Anaphylaxis Symptoms: कई बार हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ ऐसा खा लेते हैं या कोई ऐसी दवा ले लेते हैं जो हमारे शरीर को बिल्कुल रास नहीं आती। वैसे तो आम एलर्जी में थोड़ी खुजली, छींकें या हल्की दानेदार चकत्ते होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी यह एलर्जी इतनी खतरनाक हो सकती है कि इंसान की जान पर बन आती है? क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, जब कोई एलर्जी रिएक्शन अचानक बहुत तेजी से पूरे शरीर में फैल जाता है और सांस लेना तक दूभर कर देता है, इसे एनाफिलेक्सिस (Anaphylaxis) कहा जाता है। यह एक इमरजेंसी मेडिकल कंडीशन है, जिसमें तुरंत इलाज न मिले तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। आइए समझते हैं कि एनाफिलेक्सिस क्या है, इसके संकेत क्या हैं और ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए।
एनाफिलेक्सिस क्या है और यह क्यों होता है?
अमरीकन एकेडमी ऑफ एलर्जी, अस्थमा एंड इम्यूनोलॉजी (AAAAI) के अनुसार, एनाफिलेक्सिस हमारे इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) का एक अति-संवेदनशील या ओवर-रिएक्शन है। जब किसी व्यक्ति को किसी खास चीज से एलर्जी होती है और वह चीज उसके शरीर के संपर्क में आती है, तो इम्यून सिस्टम उसे बहुत बड़ा खतरा मान लेता है। इस खतरे से लड़ने के लिए शरीर में अचानक बड़ी मात्रा में हिस्टामाइन (Histamine) और अन्य केमिकल्स रिलीज होते हैं। इन केमिकल्स के कारण शरीर का ब्लड प्रेशर अचानक बहुत नीचे गिर जाता है, त्वचा पर लाल निशान, सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से सूजन आने लगती है।
एनाफिलेक्सिस फैलाने वाले मुख्य कारण
एनाफिलेक्सिस किसी भी व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन इसके सबसे आम कारण निम्नलिखित हैं;
1.खाने-पीने की चीजें- मूंगफली, काजू, बादाम, अखरोट, दूध, अंडा, मछली, झिंगा (सीफूड) या सोयाबीन।
2. दवाइयां- कुछ खास एंटीबायोटिक्स (जैसे पेनिसिलिन) या दर्द निवारक दवाइयां (Painkillers)।
3. कीड़ों के काटने से- मधुमक्खी, ततैया (Wasp) या लाल चींटी का डंक।
4. लेटेक्स (Latex)– कुछ लोगों को लेटेक्स से बने दस्तानों या रबर के सामान से भी रिएक्शन हो जाता है।
एनाफिलेक्सिस के मुख्य संकेत और लक्षण
- सांस लेने में भारी तकलीफ।
- चेहरे और गले पर सूजन।
- त्वचा पर लाल चकत्ते और भयंकर खुजली।
- ब्लड प्रेशर का गिरना।
- पेट से जुड़ी समस्याएं।
- घबराहट और तेज धड़कन।
ऐसी स्थिति में तुरंत क्या कदम उठाएं?
एनाफिलेक्सिस एक ऐसी बीमारी नहीं है जिसका इलाज घर पर आराम करके या देसी नुस्खों से किया जा सके। AAAAI के अनुसार यह एक मेडिकल इमरजेंसी है।
1.इमीडिएट इंजेक्शन (Epinephrine/EpiPen)- जिन लोगों को पहले से अपनी गंभीर एलर्जी का पता होता है, वे अपने साथ एपिनेफ्रिन ऑटो-इंजेक्टर (EpiPen) रखते हैं। अगर मरीज के पास यह है, तो बिना देर किए तुरंत उसकी जांघ की मांसपेशियों पर यह इंजेक्शन लगा देना चाहिए।
2. तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या अस्पताल पहुंचें- इंजेक्शन लगाने के बाद भी मरीज को तुरंत पास के अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ले जाना बहुत जरूरी है, क्योंकि दवा का असर खत्म होने के बाद रिएक्शन दोबारा लौट सकता है।
3. मरीज को सीधा लिटाएं- अगर मरीज को चक्कर आ रहे हों तो उसे सीधा लिटा दें और पैर थोड़े ऊपर उठा दें ताकि दिमाग तक खून पहुंचता रहे। लेकिन अगर उसे सांस लेने में दिक्कत है, तो उसे थोड़ा सा टेक लगाकर बैठने दें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


