आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने महिला आरक्षण विधेयक से संबंधित मौजूदा परिसीमन प्रक्रिया का विरोध करते हुए चिंता व्यक्त की है कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। गुरुवार को बोलते हुए उन्होंने कहा कि हालांकि वे विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में वृद्धि का समर्थन करते हैं, लेकिन अपनाई जा रही प्रक्रिया मौजूदा सीट संरचना को बिगाड़ रही है।
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मनीष सिसोदिया ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक एक अच्छा विचार है और हम सभी इसका समर्थन करते हैं। लेकिन जिस तरह से वे सीटों की पूरी संरचना में छेड़छाड़ कर रहे हैं, वह गलत है। प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह एक चलन बन गया है कि अगर उनकी पार्टी किसी क्षेत्र में चुनाव नहीं जीत पाती है, तो वे वहां से वोट कम करवा लेते हैं। अब वे यह नया कानून ला रहे हैं – जहां हम चुनाव नहीं जीत सकते, वहां लोकसभा की सीटें कम कर दो, और जहां हम जीतते हैं, वहां सीटें बढ़ा दो। हम परिसीमन के खिलाफ हैं; जिस तरह से यह किया जा रहा है वह बहुत गलत है।
इसी तरह, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सिस्ट के नेता एम.ए. बेबी ने सरकार के इस रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि राज्यसभा द्वारा 2010 में पारित संशोधन के आधार पर उसी संरचना का पालन किया जा सकता था। अब जो किया जा रहा है वह नरेंद्र मोदी सरकार की महिलाओं के आरक्षण की आड़ में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन को लागू करने की एक कुटिल चाल है।
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इससे पहले गुरुवार को लोकसभा में संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पेश किए गए और उन पर विचार किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधेयकों के लिए सर्वसम्मति से समर्थन का आह्वान किया, जबकि विपक्षी दलों ने परिसीमन विधेयक पर कड़ा विरोध जताया।


