Ahmedabad अपने जीवनसाथी को खोने का दुख शायद शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, लेकिन जिले की वीरमगाम तहसील के वाणी गांव निवासी 44 वर्षीय शीतल राठौड़ के परिवार ने दुख की घड़ी में ऐसा निर्णय लिया, जिसने सात अन्य परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी।
ब्रेन हेमरेज के बाद ब्रेनडेड हुईं शीतल के पति कनु राठौड़ ने ब्रेनडेड पत्नी शीतल के चार अंगों, दोनों आंखों और त्वचा के दान की सहमति दी।वीरमगाम निवासी शीतल को 15 सितंबर को ब्रेन हेमरेज के बाद पहले स्थानीय अस्पताल और फिर अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर 16 सितंबर को उन्हें अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया। चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद शीतल की हालत में सुधार नहीं हुआ और रविवार को उन्हें ब्रेनडेड घोषित किया गया। अस्पताल की टीम के समझाने पर शीतल के पति कनु राठौड़ ने पत्नी की याद को दूसरों के जीवन से जोड़ने का फैसला करते हुए अंगदान की सहमति दी।
इन सात अंगों का दान
शीतल का एक लीवर, दो किडनी और एक पेंक्रियाज दान किया गया। इनका प्रत्यारोपण सिविल मेडिसिटी परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजिज एंड रिसर्च सेंटर (आइकेडीआरसी) अस्पताल में जरूरतमंद मरीजों में किया गया। वहीं दोनों आंखें एम एंड जे सरकारी आंख अस्पताल और त्वचा सिविल स्किन बैंक ने स्वीकार की। इस तरह उनके अंग और ऊतक सात जरूरतमंद लोगों के लिए जीवन और रोशनी की उम्मीद बनेंगे।
अब तक 50 त्वचा मिली
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि शीतल की त्वचा के दान के साथ सिविल स्किन बैंक में अब तक 50 त्वचा दान में मिल चुकी हैं। अस्पताल में अब तक 255 अंगदाताओं से 844 अंग और 254 ऊतक प्राप्त हुए हैं। इनमें 204 आंखें और 50 त्वचा दान शामिल हैं। कुल मिलाकर अस्पताल में अब तक 1098 अंग और ऊतक दान प्राप्त हुए हैं।
दान में मिले अंगों में किडनी सबसे अधिक
डा. जोशी के अनुसार दान में मिले अंगों में से सबसे अधिक 470 किडनी दान में मिली हैं। इसके अलावा 229 लिवर, 80 हृदय, 34 फेफड़े, 23 पेंक्रियाज, छह हाथ, दो छोटी आंत, 204 आंखें और 50 त्वचा का दान स्वीकार किया है। इस तरह से सिविल अस्पताल में अब तक एक हजार से अधिक अंग मिल चुके हैं। इनमें त्वचा और आंख भी शामिल हैं।

