राजस्थान के अलवर जिले के मालाखेड़ा कस्बे में मंगलवार की रात एक खौफनाक मंजर देखने को मिला। हल्दीना बाईपास पर शाम करीब 8 बजे एक तेज रफ्तार कार ने ऐसी तबाही मचाई कि दो हँसते-खेलते परिवारों के चिराग बुझ गए। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके में मातम पसरा दिया है।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
मालाखेड़ा थाना अधिकारी हरदयाल सिंह यादव ने बताया कि हादसा उस वक्त हुआ जब अलवर की तरफ से आ रही एक कार काफी तेज रफ्तार में थी। सबसे पहले इस बेकाबू कार ने हल्दीना बाईपास पर एक बाइक को जोरदार टक्कर मारी, जिससे बाइक पर सवार दो लोग सड़क पर गिरकर लहूलुहान हो गए। हादसा यहीं नहीं रुका; कार की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि ड्राइवर उस पर काबू नहीं पा सका और कार सड़क किनारे अपनी बाइक के पास खड़े अन्य लोगों में जा घुसी। इस दूसरी टक्कर में तीन और लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
अपनों को खोने का गम
चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुँचे स्थानीय लोगों ने तुरंत घायलों को मालाखेड़ा अस्पताल पहुँचाया, जहाँ से उन्हें गंभीर हालत में अलवर रेफर कर दिया गया। अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने 25 वर्षीय कजोड़ पुत्र रामदयाल सैनी और संतोष पुत्र रमेश सैनी (दोनों निवासी बरखेड़ा) को मृत घोषित कर दिया। वहीं, आरती, अशोक और एक अन्य घायल का इलाज चल रहा है। घायलों में से एक की हालत नाजुक होने के कारण वह फिलहाल आईसीयू में भर्ती है।
ग्रामीणों ने कार पकड़ी, ड्राइवर मौके से फरार
हादसे के बाद कार का ड्राइवर मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया, लेकिन मौके पर मौजूद भीड़ ने कार को घेर लिया और उसमें पीछे बैठी सवारियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने कार को जब्त कर लिया है और ड्राइवर की तलाश जारी है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जताया रोष
घटना की खबर मिलते ही अलवर ग्रामीण विधायक और राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली राजीव गांधी अस्पताल पहुँचे। उन्होंने रोते-बिलखते परिजनों से मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे न्याय की इस लड़ाई में उनके साथ हैं।
मीडिया से बात करते हुए जूली ने सरकार और प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने एक चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि पुलिस ने हादसे के आरोपी को पकड़ने के बाद छोड़ दिया। जूली ने कड़े शब्दों में कहा कि यह प्रशासन की घोर लापरवाही है। प्रदेश में सड़कें असुरक्षित हो गई हैं और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। मैं इस मामले की जांच की मांग करता हूँ और अगर किसी अधिकारी ने दोषी को बचाने की कोशिश की है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है, लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर तेज रफ्तार के जुनून और सड़क सुरक्षा के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।


