मेटा अलर्ट से आगरा पुलिस ने बचाई छात्र की जान:लोकेशन ट्रेस कर 11 मिनट पर घर पहुंचे, जहर पीने से पहले छीनी बोतल

मेटा अलर्ट से आगरा पुलिस ने बचाई छात्र की जान:लोकेशन ट्रेस कर 11 मिनट पर घर पहुंचे, जहर पीने से पहले छीनी बोतल

आगरा पुलिस ने मेटा अलर्ट मिलते ही तत्परता दिखाते हुए रविवार रात एक घर का चिराग बुझने से बचा लिया। फेसबुक फ्रेंड से हुए ब्रेकअप के कारण गहरे अवसाद में डूबे एक 17 वर्षीय छात्र ने जब इंस्टाग्राम पर अपनी मौत की तैयारी का वीडियो साझा किया, तो सात समंदर पार ‘मेटा’ मुख्यालय से आए एक अलर्ट ने पुलिस को सक्रिय कर दिया। थाना जेतपुर पुलिस ने महज 11 मिनट के भीतर छात्र के कमरे में पहुंचकर उसे जहर पीने और फांसी लगाने से ऐन वक्त पहले सुरक्षित बचा लिया। ​आधी रात को आया ‘इमरजेंसी अलर्ट’
पुलिस के अनुसार घटना 3 मई की रात की है। बीए द्वितीय वर्ष के एक छात्र ने देर रात करीब 01:49 बजे इंस्टाग्राम पर एक सुसाइड नोट पोस्ट किया। इसमें उसने अपनी मां से माफी मांगते हुए लिखा, “अम्मी, मैं आपको तकलीफ नहीं देना चाहता था, इसलिए अपनी मौत का कारण इस लेटर में लिख रहा हूं।” पोस्ट होते ही मेटा कंपनी ने उत्तर प्रदेश पुलिस की मीडिया सेल को तुरंत ई-मेल के जरिए आपातकालीन अलर्ट भेजा। ​लोकेशन ट्रेस होते ही दौड़ी पुलिस
सूचना मिलते ही पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने मीडिया सेल को तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए। तकनीकी टीम ने छात्र की लोकेशन ट्रेस की और थाना जैतपुर पुलिस को सूचित किया। पुलिस टीम बिना समय गंवाए छात्र के घर पहुंची और कमरे का दरवाजा खोला। वहां का नजारा देख पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। छात्र के एक हाथ में कीटनाशक की बोतल थी और पास ही एक मोटी रस्सी रखी थी। पुलिसकर्मियों ने फुर्ती दिखाते हुए छात्र के हाथ से बोतल छीनी और उसे शांत कराया। पूछताछ में छात्र ने बताया कि फेसबुक के जरिए उसकी एक युवती से दोस्ती हुई थी, लेकिन हाल ही में हुए विवाद और ब्रेकअप के बाद वह गहरे तनाव में था। उसने बचने की कोई गुंजाइश न रहे, इसलिए जहर और फांसी दोनों की योजना बनाई थी। पुलिस ने छात्र की उचित काउंसलिंग की और परिजनों को सौंपा, जिसके बाद छात्र ने भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का वादा किया। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश पुलिस और मेटा के बीच साल 2022 से एक समझौता प्रभावी है, जिसके तहत आत्मघाती पोस्ट पर तत्काल पुलिस को सूचना दी जाती है। इस प्रणाली के जरिए 1 जनवरी 2023 से अब तक पूरे प्रदेश में 2700 लोगों की जान बचाई जा चुकी है। अकेले आगरा कमिश्नरेट ने बीते एक साल में 58 लोगों को बचाया गया है।

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