24 करोड़ की डील में 4 करोड़ रुपए की बेईमानी:गयाजी में संपत्ति सौदे और बकाए रकम को लेकर विवाद, एफआईआर दर्ज

24 करोड़ की डील में 4 करोड़ रुपए की बेईमानी:गयाजी में संपत्ति सौदे और बकाए रकम को लेकर विवाद, एफआईआर दर्ज

गयाजी शहर में एक बड़ा संपत्ति सौदा विवादों में आया है। आरोप है कि 24 करोड़ 51 लाख रुपए के बड़े प्रॉपर्टी एग्रीमेंट के बावजूद पीड़ित को उसकी पूरी रकम नहीं मिली है। आरोप है कि करीब 4 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि दबा ली गई है और तंग आकर पीड़ित को अब कानूनी और पुलिस का सहारा लेना पड़ा है। पीड़ित ने इस मामले में थाना पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है और अपनी बकाया रकम वापस दिलाने की गुहार लगाई है। स्कूल बेचने के बाद शुरू हुआ विवाद पीड़ित पक्ष के अनुसार, उन्होंने अपने स्वास्थ्य संबंधी कारणों और अन्य वजहों से अपने करीब 22 साल पुराने स्कूल को बेचने का फैसला किया था। नवंबर महीने में स्कूल की रजिस्ट्री और एग्रीमेंट की प्रक्रिया पूरी हुई, जिसकी कुल कीमत 24 करोड़ 51 लाख रुपए आंकी गई थी। आरोप है कि इस सौदे के दौरान खरीदार नवीन सिंह की ओर से बैंक ऑफ बड़ौदा और एचडीएफसी बैंक के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया बढ़ाई गई, लेकिन तयशुदा रकम में से बड़ा हिस्सा गुड फेथ में लेकर एक साजिश तहत रोक लिया गया। जिसे नवीन सिंह देने को तैयार नहीं है। पीड़ित का कहना है कि कुल तय राशि में से उन्हें एचडीएफसी और बैंक ऑफ बड़ौदा के जरिए भुगतान तो मिला, लेकिन लगभग 4 करोड़ रुपए की राशि उन्हें नहीं लौटाई गई। इसके अलावा, टीडीएस (TDS) के रूप में भी नियमों के तहत जो राशि जमा होनी चाहिए थी, उसमें भी गड़बड़ी की गई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने दबाव बनाया तो कुछ ही पैसे जमा किए गए, लेकिन बाकी का बड़ा हिस्सा आज तक बकाया है। कुल बकाया 3 करोड़ 85 लाख बकाया है।
कानूनी नोटिस और धमकियों के आरोप पीड़ित का आरोप है कि जब बार-बार कहने के बावजूद पैसे नहीं लौटाए गए, तो उन्होंने तंग आकर अपने वकील के जरिए कानूनी नोटिस भेजवाया। आरोप है कि नोटिस का कोई असर नहीं हुआ और इसके विपरीत उन्हें पैसे के लिए फोन पर और अन्य माध्यमों से धमकियां मिलने लगीं। पीड़ित पक्ष का यह भी दावा है कि उनके पास इस पूरी बातचीत और लेन-देन के पुख्ता सबूत, एग्रीमेंट के कागजात और डिजिटल रिकॉर्डिंग पेनड्राइव में मौजूद हैं। वह पुलिस को सौंपा दिया गया है।
थाने में एफआईआर दर्ज, डीएसपी स्तर पर जांच की मांग परेशान होकर पीड़ित ने 30 अक्टूबर को संबंधित थाने में एफआईआर (संख्या 767/2026) दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और गवाहों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। पीड़ित ने डीएसपी और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस मामले की उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाए और उनकी बकाया रकम को ब्याज सहित सुरक्षित वापस दिलाया जाए।
पुलिस अब इस पूरे वित्तीय लेन-देन, एग्रीमेंट के दस्तावेजों और दोनों पक्षों के दावों की बारीकी से जांच-पड़ताल कर रही है। सारे आरोप गलत हैं दूसरे पक्ष के नवीन सिंह का इस मामले में कहना है कि स्कूल की खरीद फरोख्त एक करार के तहत हुआ है। पैसे की लेन देन के भी सारे दस्तावेज हमारे पास हैं। कोई कुछ भी आरोप लगाता रहे। वह सारे बेबुनियाद हैं। मनीष रुखरियार ने केस दर्ज कराया है। कोर्ट में हम भी अपना दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे। हमने भी आईजी विकास वैभव से मिलकर अपनी बात कही है। गयाजी शहर में एक बड़ा संपत्ति सौदा विवादों में आया है। आरोप है कि 24 करोड़ 51 लाख रुपए के बड़े प्रॉपर्टी एग्रीमेंट के बावजूद पीड़ित को उसकी पूरी रकम नहीं मिली है। आरोप है कि करीब 4 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि दबा ली गई है और तंग आकर पीड़ित को अब कानूनी और पुलिस का सहारा लेना पड़ा है। पीड़ित ने इस मामले में थाना पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है और अपनी बकाया रकम वापस दिलाने की गुहार लगाई है। स्कूल बेचने के बाद शुरू हुआ विवाद पीड़ित पक्ष के अनुसार, उन्होंने अपने स्वास्थ्य संबंधी कारणों और अन्य वजहों से अपने करीब 22 साल पुराने स्कूल को बेचने का फैसला किया था। नवंबर महीने में स्कूल की रजिस्ट्री और एग्रीमेंट की प्रक्रिया पूरी हुई, जिसकी कुल कीमत 24 करोड़ 51 लाख रुपए आंकी गई थी। आरोप है कि इस सौदे के दौरान खरीदार नवीन सिंह की ओर से बैंक ऑफ बड़ौदा और एचडीएफसी बैंक के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया बढ़ाई गई, लेकिन तयशुदा रकम में से बड़ा हिस्सा गुड फेथ में लेकर एक साजिश तहत रोक लिया गया। जिसे नवीन सिंह देने को तैयार नहीं है। पीड़ित का कहना है कि कुल तय राशि में से उन्हें एचडीएफसी और बैंक ऑफ बड़ौदा के जरिए भुगतान तो मिला, लेकिन लगभग 4 करोड़ रुपए की राशि उन्हें नहीं लौटाई गई। इसके अलावा, टीडीएस (TDS) के रूप में भी नियमों के तहत जो राशि जमा होनी चाहिए थी, उसमें भी गड़बड़ी की गई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने दबाव बनाया तो कुछ ही पैसे जमा किए गए, लेकिन बाकी का बड़ा हिस्सा आज तक बकाया है। कुल बकाया 3 करोड़ 85 लाख बकाया है।
कानूनी नोटिस और धमकियों के आरोप पीड़ित का आरोप है कि जब बार-बार कहने के बावजूद पैसे नहीं लौटाए गए, तो उन्होंने तंग आकर अपने वकील के जरिए कानूनी नोटिस भेजवाया। आरोप है कि नोटिस का कोई असर नहीं हुआ और इसके विपरीत उन्हें पैसे के लिए फोन पर और अन्य माध्यमों से धमकियां मिलने लगीं। पीड़ित पक्ष का यह भी दावा है कि उनके पास इस पूरी बातचीत और लेन-देन के पुख्ता सबूत, एग्रीमेंट के कागजात और डिजिटल रिकॉर्डिंग पेनड्राइव में मौजूद हैं। वह पुलिस को सौंपा दिया गया है।
थाने में एफआईआर दर्ज, डीएसपी स्तर पर जांच की मांग परेशान होकर पीड़ित ने 30 अक्टूबर को संबंधित थाने में एफआईआर (संख्या 767/2026) दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और गवाहों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। पीड़ित ने डीएसपी और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस मामले की उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाए और उनकी बकाया रकम को ब्याज सहित सुरक्षित वापस दिलाया जाए।
पुलिस अब इस पूरे वित्तीय लेन-देन, एग्रीमेंट के दस्तावेजों और दोनों पक्षों के दावों की बारीकी से जांच-पड़ताल कर रही है। सारे आरोप गलत हैं दूसरे पक्ष के नवीन सिंह का इस मामले में कहना है कि स्कूल की खरीद फरोख्त एक करार के तहत हुआ है। पैसे की लेन देन के भी सारे दस्तावेज हमारे पास हैं। कोई कुछ भी आरोप लगाता रहे। वह सारे बेबुनियाद हैं। मनीष रुखरियार ने केस दर्ज कराया है। कोर्ट में हम भी अपना दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे। हमने भी आईजी विकास वैभव से मिलकर अपनी बात कही है।  

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