कृष्णनगर दक्षिण सीट पर TMC के उज्ज्वल बिस्वास, BJP के साधन घोष और कांग्रेस के अब्दुर रहीम शेख के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। कृष्णनगर उत्तर में TMC उम्मीदवार अभिनव भट्टाचार्य का नामांकन रद्द होने से समीकरण दिलचस्प हो गए।
Nadia Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में नादिया जिले की सभी 17 विधानसभा सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ। जिले में कुल 39,54,882 मतदाता हैं, जिनमें 20,55,025 पुरुष, 18,99,787 महिला और 71 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। इस बार जिले में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच देखा जा रहा है।
मुख्य सीटों पर समीकरण
कृष्णनगर दक्षिण सीट पर TMC के उज्ज्वल बिस्वास, BJP के साधन घोष और कांग्रेस के अब्दुर रहीम शेख के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। कृष्णनगर उत्तर में TMC उम्मीदवार अभिनव भट्टाचार्य का नामांकन रद्द होने से समीकरण दिलचस्प हो गए। कल्याणी सीट पर विश्वजीत दास (TMC/BJP प्रमुख दावेदार), कृष्णगंज में BJP के सुकांत बिस्वास और करीमपुर में TMC के बिमलेंदु सिन्हा रॉय मुख्य चेहरा हैं।
नादिया जिले में मतुआ समुदाय की बड़ी आबादी है, जिसे BJP का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता है। लेकिन स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर नाम कटने से इस वोटबैंक में असमंजस की स्थिति बन गई है। कल्याणी के जात्रासिद्धि गांव में एक बूथ पर करीब 1300 वोटरों में से 600 से अधिक नाम SIR के कारण कट गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ मुस्लिमों के ही नहीं, हिंदू परिवारों के नाम भी सूची से गायब हुए हैं। इससे पहचान और मताधिकार का संकट पैदा हो गया है।
चुनावी इतिहास
2011 में TMC ने यहां 12 सीटें जीतकर वाम दलों को सिर्फ 5 पर सीमित कर दिया था। 2016 में TMC ने अपनी पकड़ और मजबूत की और 17 में से 13 सीटें हासिल कर लीं। इस बार भी जिले को फिफ्टी-फिफ्टी माना जा रहा है। मतुआ समुदाय के रुख और SIR के प्रभाव पर नतीजे निर्भर करेंगे।
हिंसा की घटना
मतदान के दौरान नादिया के हत्रा बाजार इलाके में हिंसक झड़पें हुईं। हत्रा बाजार प्राइमरी स्कूल बूथ पर TMC, ISF और BJP कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ गया। छपरा पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया। छपरा (82) सीट से कांग्रेस उम्मीदवार आशिफ खान ने आरोप लगाया कि TMC कार्यकर्ता मतदाताओं को डरा-धमका रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के बूथ एजेंटों को पोलिंग स्टेशन में घुसने नहीं दिया गया और उनके घरों पर धमकियां दी गईं। आशिफ खान ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।
नादिया जिले की इन 17 सीटों का परिणाम पूरे बंगाल की राजनीति पर असर डालेगा। मतगणना 4 मई को होगी। SIR विवाद, मतुआ समुदाय का रुख और स्थानीय हिंसा इस बार के नतीजों को और रोचक बना रहे हैं।


