सिटी रिपोर्टर ।औरंगाबाद कला कौशल मंच एवं महोत्सव परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बिहार प्रदेश स्तरीय कला महोत्सव 2026 का फाइनल मुकाबला लॉर्ड बुद्धा पब्लिक स्कूल परिसर स्थित सिद्धार्थ सभागार में संपन्न हुआ। सात दिवसीय महोत्सव के अंतिम दिन संगीत और नृत्य प्रतियोगिताओं में प्रदेश के विभिन्न प्रखंडों से चयनित कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के विजेताओं को ‘बिहार के सुरों का बादशाह’ और भरतनाट्यम नृत्य उस्ताद सम्मान से नवाजा गया। वहीं, कला के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रतिभागियों और विशिष्ट कलाकारों को कला गौरव सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन विधान परिषद सदस्य दिलीप कुमार सिंह, सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर मिश्रा, लॉर्ड बुद्धा पब्लिक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष डॉ. धनंजय कुमार, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुरेंद्र प्रसाद मिश्र, कला कौशल मंच के अध्यक्ष आदित्य श्रीवास्तव समेत अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान दानिका संस्थान की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। निर्णायक मंडल में दूरदर्शन के कलाकार बृजेश कुमार शर्मा और राम श्लोक रामा शामिल रहे। तीन सत्रों में हुई प्रतियोगिता महोत्सव में प्रतियोगिताओं का आयोजन तीन सत्रों में किया गया। पहले सत्र में जूनियर वर्ग के प्रतिभागियों ने लोकगीत और सुगम संगीत में अपनी प्रतिभा दिखाई। दूसरे सत्र में सीनियर वर्ग के कलाकारों के बीच गायन प्रतियोगिता हुई। तीसरे सत्र में जूनियर और सीनियर वर्ग के प्रतिभागियों ने नृत्य प्रस्तुतियां दीं। सीनियर वर्ग की संगीत प्रतियोगिता में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। कला-संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर विजेताओं को सम्मानित करते हुए विधान परिषद सदस्य दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि कला और संस्कृति समाज की पहचान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को मंच देने की पहल सराहनीय है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। डॉ. धनंजय कुमार ने कहा कि बच्चों और युवाओं के सर्वांगीण विकास में कला एवं संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे आयोजन मनोरंजन तक सीमित नहीं महोत्सव पुरुष सिद्धेश्वर विद्यार्थी ने कहा कि ऐसे आयोजन मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और प्रतिभाओं के संरक्षण का सशक्त माध्यम हैं। संगीत प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले कलाकारों को बिहार के सुरों का बादशाह सम्मान दिया गया, जबकि नृत्य के विजेता को भरतनाट्यम नृत्य उस्ताद की उपाधि प्रदान की गई। अन्य प्रतिभागियों और विशिष्ट कलाकारों को भी कला गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। कला कौशल मंच के अध्यक्ष आदित्य श्रीवास्तव ने कहा कि यह मंच पूरे जिले और बिहार के कलाकारों का है। इसका उद्देश्य गांवों, कस्बों और प्रखंडों में छिपी प्रतिभाओं को पहचान दिलाना और उन्हें बड़ा मंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष महोत्सव को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।कार्यक्रम के अंतिम सत्र में विभिन्न महोत्सवों से जुड़े सक्रिय सदस्यों को उनके योगदान और समर्पण के लिए सम्मानित किया गया। सिटी रिपोर्टर ।औरंगाबाद कला कौशल मंच एवं महोत्सव परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बिहार प्रदेश स्तरीय कला महोत्सव 2026 का फाइनल मुकाबला लॉर्ड बुद्धा पब्लिक स्कूल परिसर स्थित सिद्धार्थ सभागार में संपन्न हुआ। सात दिवसीय महोत्सव के अंतिम दिन संगीत और नृत्य प्रतियोगिताओं में प्रदेश के विभिन्न प्रखंडों से चयनित कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के विजेताओं को ‘बिहार के सुरों का बादशाह’ और भरतनाट्यम नृत्य उस्ताद सम्मान से नवाजा गया। वहीं, कला के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रतिभागियों और विशिष्ट कलाकारों को कला गौरव सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन विधान परिषद सदस्य दिलीप कुमार सिंह, सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर मिश्रा, लॉर्ड बुद्धा पब्लिक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के अध्यक्ष डॉ. धनंजय कुमार, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुरेंद्र प्रसाद मिश्र, कला कौशल मंच के अध्यक्ष आदित्य श्रीवास्तव समेत अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान दानिका संस्थान की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। निर्णायक मंडल में दूरदर्शन के कलाकार बृजेश कुमार शर्मा और राम श्लोक रामा शामिल रहे। तीन सत्रों में हुई प्रतियोगिता महोत्सव में प्रतियोगिताओं का आयोजन तीन सत्रों में किया गया। पहले सत्र में जूनियर वर्ग के प्रतिभागियों ने लोकगीत और सुगम संगीत में अपनी प्रतिभा दिखाई। दूसरे सत्र में सीनियर वर्ग के कलाकारों के बीच गायन प्रतियोगिता हुई। तीसरे सत्र में जूनियर और सीनियर वर्ग के प्रतिभागियों ने नृत्य प्रस्तुतियां दीं। सीनियर वर्ग की संगीत प्रतियोगिता में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। कला-संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर विजेताओं को सम्मानित करते हुए विधान परिषद सदस्य दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि कला और संस्कृति समाज की पहचान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को मंच देने की पहल सराहनीय है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। डॉ. धनंजय कुमार ने कहा कि बच्चों और युवाओं के सर्वांगीण विकास में कला एवं संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे आयोजन मनोरंजन तक सीमित नहीं महोत्सव पुरुष सिद्धेश्वर विद्यार्थी ने कहा कि ऐसे आयोजन मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और प्रतिभाओं के संरक्षण का सशक्त माध्यम हैं। संगीत प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले कलाकारों को बिहार के सुरों का बादशाह सम्मान दिया गया, जबकि नृत्य के विजेता को भरतनाट्यम नृत्य उस्ताद की उपाधि प्रदान की गई। अन्य प्रतिभागियों और विशिष्ट कलाकारों को भी कला गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। कला कौशल मंच के अध्यक्ष आदित्य श्रीवास्तव ने कहा कि यह मंच पूरे जिले और बिहार के कलाकारों का है। इसका उद्देश्य गांवों, कस्बों और प्रखंडों में छिपी प्रतिभाओं को पहचान दिलाना और उन्हें बड़ा मंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष महोत्सव को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।कार्यक्रम के अंतिम सत्र में विभिन्न महोत्सवों से जुड़े सक्रिय सदस्यों को उनके योगदान और समर्पण के लिए सम्मानित किया गया।

