चित्तौड़गढ़ जिले में अफीम तौल के बाद किसानों को कुल 4 करोड़ 28 लाख 60 हजार 11 रुपए का भुगतान किया गया। अब पहले डिवीजन के किसानों से ली गई अफीम की क्वालिटी का फाइनल रिपोर्ट आ चुका है। रिपोर्ट के अनुसार पता चला है कि 715 किसानों को उनकी अफीम की क्वालिटी के हिसाब से पेमेंट ज्यादा किया गया है। अब इन किसानों से कुल 41 लाख 90 हजार रुपए वापस लिए जाएंगे। विभाग का कहना है कि जिन किसानों की अफीम की क्वालिटी तय स्तर की नहीं निकली, उन्हीं से यह रिकवरी की जाएगी। इस पूरे मामले के बाद अब विभाग ने कार्रवाई शुरू करने की तैयारी कर ली है। फाइनल रिपोर्ट में क्वालिटी कम निकली जब अफीम की जांच नीमच फैक्ट्री में की गई और उसकी फाइनल रिपोर्ट आई, तब यह साफ हुआ कि कई किसानों की अफीम की क्वालिटी उतनी अच्छी नहीं थी, जितनी पहले मानी गई थी। पहले अनुमान के आधार पर भुगतान कर दिया गया था, लेकिन जांच में फर्क सामने आया। इसी वजह से 715 किसानों को ज्यादा पैसा मिल गया। अब विभाग ने साफ कर दिया है कि यह अतिरिक्त राशि वापस ली जाएगी। पुरानी पेमेंट सिस्टम में ऐसे होता था काम जिला अफीम अधिकारी बीएन मीणा ने बताया कि पहले भुगतान का तरीका अलग था। उस समय किसानों को उनकी अफीम की कैटेगरी के हिसाब से करीब 90 प्रतिशत पैसा पहले ही दे दिया जाता था। बाकी 10 प्रतिशत पैसा फाइनल रिपोर्ट आने तक रोका जाता था। फाइनल रिपोर्ट भी लगभग सितम्बर महीने में आती थी। अगर रिपोर्ट में अफीम की क्वालिटी सही निकलती थी तो बाकी पैसा भी दे दिया जाता था, लेकिन अगर क्वालिटी कम होती थी तो वह 10 प्रतिशत राशि काट ली जाती थी। उस समय रिपोर्ट आने में काफी समय लगता था, क्योंकि अफीम को स्पेशल ट्रेन के जरिए गाजीपुर भेजा जाता था। नीमच फैक्ट्री से प्रक्रिया हुई तेज और बदली व्यवस्था पिछले दो सालों में व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। अब अफीम को तौल के अगले ही दिन नीमच फैक्ट्री भेज दिया जाता है। फैक्ट्री पास होने के कारण माल जल्दी पहुंचता है और दो दिन के अंदर जांच रिपोर्ट भी आ जाती है। पहले जहां महीनों का समय लगता था, अब वही काम दो दिनों में हो रहा है। स्टैंडर्ड कैटेगरी नियम से आया नया सिस्टम इस साल अप्रैल महीने से स्टैंडर्ड कैटेगरी का नया नियम लागू किया गया है। इस नियम के तहत अब किसानों को फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही भुगतान किया जा रहा है। यानी अब पहले की तरह अनुमान के आधार पर पैसा नहीं दिया जाएगा। अफीम अधिकारी बीएन मीणा ने बताया कि मार्च महीने में तौल शुरू हो चुकी थी और उस समय बजट भी आ चुका था, इसलिए उस समय पुराने तरीके से ही भुगतान किया गया। लेकिन अप्रैल के बाद नई व्यवस्था लागू होने से अब जिला अधिकारी कैटिगरी तय नहीं करते। 715 किसानों से ऐसे होगी रिकवरी प्रक्रिया जिन किसानों को ज्यादा पैसा मिला है, उन्हें विभाग की ओर से बुलाया जाएगा और उनसे राशि जमा करने को कहा जाएगा। अगर कोई किसान खुद नहीं आता है तो उसे तहसीलदार के जरिए नोटिस भेजा जाएगा। इसके बाद भी अगर पैसा जमा नहीं किया जाता है तो प्रशासन सख्त कदम उठा सकता है। जरूरत पड़ने पर तहसीलदार मौके पर जाकर किसान की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी कर सकते हैं। विभाग ने साफ किया है कि यह पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार ही की जाएगी। अफीम और डोडा तौल के आंकड़े भी आए सामने इस साल पहले डिवीजन में 5910 किसानों से करीब 49002.530 किलो अफीम ली गई है। यह अफीम 317 गांवों से आई है। इसके बदले किसानों को 4 करोड़ 28 लाख 60 हजार 11 रुपए दिए गए। वहीं दूसरी ओर 278 गांवों के 2101 किसानों से 1 लाख 23 हजार 550.500 किलो डोडा भी खरीदा गया। इसके बदले किसानों को 2 करोड़ 47 लाख 10 हजार 100 रुपए का भुगतान किया गया। सेकंड और थर्ड डिवीजन की रिपोर्ट अभी बाकी स्टैंडर्ड कैटेगरी नियम लागू होने के बाद सेकंड और थर्ड डिवीजन में अफीम तौल शुरू हुआ था। इन दोनों डिवीजन के किसानों का भुगतान अभी पूरी तरह से फाइनल नहीं हुआ है, क्योंकि उनकी जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है। विभाग का कहना है कि जैसे ही फाइनल रिपोर्ट आएगी, उसी के आधार पर किसानों को भुगतान किया जाएगा। नई व्यवस्था के चलते अब आगे भुगतान पूरी तरह रिपोर्ट के आधार पर ही होगा।


