करते हैं।

भारत ने हांगझोउ में हुए पिछले खेलों में भी इस स्पर्धा के तीनों पदक जीते थे। पुरूषों के 400 मीटर टी47 फाइनल में गावित ने 48 . 27 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता जबकि भाविककुमार भारवाड ने 49 . 31 सेकंड के समय के साथ रजत पदक हासिल किया। जापान के काकेरू इशिदा को कांस्य पदक मिला।

गावित ने इससे पहले बुधवार को पुरूषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था।उन्होंने हांगझोउ खेलों में 49 . 48 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता था। टी47 श्रेणी में वे एथलीट आते हैं जिनकी कोहनी के नीचे से बाजू या कलाई कटी हुई है या ऊपरी अंग में कोई ऐसी ही कमी या खराबी है जिससे एक बाजू प्रभावित होती है। सुबह के सत्र में सुवर्णा राज ने भारत को पहला स्वर्ण दिलाया जब वह महिलाओं की चक्का फेंक एफ54 स्पर्धा में 15.66 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ अव्वल रहीं।

सुवर्णा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने छह प्रयासों में से चार में 15 मीटर से अधिक का थ्रो किया। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया। ईरान की शाहला हदीदी 15.45 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि वियतनाम की थी न्गोक थुई गुयेन ने 14.65 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता।

एफ54 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके धड़ और निचले अंग सक्षम नहीं होते हैं और वह व्हीलचेयर पर बैठकर थ्रो करते हैं। एथलीट अपने शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत और बांहों की गति का उपयोग करके शक्ति पैदा करते हैं। महिला 400मीटर टी12 स्पर्धा में दृष्टिबाधित तेजलबेन दामोर ने 57 . 60 सेकंड के समय के साथ रजत पदक जीता जो इन खेलों में उनका दूसरा पदक है।

उन्होंने 200 मीटर टी12 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था।

​Hindi News – News in Hindi – Latest News in Hindi | Prabhasakshi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *