Albania Violence पर Sanjay Raut का विवादित बयान, BJP बोली- लोकतंत्र को खतरे में डाल रहा विपक्ष

Albania Violence पर Sanjay Raut का विवादित बयान, BJP बोली- लोकतंत्र को खतरे में डाल रहा विपक्ष

अल्बानिया के तिराना में सुप्रीम कोर्ट को निशाना बनाकर शुरू हुआ हिंसक प्रदर्शन अब भारत में एक तीखे राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। जैसे-जैसे यह बात सामने आ रही है कि यूरोप, दक्षिण अमेरिका और एशिया में एक सुनियोजित वैचारिक जाल फैला हुआ है, भारत के राजनीतिक दलों के बीच विदेशी मदद से फैलाई गई अराजकता, सत्ता परिवर्तन और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोपों को लेकर घमासान छिड़ गया है। तिराना में सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शन लगातार छठे दिन भी जारी रहे। प्रदर्शनकारियों ने अल्बानिया के सुप्रीम कोर्ट के दफ्तरों में आग लगा दी, साथ ही संसद, सरकारी मंत्रालयों की इमारतों और पुलिस बलों पर भी हमले किए।

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अल्बानिया की इस घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने ‘X’ (ट्विटर) पर इस हमले की खबर साझा करते हुए कहा कि भारत को इस अशांति से एक ‘सबक’ लेना चाहिए। उन्होंने लिखा कि अल्बानिया के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को जला दिया है… जो भ्रष्ट प्रधानमंत्रियों की मदद कर रहा था। प्रदर्शन कर रही जनता ने संसद और सरकारी दफ्तरों पर भी हमले किए हैं… सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए। खासकर भारत को।

राउत के बयानों की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तुरंत निंदा की। BJP नेता प्रदीप भंडारी ने पलटवार करते हुए विपक्षी गठबंधन पर आरोप लगाया कि वे खुले तौर पर राज्य-प्रायोजित हिंसा और संस्थागत पतन की इच्छा रखते हैं। X पर साझा की गई एक पोस्ट में, भंडारी ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी और उसका गठबंधन अराजकता और सुप्रीम कोर्ट को धमकी दे रहे हैं! वे अराजकता की कल्पना कर रहे हैं! इससे साबित होता है कि वे अव्यवस्था चाहते हैं! कांग्रेस पार्टी और उनका गठबंधन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक खतरा हैं!’

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केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अपना हमला और तेज़ करते हुए चेतावनी दी कि भारत के भीतर भी वैसी ही एक सोची-समझी और विदेशी ताकतों द्वारा समर्थित रणनीति अपनाने की कोशिश की जा रही है, जैसी हाल ही में फ्रांस और बांग्लादेश में देखी गई थी। उन्होंने लिखा कि ‘भारत-विरोधी गिरोहों और कुछ राजनेताओं ने मिलकर युवाओं को भड़काने और हमारी सड़कों पर हिंसा फैलाने की साजिश रची है… भारत में सत्ता परिवर्तन बिल्कुल संभव है, लेकिन यह केवल चुनावों के ज़रिए हो सकता है, सोरोस के ज़रिए नहीं। सरकार की इस चेतावनी के मूल में ऐसे बढ़ते सबूत हैं जो बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर हो रहे प्रदर्शनों का इस्तेमाल व्यापक वैचारिक नेटवर्क द्वारा किया जा रहा है।

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