संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती मंगलवार को फुलवरिया थाना क्षेत्र के करारिया, छापरिया और आसपास के इलाकों में धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर छापरिया गांव से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे क्षेत्र को ‘जय भीम’ के नारों से गुंजायमान कर दिया। शोभायात्रा छापरिया गांव से शुरू होकर करारिया और कोयला देवा बाजार से होते हुए भवानी छापर पहुंची। यात्रा का समापन बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। शोभायात्रा में फूलों और बाबा साहब की आदमकद तस्वीर से सजी एक स्कॉर्पियो सबसे आगे चल रही थी, जिसके पीछे भीम आर्मी के सैकड़ों युवा गाजे-बाजे के साथ शामिल थे। इस शोभायात्रा की एक खास बात सामाजिक समरसता और भाईचारा रही। भीषण गर्मी को देखते हुए रास्ते में जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए थे, जहां जुलूस में शामिल लोगों के लिए व्यवस्था की गई थी। संदीप यादव, सलाउद्दीन कुरैशी और अंशुल कुरैशी जैसे युवाओं ने मिलकर शोभायात्रा में शामिल लोगों के लिए ठंडे शरबत और पानी का इंतजाम किया। हिंदू और मुस्लिम समुदाय के युवाओं द्वारा मिलकर किए गए इस सेवा कार्य ने क्षेत्र में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। हाथों में नीला झंडा थामे भीम आर्मी के युवा पूरी यात्रा के दौरान अनुशासित रहे। डीजे की धुन और देशप्रेम के गीतों पर थिरकते हुए युवाओं ने ‘बाबा साहब अमर रहें’ और ‘जय भीम’ के नारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। भवानी छापर स्थित अंबेडकर प्रतिमा पर पहुंचकर सभी ने बाबा साहब के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों ने एक साथ मिलकर संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को नमन किया, जो उनके विचारों की जीत को दर्शाता है। संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती मंगलवार को फुलवरिया थाना क्षेत्र के करारिया, छापरिया और आसपास के इलाकों में धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर छापरिया गांव से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे क्षेत्र को ‘जय भीम’ के नारों से गुंजायमान कर दिया। शोभायात्रा छापरिया गांव से शुरू होकर करारिया और कोयला देवा बाजार से होते हुए भवानी छापर पहुंची। यात्रा का समापन बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। शोभायात्रा में फूलों और बाबा साहब की आदमकद तस्वीर से सजी एक स्कॉर्पियो सबसे आगे चल रही थी, जिसके पीछे भीम आर्मी के सैकड़ों युवा गाजे-बाजे के साथ शामिल थे। इस शोभायात्रा की एक खास बात सामाजिक समरसता और भाईचारा रही। भीषण गर्मी को देखते हुए रास्ते में जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए थे, जहां जुलूस में शामिल लोगों के लिए व्यवस्था की गई थी। संदीप यादव, सलाउद्दीन कुरैशी और अंशुल कुरैशी जैसे युवाओं ने मिलकर शोभायात्रा में शामिल लोगों के लिए ठंडे शरबत और पानी का इंतजाम किया। हिंदू और मुस्लिम समुदाय के युवाओं द्वारा मिलकर किए गए इस सेवा कार्य ने क्षेत्र में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। हाथों में नीला झंडा थामे भीम आर्मी के युवा पूरी यात्रा के दौरान अनुशासित रहे। डीजे की धुन और देशप्रेम के गीतों पर थिरकते हुए युवाओं ने ‘बाबा साहब अमर रहें’ और ‘जय भीम’ के नारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। भवानी छापर स्थित अंबेडकर प्रतिमा पर पहुंचकर सभी ने बाबा साहब के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों ने एक साथ मिलकर संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को नमन किया, जो उनके विचारों की जीत को दर्शाता है।


