इतिहास रचने वाली लंबी दूरी की धाविका सीमा नहीं चाहती थीं कि जब वह एशियाई खेलों के लिए जापान जाएं तो उनकी उम्रदराज मां उनकी चिंता करें कि वह कहां हैं, इसलिए उन्होंने एक सरल समाधान निकाला और वह उन्हें बिना बताए ही नागोया पहुंच गईं। सीमा ने अपने करियर के सबसे बड़े टूर्नामेंट के बारे में अपनी मां को नहीं बताया लेकिन महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में 32:50.05 सेकेंड के समय से अप्रत्याशित कांस्य पदक जीतने वाली इस एथलीट का कहना है कि उनकी मां बहुत चिंता करती हैं और जब भी वह यात्रा करती हैं तो बहुत चिंतित हो जाती हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से सीमा लंबे ट्रेनिंग सत्रों के लिए बेंगलुरु में रहती हैं तो उनकी मां को यही पता था कि वह वहीं हैं और सीमा ने नागोया जाते समय उन्हें यही मानने दिया।सीमा ने पदक जीतने के बाद कहा, ‘‘मेरे पिता नहीं हैं। मेरी मां काफी बुजुर्ग हैं, लगभग 78 साल की। मेरा जन्म बहुत देर से हुआ था, जब वह 45 साल की थीं।इसे भी पढ़ें: एशियाई खेल: निशानेबाजी में भारत को मिला पहला Gold, गुलवीर सिंह ने 10000 मीटर में जीता रजतजब भी मैं बाहर जाती हूं तो वह बहुत तनाव में आ जाती हैं। इसलिए, मैंने उन्हें नहीं बताया कि मैं एशियाई खेलों के लिए जापान जा रही हूं। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जब भी उन्हें पता चलेगा, वह एक दिन तक सो नहीं पाएंगी।इसे भी पढ़ें: Asian Games में भारत ने 4x400M Mixed Relay में रजत और 10,000M में सीमा ने कांस्य जीताउन्हें उच्च रक्तचाप की समस्या है इसलिए जब भी मैं ट्रेनिंग शिविर या प्रतियोगिताओं के लिए जाती हूं, मैं उन्हें ज्यादा नहीं बताती। मैं केवल अपनी बहन को बताती हूं। ’’ सीमा ने अपनी बड़ी बहन को जानकारी दी थी और अब पदक जीतने के बाद उन्होंने शायद यह खबर फैला दी होगी।हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के रेटा गांव की रहने वाली 25 वर्षीय सीमा बृहस्पतिवार को महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में पदक जीतने वाली केवल तीसरी भारतीय बनीं। इससे पहले प्रीजा श्रीधरन और कविता राउत ने 2010 के एशियाई खेलों में क्रमशः स्वर्ण और रजत जीता था। यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी मां अब जानती हैं कि वह कहां हैं तो सीमा ने कहा, ‘‘उन्हें (मां को) अब तक मेरी बहन से पता चल गया होगा, वह मुझे टेलीविजन पर देख रही होंगी।इसे भी पढ़ें: Asian Games: भारत ने Mixed 4x400m Relay में जीता Silver Medal’’ उन्होंने कहा, ‘‘नहीं तो वह (मां) यही सोच रही होंगी कि मैं इस समय बेंगलुरु (साइ सेंटर) में हूं। ’’ सीमा ने कहा, ‘‘मेरी एक बड़ी बहन है। वह लगभग 45 साल की हैं। हम परिवार में छह (सदस्य) हैं। मैं सबसे छोटी हूं। ’’ सीमा जब 12 साल की थी, उनके पिता का निधन हो गया था और उन्होंने अपना सारा बचपन नंगे पैर मवेशी चराते हुए बिताया। उसकी मां ने एथलेटिक्स अपनाने में उसका साथ दिया, भले ही गांव वाले इसे नापसंद करते थे। उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरे पहले एशियाई खेल हैं। मुझे गर्व है कि मैंने कांस्य पदक जीता और मैंने अपना सपना साकार कर लिया है।
इतिहास रचने वाली लंबी दूरी की धाविका सीमा नहीं चाहती थीं कि जब वह एशियाई खेलों के लिए जापान जाएं तो उनकी उम्रदराज मां उनकी चिंता करें कि वह कहां हैं, इसलिए उन्होंने एक सरल समाधान निकाला और वह उन्हें बिना बताए ही नागोया पहुंच गईं। सीमा ने अपने करियर के सबसे बड़े टूर्नामेंट के बारे में अपनी मां को नहीं बताया लेकिन महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में 32:50.05 सेकेंड के समय से अप्रत्याशित कांस्य पदक जीतने वाली इस एथलीट का कहना है कि उनकी मां बहुत चिंता करती हैं और जब भी वह यात्रा करती हैं तो बहुत चिंतित हो जाती हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से सीमा लंबे ट्रेनिंग सत्रों के लिए बेंगलुरु में रहती हैं तो उनकी मां को यही पता था कि वह वहीं हैं और सीमा ने नागोया जाते समय उन्हें यही मानने दिया।
सीमा ने पदक जीतने के बाद कहा, ‘‘मेरे पिता नहीं हैं। मेरी मां काफी बुजुर्ग हैं, लगभग 78 साल की। मेरा जन्म बहुत देर से हुआ था, जब वह 45 साल की थीं।
इसे भी पढ़ें: एशियाई खेल: निशानेबाजी में भारत को मिला पहला Gold, गुलवीर सिंह ने 10000 मीटर में जीता रजत
जब भी मैं बाहर जाती हूं तो वह बहुत तनाव में आ जाती हैं। इसलिए, मैंने उन्हें नहीं बताया कि मैं एशियाई खेलों के लिए जापान जा रही हूं। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जब भी उन्हें पता चलेगा, वह एक दिन तक सो नहीं पाएंगी।
इसे भी पढ़ें: Asian Games में भारत ने 4x400M Mixed Relay में रजत और 10,000M में सीमा ने कांस्य जीता
उन्हें उच्च रक्तचाप की समस्या है इसलिए जब भी मैं ट्रेनिंग शिविर या प्रतियोगिताओं के लिए जाती हूं, मैं उन्हें ज्यादा नहीं बताती। मैं केवल अपनी बहन को बताती हूं। ’’ सीमा ने अपनी बड़ी बहन को जानकारी दी थी और अब पदक जीतने के बाद उन्होंने शायद यह खबर फैला दी होगी।
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के रेटा गांव की रहने वाली 25 वर्षीय सीमा बृहस्पतिवार को महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में पदक जीतने वाली केवल तीसरी भारतीय बनीं। इससे पहले प्रीजा श्रीधरन और कविता राउत ने 2010 के एशियाई खेलों में क्रमशः स्वर्ण और रजत जीता था। यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी मां अब जानती हैं कि वह कहां हैं तो सीमा ने कहा, ‘‘उन्हें (मां को) अब तक मेरी बहन से पता चल गया होगा, वह मुझे टेलीविजन पर देख रही होंगी।
इसे भी पढ़ें: Asian Games: भारत ने Mixed 4x400m Relay में जीता Silver Medal
’’ उन्होंने कहा, ‘‘नहीं तो वह (मां) यही सोच रही होंगी कि मैं इस समय बेंगलुरु (साइ सेंटर) में हूं। ’’ सीमा ने कहा, ‘‘मेरी एक बड़ी बहन है। वह लगभग 45 साल की हैं। हम परिवार में छह (सदस्य) हैं। मैं सबसे छोटी हूं। ’’ सीमा जब 12 साल की थी, उनके पिता का निधन हो गया था और उन्होंने अपना सारा बचपन नंगे पैर मवेशी चराते हुए बिताया। उसकी मां ने एथलेटिक्स अपनाने में उसका साथ दिया, भले ही गांव वाले इसे नापसंद करते थे। उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरे पहले एशियाई खेल हैं। मुझे गर्व है कि मैंने कांस्य पदक जीता और मैंने अपना सपना साकार कर लिया है।
Hindi News – News in Hindi – Latest News in Hindi | Prabhasakshi

