Amit Shah : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को बीकानेर पहुंचे। अमित शाह विशेष विमान से सोमवार रात करीब 10.30 बजे नाल एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उनकी अगवानी की। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल भी इस दौरान उनके साथ मौजूद रहे। नाल एयरफोर्स स्टेशन से अमित शाह सीधे बीएसएफ मुख्यालय पहुंचे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सादगी और न्यूनतम प्रोटोकॉल के संदेश की झलक भी देखने को मिली। गृह मंत्री के दौरे में बड़ा वीवीआईपी काफिला नजर नहीं आया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज मंगलवार को बीकानेर से सटे भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 की शुरुआत करेंगे। इसके तहत राजस्थान में अलग-अलग बॉर्डर से सटे 184 गांवों को सड़क और 4G नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
सांचू पोस्ट भी जाएंगे अमित शाह
इसके बाद अमित शाह सांचू पोस्ट के लिए रवाना होंगे, जहां सेना के जवानों के साथ वार्ता करेंगे। फिर वॉच टावर से पाकिस्तान बॉर्डर भी देखेंगे। इस पोस्ट से इंटरनेशनल बॉर्डर (भारत-पाकिस्तान) सिर्फ 5 किलोमीटर की दूरी पर है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सहित कई नेताओं ने किया स्वागत
इससे पूर्व गृह मंत्री अमित शाह आगमन पर स्वागत के लिए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, प्रभारी मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा, वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़, भूपेंद्र सैनी, मिथिलेश गौतम, बिहारीलाल बिश्नोई, श्याम पंचारिया, सुमन छाजेड़, अपूर्वा सिंह, विश्वनाथ मेघवाल, ताराचंद सारस्वत, जेठानंद व्यास और अंशुमान सिंह भाटी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
इसके अलावा मुख्य सचिव, डीजीपी, प्रभारी सचिव, संभागीय आयुक्त, आईजी, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने भी गृह मंत्री की अगवानी की। इससे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 9 बजकर 48 मिनट पर नाल एयरपोर्ट पर पहुंचे।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 : राजस्थान के 184 गांव होंगे शामिल
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 के तहत राजस्थान के कुल 184 सीमावर्ती गांवों को शामिल किया गया है। इनमें श्रीगंगानगर, बाड़मेर, बीकानेर और जैसलमेर जिले के गांव शामिल है। इन गांवों में सड़क संपर्क, 4G नेटवर्क, टेलीविजन कनेक्टिविटी और विद्युत सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जाएगा।
इतिहास का गवाह है सांचू बॉर्डर
सांचू सीमा चौकी ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। वर्ष 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों के दौरान यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से अहम रहा था। 1965 के युद्ध में भारतीय सेना ने इस चौकी को पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त कराया था। यहां बना संग्रहालय आज भी वीर सैनिकों की शौर्यगाथा को संजोए हुए है और पर्यटकों में देशभक्ति का भाव जगाता है।


