फफूंद में हजरत पीर बुखारी शाह साहब और महाराज सहजानंद जी की याद में लगने वाली प्रदर्शनी के दौरान अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में दूर-दराज के जनपदों से आए ख्याति प्राप्त कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिससे पूरा पंडाल श्रोताओं की तालियों से गूंज उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ नगर पंचायत अध्यक्ष अनवर कुरैशी ने किया। उन्होंने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया। इस अवसर पर चेयरमैन अनवर कुरैशी ने नगर पंचायत दिबियापुर के अध्यक्ष राघव मिश्रा को शॉल ओढ़ाकर और फूल-मालाएं पहनाकर सम्मानित किया। कवि सम्मेलन का आगाज मां सरस्वती वंदना से हुआ। जनपद जालौन से आईं कवयित्री ऋतु चतुर्वेदी ने “अपनी लगन लगा दे माता शारदे, हाथ जोड़ फरियाद करूं मां शारदे” जैसी पंक्तियों से समां बांधा। उन्होंने प्रेम और जीवन पर आधारित रचनाएं भी सुनाईं, जिनमें “देखना आज नकली फूल महक जाएंगे, प्रेम के गीत हम गुनगुनाते जाएंगे” और “सच कहूं कि मोहब्बत की मारी हूं, एक पत्थर की पुजारिन हूं” शामिल थीं।जनपद सीतापुर से पधारे कवि जगजीवन मिश्रा ने अपनी कविता में राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा,”मैंने अपनी कविता में राम रहीम लिखा,हमने जब कलम उठाई सारा हिंदुस्तान लिखा।हम लोगों को जाति-पाति में मत बांटो, हम सारे हिंदुस्तानी हैं।” उन्होंने”मजहब की खातिर देश में अब नहीं दंगा होगा,हम थामे हाथ में देश का तिरंगा होगा” जैसी पंक्तियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।मध्य प्रदेश के भिंड से आए सुनील तिवारी ने अपनी रचना “उछल कूद कर सिकंदर राजा बन गए हैं” प्रस्तुत की।
दिल्ली से आईं कवयित्री मोनिका देहलवी ने प्रेम पर आधारित रचना सुनाई, “मोहब्बत का किस्सा सुनाया न होता, तो मुझे किसी ने रुलाया न होता।” जनपद ललितपुर के कवि पंकज अंगार ने देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाएं पढ़ीं, जिनमें “वो देखो तिरंगा में लिपटा मेरा लाल आ रहा है, ऐसा लग रहा है जैसे परिवार आ रहा है” प्रमुख थी। हरियाणा से आए कवि उपेंद्र पाण्डेय और अजय अंजाम ने भी अपनी प्रभावशाली रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम का संचालन सतीश मधुप ने किया। अंत में, नगर पंचायत अध्यक्ष अनवर कुरैशी ने सभी उपस्थित लोगों और कवियों का आभार व्यक्त किया।


