कैमूर जिले के रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत खोरहरा गांव में शाहाबाद प्रक्षेत्र के सबसे बड़े श्री चित्रगुप्त मंदिर का पहला स्थापना दिवस मंगलवार को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर भगवान श्री चित्रगुप्त, मां दुर्गा और वीर हनुमान के नवीन विग्रहों का दिव्य शृंगार किया गया। स्थापना दिवस के लिए मंदिर के गर्भगृह को बनारसी फूलों और रोशनी से विशेष रूप से सजाया गया था। विद्वान पंडित गुड्डू जी ने मंत्रोच्चार के साथ मुख्य यजमान अखिलेश श्रीवास्तव से विधिवत पूजन संपन्न कराया। इस अवसर पर अखंड संकीर्तन का भी आयोजन किया गया। इसमें खोरहरा, जोरार, अकोढ़ी, रामगढ़, छेवरी, अभैदे और महुअर सहित कुल 12 गांवों की गायन मंडलियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। मंदिर के मुख्य पुजारी जगदीश लाल ने बताया कि बुधवार को हवन-पूजन के बाद विशाल भंडारे और पूर्णाहूति के साथ समारोह का समापन होगा। मंदिर के पुजारी ने भगवान चित्रगुप्त की महिमा बताते हुए कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, उनका प्राकट्य ब्रह्मा जी की काया से हुआ है, इसलिए उन्हें ‘कायस्थ’ कहा जाता है। वे धर्मराज की यमपुरी में मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रखते हैं। ज्ञान का प्रतीक ‘कलम’ उनकी पहचान है, जिसकी उपासना से सुख-समृद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है। इस धार्मिक आयोजन में पूर्व मुखिया राजन हर्षवर्धन, बब्बन लाल श्रीवास्तव, बसावन सिंह, राकेश लाल, अमित श्रीवास्तव, हलचल सिंह, अखिलेश तिवारी, दीपक सिंह, अमित तिवारी, धर्मेन्द्र श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्तों ने भगवान के दर्शन कर क्षेत्र की शांति और उन्नति की कामना की। कैमूर जिले के रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत खोरहरा गांव में शाहाबाद प्रक्षेत्र के सबसे बड़े श्री चित्रगुप्त मंदिर का पहला स्थापना दिवस मंगलवार को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर भगवान श्री चित्रगुप्त, मां दुर्गा और वीर हनुमान के नवीन विग्रहों का दिव्य शृंगार किया गया। स्थापना दिवस के लिए मंदिर के गर्भगृह को बनारसी फूलों और रोशनी से विशेष रूप से सजाया गया था। विद्वान पंडित गुड्डू जी ने मंत्रोच्चार के साथ मुख्य यजमान अखिलेश श्रीवास्तव से विधिवत पूजन संपन्न कराया। इस अवसर पर अखंड संकीर्तन का भी आयोजन किया गया। इसमें खोरहरा, जोरार, अकोढ़ी, रामगढ़, छेवरी, अभैदे और महुअर सहित कुल 12 गांवों की गायन मंडलियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। मंदिर के मुख्य पुजारी जगदीश लाल ने बताया कि बुधवार को हवन-पूजन के बाद विशाल भंडारे और पूर्णाहूति के साथ समारोह का समापन होगा। मंदिर के पुजारी ने भगवान चित्रगुप्त की महिमा बताते हुए कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, उनका प्राकट्य ब्रह्मा जी की काया से हुआ है, इसलिए उन्हें ‘कायस्थ’ कहा जाता है। वे धर्मराज की यमपुरी में मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रखते हैं। ज्ञान का प्रतीक ‘कलम’ उनकी पहचान है, जिसकी उपासना से सुख-समृद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है। इस धार्मिक आयोजन में पूर्व मुखिया राजन हर्षवर्धन, बब्बन लाल श्रीवास्तव, बसावन सिंह, राकेश लाल, अमित श्रीवास्तव, हलचल सिंह, अखिलेश तिवारी, दीपक सिंह, अमित तिवारी, धर्मेन्द्र श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्तों ने भगवान के दर्शन कर क्षेत्र की शांति और उन्नति की कामना की।


