कौशांबी में 15 मई को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने शैक्षिक भ्रष्टाचार और निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना दिया और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी कौशांबी को सौंपा। इस प्रदर्शन में जिले भर से कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महंगी फीस और किताबों को लेकर आंदोलन जिला संयोजक शिवांशु शुक्ला ने बताया कि पिछले महीने भी ABVP ने निजी स्कूलों द्वारा महंगी फीस और किताबों को लेकर आंदोलन किया था। एक महीने का समय बीतने के बावजूद बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ज्ञापन में कई प्रमुख मांगें उठाई गईं। इनमें निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा के बाजारीकरण पर रोक लगाना और प्रवेश शुल्क केवल एक बार लेना शामिल है। ABVP ने मांग की कि LKG छात्रों से 13,000 रुपये से अधिक लिए गए प्रवेश शुल्क को वापस कराया जाए। फीस वृद्धि रोकने के लिए नियम बनाने की अपील परिषद ने प्रशासन से निजी स्कूलों के लिए शुल्क निर्धारित करने और फीस वृद्धि रोकने के लिए कठोर नियम बनाने की अपील की। उन्होंने यह भी मांग की कि सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें चलाई जाएं, क्योंकि निजी स्कूल अक्सर अपनी प्रकाशन की महंगी किताबें चलाते हैं। इसके अतिरिक्त, राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत निजी स्कूलों में गरीब और वंचित बच्चों के लिए आरक्षित 25% सीटों की जांच की मांग की गई, ताकि उन्हें उनका अधिकार मिल सके। एडेड इंटर कॉलेजों में कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा के प्रावधान के बावजूद अवैध वसूली के मामलों पर भी चिंता व्यक्त की गई। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि BSA द्वारा केवल दो-तीन स्कूलों की जांच करके खानापूर्ति की गई और स्कूल प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी गई। ये रहे मौजूद इस दौरान जिला संगठन मंत्री अश्वनी सिंह, प्रांत सह मंत्री शिव बाबू चौधरी, प्रांत एसएफडी संयोजक सुशील सोनकर, सिराथू तहसील संयोजक आनंद सिंह पटेल, पवन भट्ट, मंझनपुर नगर मंत्री दीपक राजपूत, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य गौरव मिश्रा, मंझनपुर तहसील संयोजक बंश केसरवानी, चायल तहसील संयोजक प्रशांत मणि पांडेय सहित बड़ी संख्या में छात्र और विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


